मुरथल ब्लॉक के 32 गांवों के तालाबों में स्वास्थ्य विभाग ने छोड़ी गंबूजिया मछली

  • मच्छर का लार्वा खाती है यह मछली

सोनीपत. मच्छर जनित रोगों पर नियंत्रण करने के लिए मलेरिया विभाग ने ग्राउंड स्तर पर काम शुरू कर दिया है। मुरथल ब्लाॅक के 32 गांवों के तालाबों में एमपीएचडब्ल्यू कर्मियों ने लार्वा खाने वाली गंबूजिया मछलियों डाली। पूरे जिले में अब यह अभियान चलेगा। इसके साथ ही घरों की पानी की टंकी की भी जांच की जाएगी। स्वास्थ्य कर्मी मनीष दहिया ने बताया इस मछली को लोग कहीं भी किसी भी प्रकार के तालाब, गड्ढे, नाली या गटर में डाल सकते हैं, जो मच्‍छर के लार्वा को खा जाएगी। मछली का मुख्य भोजन मच्छरों का लार्वा है। इस मछली के बच्‍चे दो एमएम होने पर भी मच्छरों के लार्वा को खाने लगते है। यह मछली 16 से 28 दिनों के अंतराल पर बच्चे देती है, और 14 डिग्री सेल्सियस से 38 डिग्री तक बहुत ही आराम से रह जाती है। मछली का बच्चा हो या बड़ी मछली ये अपने कुल भार का 40 फीसदी लार्वा 12 घंटे में खा सकती है।
कूलर की जांच हर दूसरे दिन करें : स्वास्थ्य कर्मचारियों ने बताया घर पर रखे कूलर की जांच हर दूसरे दिन करें। यदि पानी मे कोई चीज छिटक रही है, तो समझ लो यह लार्वा है। पानी को बदल दे। घर की छत पर कोई कोई टायर या मटका न रखे। बारिश का पानी इन में ठहरता है तो लार्वा पन्नपने लगता है।