शब्दों के फेर में उलझी जांच के लिए बनी एसईटी की पावर

  • अधिकारियों ने बनाई सिर्फ एंक्वारी टीम, जो पूछताछ से ज्यादा कुछ नहीं कर सकती
  • गृह मंत्री बोले-कोई तकनीकी दिक्कत आई तो करेंगे दूर

पानीपत. (मनोज कुमार) हरियाणा में खरखौदा के बाद राज्य भर में शराब तस्करी के मामलों के लिए बनाई स्पेशल एंक्वारी टीम (एसईटी) की पावर शब्दों के फेर में उलझ गई है। क्योंकि एसआईटी की जितनी पावर एंक्वारी टीम के पास नहीं होती है। गृह मंत्री अनिल विज ने मामले की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम बनाने की बात कही थी। परंतु जब नाेटिफिकेशन जारी हुई तो बनाई गई स्पेशल एंक्वारी टीम लिखा हुआ था। यानि यह टीम गहन पड़ताल नहीं कर सकती। बल्कि रिकॉर्ड को ही देखेगी। इन्वेंस्टिगेशन टीम बनाना तो दूर इतने बड़े घोटाले के लिए इंक्वारी टीम भी नहीं बनाई है। इस टीम को जो तीन बिंदु दिए गए हैं, उसके लिए 20 दिन भी ज्यादा हो सकते हैं। क्योंकि इसे केवल रिकॉर्ड ही इकट्‌ठा करना है। पुलिस और एक्साइज डिपार्टमेंट से मंगवाया भी जा सकता है।

कुछ सीनियर अफसरों का कहना है कि इंक्वारी टीम भी बनाते तो मामले में कुछ जांच आवश्य होती। इन्वेस्टिगेशन तो दूर की बात है। राज्य में खरखौदा के बाद पानीपत के समालखा, फतेहाबाद और नारनौल में गोदामों से शराब चोरी के बड़े खुलासे हो चुके हैं। मामला इतना गंभीर होने के बावजूद सिर्फ एंक्वारी टीम बनाने से पूरी पड़ताल कैसे हो पाएगी। यदि इन्वेस्टिगेशन टीम बनाई जाती तो तहकीकात गहनता से की जा सकती थी। रिकॉर्ड जांच के साथ टीम मौके पर एक-एक गोदाम में जाकर निरीक्षण कर वहां की स्थिति देखती। यदि किसी मामले की पुलिस या एक्साइज विभाग की जांच से संतुष्ट नहीं होती तो टीम उनसे इनकी वजह भी जान सकती थी। जबकि सीएम ने खुद मामले को गंभीरता से लेकर हर जिले में मजिस्ट्रेट नियुक्त कर वहां गोदामों की जांच के आदेश दिए हैं। एसआईटी और एसईटी को लेकर गृह मंत्री अनिल विज ने भी अधिकारियों से पूछा था। उन्हें बताया गया कि इसमें कोई फर्क नहीं होता है। उनका कहना है कि यदि एसईटी के पास पावर कम है तो उसे बढ़ा दिया जाएगा। यदि कोई तकनीकी दिक्कत आई तो उसे दूर किया जाएगा। यदि एसईटी के पास पावर कम होती है तो इसे बढ़ा दिया जाएगा।

जानिए…क्या है एंक्वारी, इंक्वारी और इन्वेंस्टिगेशन में फर्क, यूं समझिए

  • एंक्वारी में फोरी तौर पर पूछताछ की जाती है। जैसे स्कूल में बच्चे को कक्षा में खड़ा करके सवाल पूछे जाते हैं। इससे उसके अध्ययन के बारे में औपचारिक पता लगता है।
  • इसमें पूछताछ से आगे कुछ जांच होती है। जैसे स्कूल में बच्चों की लिखित परीक्षा ली जाती है। इससे बच्चे के अध्ययन के बारे में कुछ ज्यादा जानकारी मिल जाती है।
  • बच्चे की लिखित परीक्षा के बाद यदि यह भी जाना जाए कि उसके कम या ज्यादा अंक कैसे आए। यानी पीछे का रहस्य भी पता लगाया जाए।

यह है मामला
सोनीपत के खरखौदा में शराब घोटाला सामने आने के बाद गृह मंत्री अनिल विज के आदेश पर होम सेक्रेट्री िवजय वर्धन ने 11 कई को पूरे राज्य में जांच के लिए सीनियर आईएएस टीसी गुप्ता की अध्यक्षता में स्पेशल एंक्वारी टीम गठित की थी। इसमें सीनियर आईपीएस एडीजीपी सुभाष यादव को एक्साइज एंड टेक्सेशन डिपार्टमेंट के एडिशनल कमिश्नर विजय सिंह को शामिल किया गया। पहले तो जहां जांच पूरे लॉकडाउन में होने की हो रही थी, उसकी बजाए आदेशों में 15 मार्च से 10 अप्रैल तक दर्ज एफआईआर देखने की बात लिखी गई। मामला गृह मंत्री के संज्ञान में आया तो उन्होंने इसे लेकर अफसरों से बातचीत की तो अब ठीक करके 15 मार्च से 10 मई किया गया। उन्हें बताया गया कि अप्रैल गलती से लिखा गया।
एसईटी को यह दिया गया है काम

  • पिछले दो वर्षो में प्रदेश के एक्साइज (आबकारी) विभाग द्वारा कानून की अवहेलना के कारण जो शराब का स्टॉक सील कर गोदामों आदि में रखवाया गया, उसकी वास्तविक उपलब्धता की जांच करना शामिल है।
  • यह टीम 1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2020 की अवधि के दौरान प्रदेश के पुलिस एवं आबकारी विभाग द्वारा बरामद अवैध शराब और बगैर एक्साइज ड्यूटी भुगतान की शराब की बरामदी के केसो में की गई कार्यवाही और जुर्माना लगाने के मामलों की जांच करेगी।
  • 15 मार्च से लेकर 10 मई बीच की दर्ज ऐसी सभी एफआईआर को एकत्रित कर एवं उनके परिणाम का मिलान करेगी। जो एक्साइज विभाग के एल-1 और एल-13 गोदामों और पुलिस के मालखानो से शराब की चोरी से संबंधित हैं।

कानून में कहीं भी एंक्वारी को परिभाषित नहीं किया: एडवोकेट हेमंत
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार के अनुसार मामले को लेकर स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम की बजाए स्पेशल एंक्विरी टीम रखना बड़ा सवाल है। उनका कहना है कि सीआरपीसी-1973 की धारा-2 में भी केवल इंक्वारी और इन्वेस्टीगेशन को ही परिभाषित किया गया हैं। उसमें कहीं भी एंक्वारी का उल्लेख नहीं किया गया है। दो वर्ष पूर्व जब भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन ) कानून-2018 संसद द्वारा पारित किया गया,जिसे 26 जुलाई 2018 से लागू किया गया। जिसके द्वारा मूल भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम -1988 में नई संशोधित धारा-17 ए जोड़ी गई, उसमें पुलिस अधिकारी द्वारा एंक्वारी , इंक्वारी और इन्वेस्टीगेशन अर्थात पूछ-ताछ, जांच और अन्वेषण करने का उल्लेख तो हैं लेकिन पूछ-ताछ की कानूनी परिभाषा इस संशोधित कानून में स्पष्ट नहीं की गई है।