यमुनानगर में कोरोना रिकवरी रेट सौ फीसदी

  • पेरासिटामोल, हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन और एजीथ्रोमाइसिन से कोरोना मरीजों के सिमटम किए खत्म

यमुनानगर. यमुनानगर में आठ कोरोना पेशेंट सामने आ चुके हैं। सभी ठीक भी हो चुके हैं। ठीक होने वालों में 19 साल के युवक से लेकर 62 साल के बुजुर्ग तक हैं। देश में जहां कोरोना से ठीक होने वालों का रिकवरी रेट करीब 32 प्रतिशत है, वहीं यमुनानगर में यह 100 प्रतिशत है। क्योंकि यहां पर ऐसा कोई पेशेंट सामने नहीं आया है जोकि कोरोना से ठीक न हुआ हो। अभी कोरोना को लेकर कोई न वैक्सीन है और न ही कोई टेबलेट। इसलिए यह सवाल उठना लाजिमी है कि इन हालत में 100 प्रशित पेशेंट कैसे ठीक हो सकते हैं। इन आठ पेशेंट को दिए ट्रीटमेंट को लेकर हमने उनके ट्रीटमेंट की हिस्ट्री जानी। सामने आया कि जब देश में कोरोना की शुरुआत हुई तो हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन और एजीथ्रोमाइसिन इसमें प्रभावित बताई गई। इन दोनों को ही स्वास्थ्य विभाग ने इन पर ट्रायल किया। साथ पीसीएम (पेरासिटामाेल) देते रहे।
इन तीनों से पेशेंट के अंदर मौजूद कोरोना के सिमटम कमजोर होते गए और उनकी एंटी बॉडी ने उन्हें खत्म कर दिया। सीएमओ डॉ. विजय दहिया की माने तो ये दवाएं एंटी वायरल हैं। सभी आठ पेशेंट में माइल्ड सिमटम थे। इसलिए इन्हीं दवाओं ने बेहतर असर किया और रिजल्ट सबके सामने हैं। इसके साथ ही उन्हें डाइट भी नाॅर्मल दी गई। हालांकि डॉक्टर उन्हें हर बात कहते थे कि वे ठीक हो जाएंगे। ये ही उनकी इम्युनिटी बूस्टर बनी।

10 दिन से काेई नया केस नहीं
दूसरी बड़ी बात है कि हमारे यहां अब तक 2300 सैंपल हो चुके हैं। इसमें से 8 लोग ही पॉजिटिव मिले हैं जो 0.5 प्रतिशत से भी कम है। इस तरह से हम कह सकते हैं कि हम सेफ जोन में हैं। इसमें सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क पहनना, जरूरी काम के लिए ही घर से निकलना जैसे नियम हैं। यमुनानगर में 10 दिन से कोई भी पॉजिटिव केस नहीं आया है। इन 10 दिन में 600 सैंपल लैब में जांच के लिए भेजे जा चुके हैं जिनकी रिपोर्ट निगेटिव आई है।

डायलिसिस पर चल रहे बुजुर्ग को एडमिट करने से अस्पताल हाथ खड़े कर चुके थे, हमने उसे भी ठीक किया: डॉ. दहिया

चार मई को कुटीपुर निवासी डेढ़ साल से डायलिसिस पर चल रहे और काले पीलिया से पीड़ित बुजुर्ग की रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो हमारे लिए टेंशन वाली थी। हमने पेशेंट को पीजीआई भेजने का फैसला लिया। यहां से रेफर कर दिया, लेकिन वहां से पेशेंट को वापस भेज दिया गया। कई बड़े मेडिकल कॉलेजों में एडमिट करने के लिए संपर्क किया, लेकिन किसी ने हामी नहीं भरी, हमने हौसला नहीं हारा। हमने फैसला लिया कि इस पेशेंट का इलाज हमारी टीम ही करेगी। बुजुर्ग को ईएसआई के कोविड अस्पताल में भर्ती किया गया। यहां दो बार डायलिसिस की गई। दूसरी रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई। इससे और टेंशन बढ़ी, लेकिन हमने उस पर ट्रीटमेंट शुरू रखा। तीसरी रिपोर्ट निगेटिव आई। यह हमें पहले से लग रहा था कि हम इस पेशेंट को स्वस्थ करने में जरूर कामयाब होंगे। हमारे पास कोई स्पेशल ट्रीटमेंट भी नहीं था, लेकिन हमने बेसिक ट्रीटमेंट शुरू किया, उसी में हम सफल रहे।
-जैसा सीएमओ डॉ. विजय दहिया ने बताया।