लॉकडाउन में मानसिक स्तर, रिश्तों और कार्यशैली को जानने के लिए जीजेयू की टीम ने किया अध्ययन

  • 65% महिलाएं और 34% पुरुष मानते हैं कि लॉकडाउन में परिवारों में संबंध सुधरे हैं

  • इधर- 59% महिलाओं और 30% पुरुषों ने किया क्रिएटिव वर्क

हिसार. (ज्योति अरोड़ा) कोविड-19 के चलते लॉकडाउन में घरों में रहे लोगों के मानसिक स्तर पर पड़ने वाले प्रभाव को जानने के लिए जीजेयू की टीम ने एक अध्ययन किया है। रिसर्चर्स ने अध्ययन में पाया कि, लॉकडाउन में परिवार के साथ जहां 65.68 फीसदी महिलाएं मानती हैं कि परिवार संबंधों में सुधार हुआ तो 34.32 फीसदी पुरुष भी इस बात से इत्तफाक रखते हैं। वहीं लॉकडाउन के दौरान क्रिएटिव वर्क में भी महिलाएं आगे रहीं। 59 प्रतिशत महिलाओं ने क्रिएटिव वर्क किया तो 30 प्रतिशत पुरुषों ने रचनात्मक कामों में समय बिताया। जीजेयू के डिपार्टमेंट ऑफ अप्लाइड साइकोलॉजी की सीनियर रिसर्चर वंदना मलिक, उनके गाइड प्रो. राकेश कुमार व असिस्टेंट प्रोफेसर पूनम ने मिलकर उत्तर भारत के लोगों से ऑनलाइन कुछ सवालों के जवाब जाने थे।

रैंडम सैंपलिंग के जरिए 15 से 75 साल तक के लोगों ने अपने जवाब दर्ज करवाए। सैंपल समूह की औसत आयु 27.67 वर्ष रही। इस अध्ययन में कुल 539 लोगों से सवाल पूछे गए जिसमें 450 नॉर्थ इंडिया से थे। इसमें 63 प्रतिशत महिलाएं व 37 प्रतिशत पुरुष शामिल हुए। रिसर्च टीम ने 24 प्रश्नों की प्रश्नावली में 15 प्रश्न मैंटल हेल्थ से जोड़कर पूछे। जिसके विभिन्न आयु वर्ग के लोगों से राय ली गई। जिसमें से कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर इस प्रकार है।

लॉकडाउन में पारिवारिक रिश्तों व आपसी तालमेल में सुधार हुआ

महिलाओं ने माना कि लॉकडाउन के दौरान बिताया जाने वाला समय परिवार के लिए काफी अच्छा साबित हुआ है। 65.68 प्रतिशत महिलाओं का कहना है कि इससे पारिवारिक संबंधों में सुधार हुआ है। वहीं 34.32 प्रतिशत पुरुषों ने भी इसे स्वीकारा है। वहीं बात की जाए परिवार के साथ खुशी की तो 62 प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि वे इस दौरान खुशी का अनुभव कर रही हैं तो वहीं 37 प्रतिशत पुरुष भी ऐसा मानते हैं। इस दौरान क्या आपने क्रिएटिविटी में हाथ आजमाया: रिसर्च के मुताबिक 30 प्रतिशत पुरुषों ने खुद को क्रिएटिव आइडिया में हाथ आजमाने की बात की तो वहीं 59 प्रतिशत महिलाएं भी इसमें आगे रहीं।

क्या लॉकडाउन में सोशल मीडिया बना अपनों से जुड़ने का माध्यम

सोशल डिस्टेंसिंग के चलते अपनों से जुड़े रहने का माध्यम सोशल मीडिया को बनाए जाने की बात को 57 प्रतिशत महिलाओं व 32 प्रतिशत पुरुषों ने माना है।क्या इस समय में आपने अकेलापन महसूस कियालॉकडाउन में 20 प्रतिशत लोगों का मानना है कि अकेलापन महसूस करना पड़ा। 75 प्रतिशत लोगों ने परिवार के साथ से तनाव महसूस न होने की बात स्वीकारी। वहीं इस दौरान अपने स्वास्थ व जीवनशैली तथा कार्य क्षमता में बदलाव भी महसूस किए गए। कार्यक्षमता में बदलाव के लिए 53 प्रतिशत पुरुषों व 46 प्रतिशत महिलाएं भी ऐसा मानती हैं।

क्या सोशल डिस्टेंसिंग से व्यवहार में बदलाव आया
अपनों से न मिल पाने व लोगों से दूरी बनाए रखने से व्यवहार पर भी प्रभाव पड़ा। इस सवाल पर 25 प्रतिशत महिलाएं व 20 प्रतिशत पुरुषों ने कहा कि उनके व्यवहार पर इसका प्रभाव दिखाई दिया। वहीं 16 प्रतिशत पुरुषों व 9 प्रतिशत महिलाओं ने इस दौरान मानसिक स्वास्थ पर प्रभाव पड़ने की बात को स्वीकार किया है। वहीं 28 प्रतिशत पुरुषों व 41 प्रतिशत महिलाओं ने इसका मानसिक स्तर पर किसी प्रकार का प्रभाव न पड़ने की बात कही। इसके साथ ही 59.77 प्रतिशत लोगों ने इस दौरान अपने खानपान की आदत में बदलाव की बात को स्वीकारा।