बढ़ते ही जा रहे बाहर से आने वाले मजदूर, 5 दिनों में पहुंचे 600 से ज्यादा

  • संक्रमण काल में अगर मजदूर परिवार परेशान और हताश हैं तो मदद के लिए आगे आने वालों की भी कमी नहीं

भिवानी. लॉकडाउन में खाना व ठिकाना न रहने से परेशान प्रवासी मजदूरों का सड़क मार्गों पर मूवमेंट लगातार जारी है। हिसार से पैदल चलकर मजदूर भिवानी पहुंच रहे हैं।मजदूरों की अधिक संख्या होने के कारण प्रशासन भी इनकी घर वापसी समय पर नहीं करवा पा रहा हैं। गुरुवार देर रात हिसार से पैदल चलकर 19 मजदूर भिवानी पहुंचे। दो दिन पहले भी 60 मजदूर हिसार से भिवानी पहुंचे थे। प्रशासन ने पांच दिन के अंतराल में लगभग 895 प्रवासियों को अपने अपने घर भेज चुका है व इस दौरान लगभग 600 प्रवासियों को गुजरानी मोड़ स्थित आश्रम में पहुंचाया गया है। प्रशासन ने इन प्रवासियों को अपने अपने घर पहुंचाने के लिए सरकार से एक ट्रेन बिहार व एक ट्रेन एमपी के लिए मांगी है। आश्रम में प्रवासियों के रहने व खाने पीने की व्यवस्था प्रशासन द्वारा की जा रही है। एसडीएम महेश कुमार ने प्रवासियों से कहा है कि वे जहां भी वहीं पर रहे। उन्हें मोबाइल पर मैसेज दे कर बुला लिया जाएगा, क्योंकि एक जगह एकत्रित होने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। जब तक सरकार जिला स्तर पर सड़क मार्गों पर पैदल चलने वाले मजदूरों की घर वापसी की समय पर व्यवस्था नहीं करेगा तब तक मजदूरों की समस्या का समाधान कर पाना मुश्किल होगा।
जिले में फिलहाल लगभग साढ़े दस हजार मजदूर ऐसे हैं, जिन्होंने रजिस्ट्रेशन करवाया है लेकिन घर नहीं जा सके है। प्रशासन इन मजदूरों की घर वापसी के लगातार प्रयास कर रहा हैं लेकिन इस दौरान अन्य मजदूर हिसार आदि स्थानों से पैदल चलकर भिवानी पहुंच जाते हैं। प्रशासन बाहर से आने वाले मजदूरों की घर वापसी करवाता है तो भिवानी में रहने वाले मजदूरों की घर वापस न होने पर वे लोग भी सड़कों पर निकल पड़ते हैं। पिछले दो दिनों से भिवानी में ऐसा ही देखने को मिल रहा है। बुधवार को रोहतक से बिहार के लिए रेलगाड़ी चली थी जिसमें भिवानी से 450 मजदूरों को भेजा जाना था लेकिन लगभग 900 मजदूर जनता रसोई के बाहर जमा हो गए थे। स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने इन मजदूरों की स्क्रीनिंग की और भोजन करवाया लेकिन तब तक रोहतक से रेलगाड़ी निकल चुकी थी। इससे मजदूरों की घर वापसी नहीं हो पाई। सभी मजदूरों को फिलहाल पुलिस ने गुजरानी मोड़ स्थित एक आश्रम में ठहराया गया है। जहां उनके लिए रहने व खाने की व्यवस्था भी की गई है लेकिन भिवानी में मजदूरों का लगातार आना जारी है।
बिहार के लिए प्रशासन ने मांगी एक रेलगाड़ी
आश्रम में लगभग 900 प्रवासी मजदूर दो दिन से रह रहे हैं। अधिकतर मजदूर बिहार के रहने वाले हैं। इसलिए प्रशासन ने सरकार से भिवानी रेलवे स्टेशन से बिहार के लिए एक रेलगाड़ी की व्यवस्था करने की डिमांड भेजी है। स्वीकृति मिलने के बाद भी मजदूरों को रेलगाड़ी से बिहार के लिए रवाना किया जाएगा।
रोज 15 हजार लोगों के लिए बन रहा खाना
जनता रसोई में प्रतिदिन लगभग 15 हजार लोगों के लिए भोजन बन रहा है। जनता रसोई से ही प्रतिदिन मजदूरों को भोजन मिल रहा है। जिसमें समाज सेवियों, व्यापारियों, प्रशासन व आम आदमी का भी सहयोग है।
ये कहना है एसडीएम का : एसडीएम महेश कुमार ने बताया कि मजदूरों की घर वापसी का इंतजार किया जा रहा है। इसके लिए जिला प्रशासन ने सरकार से बस व रेलगाड़ियों की व्यवस्था करने की मांग की है। स्वीकृति मिलते ही आश्रम में रहने वाले मजदूरों की घर वापस करवाई जाएगी।

ये हो सकता है प्रयास
सड़कों पर घूमने वाले मजदूरों के लिए प्रशासन की तरफ से मुख्य चौराहों व पुलिस नाकों पर हेल्प डेस्क स्थापित किए जाएं। जो मजदूर अन्य जिलों से पहुंचता है उसे वापस उसी जिले में भेजने की व्यवस्था की जाए।
जो मजदूर सड़कों पर है प्रशासन समाज सेवी संस्थाओं से मदद के लिए आगे आने का आह्वान करें, ताकि घर वापसी तक उनके रहने व खाने की उचित व्यवस्था हो सके।प्रशासन प्रतिदिन दो से तीन बसों में प्रवासी मजदूरों को बिहार, उत्तरप्रदेश व अन्य प्रदेशों के लिए रवाना करें, ताकि मजदूरों की ज्यादा संख्या अधिक न होने पाए और मजदूर सड़क पर न रहे।
इसी तरह से प्रतिदिन एक से दो रेलगाड़ियों की व्यवस्था की जाए तो तीन से चार दिन में सभी प्रवासियों को उनके घर भेजा जा सकता है। क्योंकि भिवानी में अब केवल लगभग साढ़े चार हजार मजदूर ही शेष है जिन्होंने रजिस्ट्रेशन करवाया है।