सिविल अस्पताल के गेट पर नहीं स्कैनिंग सुविधा

  • सिर्फ सीएमओ कार्यालय, इमरजेंसी वार्ड और फ्लू क्लीनिक में ही जांच के लिए उपकरण

हिसार. सिविल अस्पताल के हाई रिस्क एरिया से लेकर ओपीडी तक में बिना थर्मल स्कैनिंग रोगियों और तीमारदारों का प्रवेश हो रहा है। जगह-जगह खुले गेट्स से आवागमन जारी है। कोई भी कर्मी थर्मल स्कैनर के साथ बॉडी टंप्रेचर जांचने के लिए तैनात नहीं है। अस्पताल के अलावा मलेरिया विभाग भी हाई रिस्क जोन के अंतर्गत आता है। यहां पर कोरोना जांच के लिए लैब में भेजे जाने वाले सैंपल का कोलेक्शन सेंटर है। इसके अलावा फिल्ड में सैंपलिंग और कंटेनमेंट जोन में सर्वे करने वाली टीमें अपनी-अपनी रिपोर्ट्स देने आती हैं। बावजूद इसके गेट पर आने-जाने वालों का बॉडी टंप्रेचर जांचने की व्यवस्था नहीं है। थर्मल स्कैनिंग से बॉडी टंप्रेचर का पता लगता है, अगर निर्धारित से ज्यादा है तो उपकरण अलर्ट करता है। अस्पताल में फिलहाल सीएमओ कार्यालय, फ्लू क्लीनिक व इमरजेंसी वार्ड में थर्मल स्कैनिंग से जांच होती है।

जानिए… हिसार के सिविल अस्पताल में कहां-कहां क्या है व्यवस्था

1. अस्पताल का मुख्य गेट : यहां पर डिसइंफेक्शन चैंबर लगा है मगर डब्ल्यूएचओ इससे संक्रमण खत्म होने को प्रमाणित नहीं करता है। अस्पताल के अंदर जाने के लिए गेट पर गार्ड्स तैनात हैं। मगर इनके पास थर्मल स्कैनिंग नहीं है। इसलिए बिना जांच के लिए रोगी व तीमारदार ओपीडी काउंटर पर पर्ची कटवाकर संबंधित ओपीडी में डॉक्टर को दिखाने पहुंच रहे हैं। ओपीडी में प्रवेश के वक्त भी थर्मल स्कैनिंग एंट्री नहीं है।
2. इमरजेंसी गेट : यहां से लोगों का आवागमन जारी रहता है। बावजूद इसके किसी भी कर्मी को थर्मल स्कैनर देकर नहीं खड़ा किया है। कोई भी व्यक्ति या रोगी सीधा प्रवेश कर जाता है और इधर-उधर घूमता रहता है। हालांकि इमरजेंसी वार्ड के अंदर थर्मल स्कैनर जरूर दिया है, जिसका इस्तेमाल कम होता है।
3. डिस्पेंसरी गेट : यहां भी लकड़ी का गेट खुला हुआ है। इधर से आना-जाना लगा रहता है। यहां भी थर्मल स्कैनिंग नहीं है, जबकि इसी गेट के पास स्त्री रोग की ओपीडी व डिस्पेंसरी में लगने वाली रोगियों की कतार होती है। भीड़ के कारण हाई रिस्क एरिया है मगर कोरोना पर नियंत्रण के लिए प्राथमिक कदम नहीं उठाए हैं।
4. ब्लड बैंक गेट : यहां से ब्लड बैंक, लैब में टेस्टिंग, मैट्रन कक्ष, पांच नंबर वार्ड सहित अन्य वार्ड व कार्यालय जुड़े हैं। जहां आ-जा सकते हैं। फिर भी यहां थर्मल स्कैनिंग की व्यवस्था नहीं है।
5. मेटरनिटी वार्ड : यहां तो स्थिति और भी गंभीर है। हाई रिस्क एरिया में गर्भवती महिला के साथ उसके तीमारदार आते हैं। इनकी जांच नहीं होती है। गेट पर थर्मल स्कैनिंग से जांच हो जाए तो कोरोना संदिग्ध को वार्ड में प्रवेश से रोका जा सकता है। इससे अन्य गर्भवती महिलाओं व तीमारदारों को खतरा नहीं होगा।
6. मलेरिया विभाग : यहां के अफसर खुद कहते हैं कि यह हाई रिस्क जोन है। यहां तो बहुत कम आना-जाना चाहिए। इसके बावजूद कोई आता जाता है उसकी थर्मल स्कैनिंग नहीं हो रही है। जबकि यहां स्कैनर की कमी नहीं है। अफसरों से लेकर कर्मियों तक को सुरक्षा के प्रति सचेत होना चाहिए, क्योंकि जनता से सीधा जुड़ाव जो रखते हैं।