औने-पौने दाम में सब्जी बेचने को विवश हुए किसान

  • किसानों के लिए सब्जी उगाने और पैदा करने में खर्च हुई लागत तक निकाल पाना हो रहा है मुश्किल

महेंद्रगढ़. अटेली के किसानों का संकट इतना बढ़ा कि उनके लिए सब्जी उगाने व पैदा करने में खर्च हुई लागत तक निकाल पाना मुश्किल हो गया है। अटेली व दूसरी मंडियों में टमाटर, ककड़ी, तरबूज का लागत भाव नहीं मिलने पर किसान अब पड़ोसियों व गौशाला में ये ऊपज देना ज्यादा उचित समझ रहे हैं।

जानकारी के अनुसार पिछले दो दिनों से महेंद्रगढ़, नारनौल, बहरोड़, कुंड सब्जी मंडियों में मांग नहीं होने पर ये धंधा किसानों के लिए घाटे का सौदा बन रहा है। आस-पास में खेती करने वाले किसान पिछले 3-4 दिनों से औने-पौने दामों में सब्जियों को बेच रहे हैं। गर्मी के मौसम में ठंडक का अहसास करवाने वाले पुदीने को भी खरीदने वाले नहीं मिल रहे हैं। कोविड-19 संक्रमण को लेकर गन्ना व दूसरे जूस की दुकानें बंद होने से पुदीना की डिमांड काफी घटी है।

अटेली मंडी में के आस-पास के गांवों जैसे मोहलड़ा, कारिया, गढ़ी, बोचड़िया, तुर्कियावास, अटेली, बेगपुर, सैदपुर, बिहाली, गणियार आदि गांवों में किसान सब्जी उगाते हैं। लॉकडाउन के चलते सब्जियों बड़े शहरों में नहीं जाने तथा पिछले दो दिनों से नारनौल व महेंद्रगढ़ की सब्जी मंडी बंद होने से एकाएक सब्जियों के थोक के दाम धड़ाम से गिर गये हैं। गुरुवार को अटेली मंडी में टमाटर के थोक भाव में 3 रुपए, तरबूज 4, घीया 3, पुदीना 5, पालक 5, पेठा 2, घीया 3 रुपए किलो बिके। सब्जी विक्रेता बिशन, प्रताप, अशोक प्रधान, श्याम सुंदर, नीरज, मोतीलाल ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान हमने पहले भी सब्जी के दाम बढ़ने नहीं दिये, पिछले 2-3 दिनों से महेंद्रगढ़ व नारनौल सब्जी मंडी कोरोना के केस मिलने पर मंडी बंद होने से सब्जी सस्ती हुई है।

अटेली सब्जी मंडी एसोसिएशन के प्रधान अशोक कुमार ने बताया कि अटेली कस्बे में बाहर की सब्जी नहीं आने दे रहे हैं। सब्जी बेचते समय सोशल डिस्टेंस का विशेष ख्याल रखा जाता है। प्रशासन को अटेली मंडी में सब्जी विक्रेताओं के लिए खास व विशेष जरूर करने की आवश्यकता है ताकि किसान व थोक विक्रेता को नुकसान नहीं हो सके। 2-3 दिन से महेंद्रगढ़ व नारनौल में सब्जी मंडी बंद होने से सब्जियों के दामों में गिरावट आई है।