फैमिली सुरक्षित रहे; कोई खुद दूर तो किसी ने परिवार को दूर भेजा

  • जाे कोरोना ड्यूटी की जिम्मेदारी की वजह से बच्चाें काे क्वालिटी टाइम नहीं दे पा रहे

अम्बाला. किसी ने अपने परिवार काे दूर नानी के घर भेज दिया ताे काेई अब ड्यूटी की मशरूफियत की वजह से बच्चाें काे क्वालिटी टाइम नहीं दे पा रहा। लेकिन बावजूद इसके ये सभी अपनी ड्यूटी की जिम्मेदारियों काे बखूबी निभा रहे हैं।
ये लाेग हिम्मत नहीं हारते क्याेंकि अपने परिवार वालाें की मुस्कुराहट व हाैसलाअफजाही ही इन्हें अपनी ड्यूटी निभाने के लिए बूस्ट करती हैं। हम बात कर रहे हैं सिविल अस्पताल में काम कर रहे लैब टैक्निशयन व लैब टेक्निकल ऑॅफिसर की, जाे दिन-रात अपने परिवाराें से दूर रहकर काम कर रहे हैं।

वीडियाे काॅल से देखता हूं बेटे की शरारतें
मेरी फैमिली कुरुक्षेत्र के पास गांव चनारथल में रहती है। पहले ताे ड्यूटी के बाद घर वापिस चले जाते थे। लेकिन अब जब से काेविड-19 के दाैरान ड्यूटी लगी है ताे मैंने खुद घर जाना बंद कर दिया। परिवार से दूर यहीं अपने स्टाफ के साथ धर्मशाला में रह रहे हैं। मेरी 12 साल की बेटी अाैर 9 महीने का बेटा सक्षम है। महीने से ज्यादा हाे गया है परिवार वालाें काे मिले हुए। बेटे ने अभी-अभी बाेलना शुरू किया है। राेज नए-नए शब्द बाेलता है ताे सुनकर अच्छा लगता है। बेटे की शरारतें अाैर उसकी बातें वीडियो काॅल से ही देख लेता हूं। बेटी समझदार है अक्सर फाेन करके मां की तरह निर्देश देती है कि पापा हैंडवाॅश करते रहना, अपना बहुत ख्याल रखना है। उसकी बातें सुनकर ड्यूटी के प्रति जिम्मेदारी का हौसला अाैर अधिक बढ़ जाता है। इस बात की खुशी भी है कि परिवार चाहे दूर है लेकिन सुरक्षित है।
प्रवीण कुमार, टेक्निकल अाॅफिसर, लैबाेरेट्री, सिविल अस्पताल।

जब घर पहुंचती हूं तब तक बच्चे साे चुके हाेते हैं
काेराेना पेशेंट के सैंपल लेने और पैक करने में ड्यूटी लगी हुई है। घर में 6 साल की बेटी हेतल और 3 साल का बेटा धारांश है। शुरू में जब ड्यूटी लगी ताे बच्चाें काे छूने से भी डर लगता था। अब दाे या तीन दिन में एक बार ऐसा हाेता है कि मैं ड्यूटी करके देर से घर पहुंचती हूं ताे बच्चे मुझे याद करके साे चुके हाेते हैं अगले दिन फिर सुबह जल्दी ड्यूटी पर पहुंचना हाेता है तब भी बच्चे साे रहे हाेते हैं। साेते हुए उन्हें प्यार करके ड्यूटी पर आ जाती हूं। बच्चे भी शिकायत करने लगे हैं कि मम्मी आप हमारे साथ घर पर क्याें नहीं रहती। घर जाकर उन्हें हग भी नहीं कर पाती। फ्रैश हाेने के बाद ही उनसे मिलती हूं। बेटा कभी जिद्द करता है मुझसे मिलने की ताे बेटी उसकाे समझाती है कि मम्मी अभी काेराेना काे भगा रही हैं जब काेराेना जाएगा तभी हम बाहर घूमने जाएंगे। बच्चे ताे मेरे साथ बिताए जाने वाले क्वालिटी टाइम काे पिछले 3 महीने से मिस कर रहे हैं। हसबैंड का स्कूल है ताे वे भी ज्यादातर स्कूल के काम में बिजी रहते हैं एेसे में बेटी अपने भाई काे संभाल लेती है। मुझे लगता है कि यह टफ टाइम है लेकिन यह भी जल्द ही निकल जाएगा।
पायल गुप्ता, लैब टैक्निशियन, सिविल अस्पताल कैंट।

परिवार काे भेज दिया नानी के घर

45 दिनाें से काेविड-19 में ड्यूटी कर रहा हूं। यहां सैंपल पैक करके भिजवाने पड़ते हैं ताे रिस्क ताे रहता ही है। परिवार काे पहले ही मैंने उनकी नानी के घर पानीपत भेज दिया था ताकि मेरी वजह से उन्हें काेई परेशानी न हाे। मेरे दाे बेटे 13 साल का प्रक्षित अाैर 9 साल का अक्षित है। पत्नी संताेष गवर्नमेंट जाॅब में है। अभी 12 मई काे मेरी शादी की सालगिरह थी। शादी काे 15 साल हाे चुके हैं अाैर इन 15 सालाें में पहली बार एेसा हुअा है कि मैं अपने परिवार और वाइफ से दूर हूं। पूरा दिन ड्यूटी करने के बाद शाम काे जब घर पहुंचा ताे वाइफ संताेष अाैर दाेनाें बेटाें ने वीडियो काॅल के जरिए केक कटवाकर विश किया।
देवेंद्र हुड्डा, टैक्नीकल ऑफिसर, सिविल अस्पताल, कैंट।