जेल में बंद युवकों को बनाया स्नैचिंग का आरोपी, कोर्ट को गुमराह किया, आईओ पर केस

  • जिन्हें पुलिस ने पकड़ा वे वारदात के समय लूट के मामले में जेल में थे

यमुनानगर. पुलिस किस तरह से किसी के किए गुनाह में बेगुनाह को फंसा देती है, इसका खुलासा एक महिला से हुई स्नैचिंग केस में हुआ है। महिला से पर्स छीनने वालों को जब पुलिस पकड़ नहीं पाई तो दो ऐसे युवकों को आरोपी बना दिया, जिनका उस केस से दूर-दूर तक वास्ता नहीं था। जब वारदात हुई ताे वे अम्बाला सेंट्रल जेल में थे। यानी कि पुलिस को अनट्रेस केस को अपने रिकाॅर्ड में ट्रेस दिखाना था इसलिए किसी को भी फंसा दिया गया लेकिन झूठी कहानी में पुलिस पेंच छोड़ती चली गई। कोर्ट में केस पहुंचा तो वहां पर जिन्हें आरोपी बनाया था, वे तो बच गए लेकिन कानून के शिकंजे में कानून की पालना कराने वाली पुलिस ही आ गई। केस में पुलिस ने एक आरोपी को बरी कर दिया और दूसरे से मोबाइल बरामद होने पर माफी मांगने और सुधरने का मौका देते हुए छोड़ दिया। कोर्ट ने जांच अधिकारी के खिलाफ ऑर्डर में लिखा। इस पर लंबी जांच चली और अब केस में जांच अधिकारी रहे दया कृष्ण पर धारा-193 और 341 में केस दर्ज किया गया।

इस केस में यहां पर यह हुआ| पुलिस ने स्नैचिंग केस में सबसे पहले नाबालिग को गिरफ्तार किया। पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार उसने पुलिस को बताया कि छीना गया मोबाइल उसके पास है। उसने अपने साथी दिगंबर और शुभम का नाम लिया। पुलिस ने शुभम को गिरफ्तार किया। पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि उसने इस वारदात में शामिल होने की बात कबूली। बाद में जब पुलिस को पता लगा कि ये आरोपी तो वारदात के समय न्यायिक हिरासत में थे। इस पर पुलिस ने शुभम को केस से डिस्चार्ज करने के लिए एसीजेएम की कोर्ट में एप्लीकेशन दी।

उसे डिस्चार्ज कर दिया गया। पुलिस ने जांच की तो पाया कि जब वारदात हुई तो आरोपी जेल में था। वहीं नाबालिग बाल सुधारगृह में था। ये लूट के केस में न्यायिक हिरासत में थे। कोर्ट ने आरोपी को डिस्चार्ज तो कर दिया लेकिन इसी बीच केस सेशन कोर्ट में चला गया। वहां सुनवाई चलती रही। केस से आरोपी के डिस्चार्ज होने की बात सेशन कोर्ट के सामने आई तो मामला उलझ गया। कोर्ट ने आईओ और पुलिस अधिकारियों को डांट लगाई। आईओ ने कोर्ट में कहा कि उसने आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया, वहीं केस दस्तावेजों पर जो साइन हैं, उसके नहीं हैं। हालांकि पुलिस ने आरोपियों को दोबारा प्रोडक्शन रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी। उसमें नाबालिग आरोपी ने कहा था कि वारदात में उसने जिनका नाम लिया, वे नहीं थे। उनके साथ उसका पैसे का विवाद था इसलिए उसने झूठा नाम लिया। इस पर कोर्ट ने आईओ को नोटिस देकर जवाब मांगा था। शुभम को एडीजे विजयंत सहगल की कोर्ट ने 22 अक्टूबर 2019 को बरी करते हुए जांच अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही के लिए लिखा था तभी से इस पर जांच चल रही थी।

सीआईए वन को केस ट्रांसफर किया था लेकिन बदमाशों का पता नहीं लग पाया था| शहर यमुनानगर थाना पुलिस ने केस दर्ज कर लिया था। जब शहर थाना पुलिस केस को ट्रेस नहीं कर पाई तो इसे सीआईए वन को ट्रांसफर कर दिया गया। सीआईए वन में तैनात सब इंस्पेक्टर मोहन लाल और एचसी कुलदीप ने अपनी रिपोर्ट में दिया कि उन्होंने काफी प्रयास किए, लेकिन केस ट्रेस नहीं हो पाया। 15 अगस्त 2018 को उन्होंने अनट्रेस केस की रिपोर्ट तैयार की थी। इसके बाद यह केस सीआईए टू को ट्रांसफर कर दिया गया। वहां केस में सब इंस्पेक्टर दया कृष्ण ने जांच की। उन्होंने केस को ट्रेस करने का दावा किया।

तीन नकाबपोश बदमाशों ने छीना था पर्स, महिला ने पीछा भी किया था

इंदिरा गार्डन निवासी सुमन शर्मा ने शहर यमुनानगर पुलिस को शिकायत दी थी कि वह संत निश्चल सिंह स्कूल के पास से जा रही थी। वहां तीन बदमाशों ने उससे उसका पर्स छीन लिया। बदमाशों ने अपने मुंह पर कपड़ा बांधा हुआ था। उन्होंने उसकी एक्टिवा रोककर उसका पर्स छीना। इसके बाद वे बस स्टैंड यमुनानगर की तरफ फरार हो गए थे। उसने उनका पीछा भी किया। पर्स में उसका मोबाइल, 10 हजार रुपए कैश, दस्तावेज और चाबियां थी। इस शिकायत पर शहर यमुनानगर थाना पुलिस ने 13 फरवरी 2018 को धारा-379ए में केस दर्ज किया था।