लॉकडाउन में 52 दिन के बाद चली रोडवेज की बस तो नहीं मिली सवारी

नारनौल. लॉकडाउन के दौरान 52 दिन तक रोडवेज के पहिए भी रुके रहे। 53वें दिन शुक्रवार को आमजन के आवागमन के लिए प्रदेश के कुछ निर्धारित रुटों पर हरियाणा राज्य परिवहन की 29 बसें चली। इसमें नारनौल डिपो से पंचकूला जाने वाली बस सुबह 8.30 बजे चरखी-दादरी वाया रोहतक होकर पंचकूला के लिए रवाना होनी थी, लेकिन पहले दिन इस रुट की सवारियां न मिलने के कारण रुट को डायवर्ट कर नारनौल से रेवाड़ी वाया रोहतक होकर पंचकूला रवाना किया गया।
नारनौल से रवाना हुई यह पहली बस पंचकूला की 9 तथा रेवाड़ी की 5 सवारियां लेकर रवाना हुईं। इसके अलावा नारनौल से दूसरी बस दोपहर 12 बजे 2 सवारियां लेकर रेवाड़ी के लिए रवाना हुई तो तीसरी बस को शाम 3 बजे 16 सवारियों को लेकर रेवाड़ी के लिए रवाना किया गया। इस प्रकार पहले दिन तीनों बसें कुल 32 सवारियों को लेकर अपने गंतव्य के लिए रवाना हुईं। सवारियों की यह संख्या सोशल डिस्टेंसिंग के हिसाब से भी एक बस की सवारियों के बराबर रही। रोडवेज विभाग के अनुसार पहले दिन कम सवारियां मिलने का मुख्य कारण जानकारी का अभाव एवं ऑनलाइन टिकट बुकिंग रही। मामला चाहे जो भी हो, लेकिन अगले दो-तीन दिन यदि इसी प्रकार यात्रियों की संख्या कम रही तो निर्धारित रुटों पर बसों की संख्या में कटौती की जा सकती है।
हरियाणा राज्य परिवहन कार्यालय, चंडीगढ़ की अाेर से गुरुवार शाम को नारनौल महाप्रबंधक कार्यालय को प्रेषित किए आदेश पत्र में नारनौल डिपो से शुक्रवार से 1 बस नारनौल से पंचकूला वाया चरखी दादरी-रोहतक रूट पर चलाने के निर्देश दिए थे। इसके अलावा दो बसें नारनौल से रेवाड़ी रुट पर चलाने के निर्देश दिए थे। इन निर्धारित रुटों पर बसें चलने की जानकारी आमजन तक अखबारों के माध्यम से शुक्रवार सुबह बस के चलने से डेढ़ से दो घंटे पहले पहुंची। इसके साथ ही बस में ऑनलाइन बुकिंग करने वाले यात्रियों को ही बैठाने की छूट थी। जबकि ऑनलाइन टिकट बुक करने वाली साइड बस चलने से तीन घंटे पहले बंद कर दी जाती है। नारनौल से पंचकूला के लिए पहली बस सुबह 8.30 बजे बस स्टैंड से रवाना की गई। ऐसे में पंचकूला जाने वाला आदमी डेढ़-दो घंटे में कैसे तैयार होकर बस स्टैंड पर पहुंच सकता है तथा कैसे ऑनलाइन टिकट बुक करवा सकता है। ऐसे में जिन लोगों को गुरुवार रात को ही सोशल मीडिया से शुक्रवार को बस चलने की सूचना लग गई थी, लेकिन ही ऑनलाइन टिकट बुक करवा पाए। यही कारण रहा कि पहली बस में सवारियों की उपलब्धता कम रही।