धारूहेड़ा में इंडस्ट्री और वाहनों का चक्का रुका तो 1970 जैसा हुआ पर्यावरण, एक्यूआई 82 पर आया

पानीपत. देशभर में कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन-3 जारी है। सड़कों से लेकर कॉलाेनियों की गलियां तक सुनसान हैं। उद्योगों के साथ अन्य तरह का कामकाज भी लगभग ठप हैं। ऐसे में लोगों के लिए एक सुकून भरी भी खबर है। औद्योगिक क्षेत्र धारूहेड़ा के साथ ही रेवाड़ी शहर के वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) में बड़ी भारी कमी आई है। एक तरह से कहे तो ऐसा वातावरण है, जैसा 1970 के दशक में था। घरों के बाहर सुबह-शाम के समय चिड़ियां की चहचहाहट भी सुनाई देने लगी हैं। यह लॉकडाउन की वजह से वातावरण में हुए सुधार का ही परिणाम है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड धारूहेड़ा के अधिकारियों के अनुसार जिले में वाहनों के प्रदूषण के अलावा उद्योगों से निकलने वाले धुएं और निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल से प्रदूषण स्तर बढ़ता है। पिछले करीब एक माह से सबकुछ बंद है। इस कारण प्रदूषण अपने निम्न स्तर पर आ गया है।
जिले में वर्ष 2018 में 185 था एक्यूआई
जिला रेवाड़ी के वायु प्रदूषण पर नजर रखने के लिए हरियाणा पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की ओर से नगरपालिका धारूहेड़ा परिसर में वायु प्रदूषण सूचकांक मशीन लगाई गई है। जिस पर साल 2018 और 2019 के दौरान 3 मई को पीएम 2.5 का स्तर 185 से उपर था, लेकिन इस साल लॉकडाउन की वजह से यह स्तर गिरकर 82 पर आ गया है।
रेवाड़ी में छोटे-बड़े 1500 उद्योग हैं
जिले में छोटे-बड़े करीब डेढ़ हजार उद्योग हैं। उनसे निकलने वाली धुआं व अन्य कैमिकल पदार्थों से प्रदूषण फैलता है। जिला से होकर जा रहे दिल्ली-जयपुर नेशनल हाइवे और रेवाड़ी, बावल व भिवाड़ी समेत रेवाड़ी से नारनौल और रेवाड़ी से रोहतक की तरफ आने-जाने के लिए बड़ी संख्या में लोग अपने वाहनों का प्रयोग करते हैं। शहर के अंदर भी सड़कों पर वाहनों का धुआं प्रदूषण के स्तर को बढ़ाता था। प्रदूषण में खासकर बुजुर्ग और दमे के मरीज को सांस लेने में बड़ी समस्या आती थी। प्रदूषण का स्तर बढ़ते ही अस्पतालों में एकाएक दमा और सांस लेने में तकलीफ जैसी बीमारी से पीड़ितों की संख्या बढ़ जाती है।
लोग उत्साहित; क्योंकि सुबह-शाम घर के बाहर सुनाई देने लगी पक्षियों की चहचहाहट
रेवाड़ी स्थित मसानी बैराज।
एक्यूआई स्थिति
0-50 अच्छा
51-100 संतोषजनक
101-200 मध्यम
201-300 खराब
301-400 बहुत खराब