केंद्र सरकार के आर्थिक पैकेज की घोषणा से माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम इंटरप्राइज के बदले मापदंड

  • इंडस्ट्रियलिस्ट बोले – छोटी इंडस्ट्री तक आर्थिक पैकेज पहुंचे तब बने बात

अम्बाला. (रमिंद्र सिंह) केंद्र सरकार के आर्थिक पैकेज की घोषणा के साथ ही माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम इंटरप्राइज (एमएसएमई) के मापदंड बदल गए हैं। अम्बाला का साइंस उद्योग पहले माइक्रो और स्मॉल इंडस्ट्री में गिना जाता था, मगर मापदंड बदलने पर अब 90 प्रतिशत इंडस्ट्री माइक्रो श्रेणी में आ गई है जिनकी टर्नओवर 5 करोड़ या निवेश 1 करोड़ से कम है। साइंस इंडस्ट्री से जुड़ी एसोसिएशन एवं ज्यादातर उद्यमियों की नजर में आर्थिक पैकेज का लाभ अम्बाला की साइंस इंडस्ट्री को तभी मिलेगा जब धरातल पर पैकेज का लाभ पहुंचे। उद्यमियों की मानें तो पूर्व में भी माइक्रो व स्मॉल इंडस्ट्री के लिए कई पैकेज आए थे, मगर बैंकों का रवैया ऐसा रहा कि फायदा नहीं मिलता। कोलेट्रल फ्री ऑटोमेटिक लोन का लाभ भी उद्यमी तभी उठा सकेंगे जब बैंकों का रवैया उद्यमियों के प्रति बेहतर हो। उद्यमियों का कहना है कि “वित्तमंत्री ने लॉक डाउन के दौरान हुए घाटे को फाइनेंस किया जिसे बाद में हमें ही अब अदा करना है’ फिर इस आर्थिक पैकेज किस आधार पर बेहतर कहा जा सकता है।
वर्करों की सेलरी के लिए घोषणा होनी चाहिए: संजय गुप्ता| नए मापदंडों से 90 प्रतिशत साइंस इंडस्ट्री अब माइक्रो श्रेणी में है। पैकेज में इंडस्ट्री के कुछ अच्छा है तो मसले रह भी गए हैं। 3 लाख करोड़ का कोलेट्रल फ्री लोन अनाउंस किया वह बेहतर है, 4 वर्ष के लिए लोन होगा जिसमें 1 साल तक लोन की किस्त नहीं देनी होगी। ईपीएफ के लिए 3 माह का कंट्रीब्यूशन था, जो बढ़ाकर 6 माह का हो गया है, मगर ज्यादा इंडस्ट्री इसे कंडीशन की वजह से यूटिलाइज नहीं कर पा रही हैं। वर्करों की सैलरी के लिए कुछ घोषणा होती तो बेहतर रहता।
-संजय गुप्ता, अध्यक्ष, अम्बाला साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट मेन्यूफेक्चरर्स एसोसिएशन
2 करोड़ तक बिना गारंटी कर्ज का प्रावधान, बैंक देते नहीं: अरुण
आर्थिक बजट केवल लॉलीपॉप की तरह न रह जाए। क्योंकि जो लोन घोषित किया गया है उस पर ब्याज लगेगा। कोलेट्रल फ्री लोन घोषित तो किया गया है, मगर कोई भी बैंक बिना कोलेट्रल लोन नहीं देगा। पूर्व में भी इंडस्ट्री के लिए 2 करोड़ तक कोलेट्रल फ्री लोन किए गए थे, मगर बैंकों ने इसे लागू ही नहीं किया। टर्म लोन मशीनरी के लिए है, मगर उसके लिए भी बैंकों द्वारा सिक्योरिटी रखी जाती है। आर्थिक पैकेज से स्मॉल या मीडियम इंडस्ट्री को ज्यादा फायदा होगा।
अरूण प्रकाश बंसल, पूर्व अध्यक्ष, साइंटिफिक अप्रेट्स मेन्यूफेक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर एसोसिएशन

आर्थिक पैकेज छोटी इंडस्ट्री तक पहुंचे, तभी बात बने: कैलाश धीर
आर्थिक पैकेज की मदद छोटी इंडस्ट्री तक पहुंचे तो ही इसका लाभ होगा। कोलेट्रल फ्री लोन यदि बैंक देगा तभी बात बनेगी। इंडस्ट्री को बिना सिक्योरिटी के लोन नहीं मिलता, बैंक हर माह कंपनी की स्टॉक स्टेटमेंट मांगते हैं। उद्यमी बैंकों के चक्कर काटने में उलझे रहते हैं। आने वाले कुछ महीने इंडस्ट्री के लिए टफ हैं। इंडस्ट्री अभी कमाए पैसों पर चल रही हैं, बीते 2 माह में 70 प्रतिशत इंडस्ट्री का सिंगल बिल नहीं कटा है। इंडस्ट्री के खाते में कुछ आए तभी बात बनेगी।
-कैलाश धीर, अध्यक्ष साइंटिफिक अप्रेट्स मेन्यूफेक्चरर्स एसोसिएशन

टेक्निकल सपोर्ट हो तो अम्बाला में बने थर्मा स्कैनर: राजीव
पहले लोन लो बाद में पेमेंट करो। लोन लेकर रोटी खानी है तो लोन लेने की ही क्या जरूरत है। हमारी इंडस्ट्री अब नए मापदंडों के अनुसार माइक्रो से नीचे टाइनी इंडस्ट्री में पहुंच गई है। सरकार मेक इन इंडिया का दावा तो कर रही है लेकिन टेक्निकल व फाइनेंशियल सपोर्ट नहीं है। आज अम्बाला के बाजार में महज 1 हजार रुपए वाला चीन व ताइवान निर्मित थर्मो स्कैनर 3 हजार से ज्यादा कीमत पर बिक रहा है। टेक्निकल स्पोर्ट हो तो यह थर्मा स्कैनर यहां बनाया जा सकता है।
-राजीव अग्रवाल, पूर्व सचिव, साइंटिफिक अप्रेट्स मेन्यूफेक्चरर्स एसोसिएशन

इंडस्ट्री खोल रहे हैं लेकिन श्रमिक पलायन कर रहे हैं: राजबीर
इंडस्ट्री के लिए आर्थिक पैकेज कुछ खास नहीं है, हमारा नुकसान हो रहा है और सरकार इसी नुकसान को फाइनेंस कर रही है। हमें बाद में इसी फाइनेंस पर ब्याज भी सरकार को देना होगा। ब्याज खत्म करना, जीएसटी कम करना आदि अन्य फार्म में राहत दी जा सकती थी। पहले सरकार ने कहा इंडस्ट्री खोलें- जब उद्यमी इंडस्ट्री खोल रहे हैं तो सरकार फ्री बस व ट्रेनें चला रहे हैं। लेबर यूपी व बिहार पलायन कर रही है।
-राजबीर चौधरी, अध्यक्ष, इंडस्ट्री एरिया एसोसिएशन साहा