एंजेसियों ने काम अधूरे छोड़े, निगम के खजाने का नुकसान के साथ समय भी हो रहा बर्बाद

  • छह एंजेसियों ने नगर निगम प्रशासन को दिया झटका, लेकिन व्यवस्था अब तक नहीं सुधरी

सोनीपत. सफाई टेंडर के नाम पर नगर निगम को लाखों रुपए की चपत। कार्रवाई के नाम पर अब तक कुछ विशेष नहीं। ऐसा पहली बार नहीं है। पहले भी एजेंसियां टेंडर लेकर या तो कम लटकती रही या फिर आर्थिक नुकसान पहुंचाती रही हैं। नगर निगम कार्रवाई के नाम पर अब तक कुछ विशेष नहीं कर सका है। परेशानी शहरवासी झेलते हैं। निगम अधिकारियों की अनदेखी या लापरवाही की वजह से आर्थिक नुकसान के साथ शहर का विकास भी प्रभावित होता रहा है।

नगर निगम की स्थापना में अहम किरदार रही वार्ड बंदी की प्राथमिक प्रक्रिया में निगम को एजेंसी ने झटका दिया। सर्वे का ठेका जिस एजेंसी को दिया गया था उसने भी अपना काम बीच में ही छोड़ दिया है। जिससे निगम की स्थापना में ही खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। जिसके बाद दोबारा से टेंडर लगाकर दोबारा से वार्ड बंदी करवाई गई, यही नहीं वार्ड बंदी के लिए पूर्व रेट 14 रुपए 85 पैसे प्रति यूनिट था, ऐसे में अब जब दोबारा टेंडर निकला तो यह राशि उससे ऊपर गई। यानि आर्थिक के साथ समय की भी बर्बादी।

बंदर पकड़ने वाली एजेंसी काम अधूरा छोड़कर चंपत
बंदर पकड़ने वाली एंजेसी ने अपना कार्य छोड़कर बीच में चंपत हो चुकी है। जिस कारण दो साल तक नगर निगम क्षेत्रवासियों को बंदर के उत्पात के कारण काफी परेशानियाें का सामना करना पड़ा। अभी भी शहर का एक बड़ा हिस्सा बंदरों के उत्पात से परेशान है।

ड्रेन-6 प्रोजेक्ट आज तक अधूरा

ड्रेन-6 के सौंदर्यकरण के रूप में सोनीपत का ड्रीम प्रोजेक्ट भी एजेंसी की मनमर्जी का शिकार होकर आज भी अधर में लटका है। एजेंसी करीब एक साल बाद भी आधा भी कार्य पूरा नहीं कर सकी। यहां कहने के नाम पर निगम ने एजेंसी पर करीब साढ़े आठ करोड़ रुपए का जुर्माना किया, लेकिन इससे निगम को क्या लाभ हुआ। क्योंकि अब हाल ऐ स्थिति ऐसी है कि यदि इस कार्य में यही देरी बरकरार रही तो जो कुछ क्षेत्र में सरिए आदि लगाने का कार्य हुआ था वह भी गल जाएंगे, जिससे निगम को आर्थिक चपत और लगनी तय है।

विज्ञापन माफिया निगम प्रशासन पर हावी

हाॅर्डिंग विज्ञापन टेंडर सोनीपत नगर निगम में अब तक लागू नहीं हो सका है। निगम प्रशासन पर पूरी तरह से विज्ञापन माफिया हावी है। इसका बड़ा प्रमाण खुद नगर निगम का बजट है। निगम ने पिछले साल विज्ञापन टेंडर में दो करोड़ का लक्ष्य तय किया था, लेकिन टेंडर व्यवस्था लागू नहीं होने के कारण महज 33 लाख ही राजस्व में जोड़ सके। हर पर्व एवं मौके पर जमकर शहर में पोस्टर हाॅर्डिंग लगते हैं।

प्रॉपटी टैक्स का सर्वे पूरा नहीं : प्रॉपटी टैक्स का सर्वे करने वाली याशी कंपनी का भी कुछ ऐसा ही हाल, अब तक एजेंसी आधा भी सर्वे नहीं कर सकी निगम में बिल तक पुरानी एजेंसी के भेजे गए। जिस कारण को उनके बिल को मंजूरी नहीं दी गई।
ठेकेदार पर टेंडर कटिंग का आरोप : जुलाई 2019 में सफाई टेंडर के टेंडर में एजेंसी पर कटिंग कर निगम से तय राशि से ज्यादा वसूलने का आरोप है। एजेंसी ने दो की जगह 15%तथा कर्मियों की संख्या भी बढ़ाकर ज्यादा राशि वसूल की।

बेहतर व्यवस्था बनने का कर रहे प्रयास
^हमारी कोशिश व्यवस्था को बेहतर बनाने की है। पूर्व की अपेक्षा हाल में निगम में काफी सुधार किए गए हैं। टेंडर व्यवस्था को सुधारा गया है। नुकसान से निगम को लाभ में लाने का प्रयास किया जा रहा है। मौजूदा सफाई टेंडर मामले की जांच भी की जा रही है। इसमें जो दोषी होगा उस पर नियमानुसार कार्रवाई भी होगी। अशोक कुमार बंसल, आयुक्त नगर निगम, सोनीपत।