मणिपुर में तैनात फौजी को कोरोना पॉजिटिव 12 वर्षीय बेटी ने कहा- पापा चिंता मत करो, मैं ठीक हूं… अस्पताल में बोर हो जाती हूं, आप स्टोरी बुक भिजवा देना

  • असम राइफल में मणीपुर में तैनात पिता ने परिवार से फोन पर की बात, बोले- मेरे बच्चे फौजी की तरह स्ट्रॉन्ग
  • सेक्टर-4 में रह रहा परिवार, पत्नी, बेटी, साले और पुलिस में तैनात भाई हैं संक्रमित, सभी उपचाराधीन

रेवाड़ी. शहर के सेक्टर-4 में पॉजिटिव मिली 12 वर्षीय बच्ची और उसकी मां की तबीयत में अब सुधार है। असम राइफल में मणिपुर में जूनियर कमिशन ऑफिसर (जेसीओ) के पद पर तैनात फौजी अपने पिता को खुद बेटी ने वॉइस मैसेज भेजकर ये बात कही। कोरोना जैसे वायरस से लड़ रही बेटी के हौंसले ने पिता को भी ताकत देने का काम किया। दरअसल जेसीओ का पूरा परिवार ही कोरोना से लड़ रहा है। पत्नी और बेटी के साथ ही हरियाणा पुलिस में गुड़गांव में तैनात छोटे भाई और कापसहेड़ा में साला भी संक्रमण की चपेट में आ गए। सुखद ये है कि फौजी के 9 वर्षीय बेटे की पहली और दूसरी दोनों ही रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद उसे गुरुवार को ही दादा-दादी के पास गांव मुरलीपुर भेजा जा चुका है। वहां वह परिवार की देखरेख में है। फौजी ने कहा कि उनके बच्चे भी उनकी तरह ही स्ट्रॉन्ग हैं।

नूंह के कोविड अस्पताल में चल रहा इलाज
मूलरूप से मुरलीपुर के रहने वाले असम राइफल के जवान का परिवार शहर के सेक्टर-4 में रह रहा है। उनकी पत्नी अपने 9 वर्षीय बेटे और 12 बेटी के साथ अपनी कैंसर पीड़ित मां के पास मायका दिल्ली के कापसहेड़ा गई हुई थी। पत्नी के भाई के कापसहेड़ा में पॉजिटिव मिलने के बाद 7 मई को महिला उसके दोनों बच्चों के साथ अस्पताल में दाखिल किया गया। पड़ोसियों के भी सैंपल लिए गए। 8 मई को रिपोर्ट आई तो जवान की पत्नी, उसकी बेटी और पड़ोसन संक्रमित मिली। 9 मई को जवान की पत्नी और बेटी को रेफर कर नूंह स्थित नलहड़ मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भेज दिया गया था। वे लोग वहीं उपचाराधीन है।

बच्चों ने नहीं डिगने दिया हौसला
तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले बेटे की रिपोर्ट निगेटिव आई थी। सप्ताहभर अस्पताल में रहने के बाद बुधवार को दूसरी रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई। सेना से रिटायर्ड बच्चे की दादा (दादा के भाई) भी देखभाल के लिए अस्पताल में ही रुके थे। यहां महज 9 साल की उम्र में ही बच्चे का हौंसला सभी को ताकत देने वाला रहा। उसके दादा बताते हैं कि जब मां और बहन को रेफर किया गया तो उनकी आंख में आंसू थे, मगर बच्चे ने मुस्कुराहट के साथ उन्हें विदा किया। अब घर पर परिवार की देखरेख में स्वस्थ तरीके से रह रहा है।

पत्नी-बेटी को अब बुखार की दिक्कत नहीं
दैनिक भास्कर से फोन पर बातचीत में जेसीओ ने बताया कि उनकी बेटी ने उन्हें वॉइस मैसेज भेजकर कहा कि पापा चिंता मत करना, मैं ठीक हूं। अस्पताल में बोर हो जाती हूं, इसलिए स्टोर बुक्स भिजवा देना। अस्पताल स्टाफ भी सहयोगी है, बेटी को बुक्स उपलब्ध कराई गई हैं। पत्नी ने बताया कि अब बुखार या सिरदर्द जैसी कोई दिक्कत नहीं है। वीडियो कॉल करना चाही, मगर नेटवर्क समस्या के चलते परिवार से वीडियो के माध्यम से बात नहीं हो पाई। जेसीओ (नायक सूबेदार) ने कहा कि उनके बच्चों ने जिस तरह से हिम्मत दिखाई है , कोरोना से लड़ाई में उसी हौसले की जरूरत है।