बेहाल प्रवासी पहुंचे सिरसा, क्वारेंटाइन किए

  • 700 किलोमीटर का सफर }20 छोटे बच्चों के साथ पैदल निकले थे झीड़ी के भट्‌ठा मजदूर

सिरसा. लॉकडाउन के दौरान जिला से प्रवासी मजदूरों का पैदल पलायन जारी है। इसी बीच गुरुवार को एक ईंट भट्‌टा की लेबर के 43 लोग यूपी के गांव कटगौरा जिला बंदाऊ के लिए पैदल निकले थे। जिनके साथ 20 बच्चे थे। यह लोग पिछले तीन दिनों ईंट- गारा ढ़ाेने वाली रेहड़ी में अपना सामान लादकर बच्चों को गोद में उठाए भूखे- प्यासे अपना रास्ता नाप रहे थे। इनका समूह गुरुवार दोपहर शहर के बरनाला रोड स्थित सदर थाना के सामने से गुजरा, तो उन पर पुलिस की नजर पड़ी। जिसके बाद पुलिस उनको समझाकर थाना परिसर में ले आई। मजदूरों व उनके बच्चों को खाना खिलाने के बाद पुलिस ने सामान सहित अपनी बस में उनको सिकंदरपुर क्वारेंटाइन सेंटर में भिजवाया। अब मेडिकल स्क्रीनिंग के बाद प्रशासन उनके घर जाने का इंतजाम करेगा।
उतरप्रदेश (यूपी) के रहने वाले प्रवासी मजदूर सतपाल, अवनीश कुमार व विनिता ने बताया कि वह यूपी में जिला बंदाऊ के गांव कटगौरा के रहने वाले हैं। 20 बच्चों सहित सभी 43 लोग एक ही परिवार के सदस्य हैं और पिछले 4 साल से गांव झिड़ी के पास एक ईंट भट्‌टे पर काम करते थे। लॉकडाउन के दौरान काम बंद हो गया था। इंतजार कर रहे थे कि कब लॉकडाउन खुलेगा और अपने घर जा पाएंगे। इस दौरान जमादार उनको राशन देता था, लेकिन दिहाड़ी मजदूरी तीन महीने से नहीं मिली थी। इसलिए सारा पैसा खत्म हो गया था, इसी कारण गांव जाने को ऑनलाइन आवेदन भी नहीं किया था। जिसके चलते तीन दिन पहले ईंट भट्‌टा से अपना सामान लेकर गांव के लिए रवाना हो गए। इस दौरान खाने- पीने के लिए पास में कुछ नहीं था और रास्ते में जिस गांव में जाते वहां के लोग बच्चों पर तरस खाकर खाना खिला देते थे। गुरुवार दोपहर शहर में सदर थाना के आगे से गुजर रहे थे, तो पुलिस ने रोककर उनको खाना खिलाया। उन्हें यह भी बताया गया है कि सिकंदरपुर में मेडिकल स्क्रीनिंग के बाद उनको घर भिजवा दिया जाएगा।
बाबूजी! रजिस्ट्रेशन करवाने की तो हमें जानकारी नहीं है
छोटे मासूम बच्चों को गोद में उठाए मजदूरों ने कहा कि हमारे भट्‌ठे के जमादार ने हमें मजदूरी देना भी बंद कर दिया था। हमारे पास पैसे खत्म हो गए। इसलिए हमने पैदल ही घर जाने की तैयारी कर ली थी। तीन महीने से केवल राशन मिल रहा था। पोर्टल पर नाम कैसे दर्ज होता है। इसकी जानकारी हमें नहीं है। हमने तो जमादार बाबू को ही बोला था कि हमें कैसे ही अपने गांव भिजवा दे। जब किसी ने नहीं सुनी तो वे सब पैदल हो लिए।

25 बसों से 953 मजदूर पहुंचाए यूपी के बुलंदशहर

केंद्रीय गृह मंत्रलाय के दिशा-निर्देशों पर लॉकडाउन में फंसे श्रमिकों को उनकी इच्छा अनुसार घर वापस भेजने की प्रक्रिया में 8250 की मेडिकल स्क्रीनिंग हो चुकी है। जबकि दस्तावेजों की जांच के बाद प्रशासन ने 953 मजदूरों को सेनिटाइज की 25 रोडवेज बसों से बीते दिवस यूपी के बुलंदशहर भिजवा दिया है। वहीं 51 मजदूरों को ट्रेन से भेजा जा चुका है और 7 हजार से ज्यादा मजदूरों को ट्रेनों से भेजने की तैयारी है।

ट्रैक के आस पास लापरवाही न बरतें नागरिक
डीसी रमेश चंद्र बिढ़ान ने कहा कि हाल ही में महाराष्ट्र व प्रदेश के हिसार जिला में रेलवे ट्रैक पर आमजन द्वारा लापरवाही बरते जाने से हुए हादसे में महाराष्ट्र में 16 मजदूरों व हिसार में 3 बच्चों की मौत बेहद दुखद है। उन्होंने रेलवे विभाग व अन्य विभागों से कहा कि भविष्य में इस तरह की अप्रिय घटना न घटे इसके लिए प्रचार प्रसार के माध्यम से लोगों को जागरूक करें। इसके साथ-साथ आमजन भी सावधानी बरतते हुए रेलवे ट्रैक के आस पास किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें। उन्होंने कहा कि नागरिक रेलवे फाटक बंद होने की स्थिति में रेल गुजरने का इंतजार करें। अपनी जान जोखिम में डाल कर बंद फाटक को पार करने का प्रयास न करें।

सीधी बात एसडीएम

रिपोर्टर: सर मजदूर सड़कों से पैदल जा रहे हैं।
एसडीएम: हमने सभी को आदेश दे रखा है कि पैदल किसी को नहीं जाने देना है। सबको उनके राज्य बस या ट्रेन के जरिए भेजा जाएगा।
रिपोर्टर: मजदूरों के रखने की व्यवस्था है क्या प्रशासन के पास
एसडीएम: जी बिल्कुल हमारे यहां शैल्टर हाउस है। खाने पीने का भी प्रबंध है।
रिपोर्टर: फिर भी मजदूर सड़कों पर दिखाई दे रहे हैं
एसडीएम: हम अपने जिला के किसी मजदूर को पैदल नहीं जाने देंगे। हमारी टीमें काम कर रही है। डेरा सिकंदरपुर में उन्हें ठहराया जा रहा है। 953 मजदूर हम बस से यूपी भेज चुके हैं।
रिपोर्टर: बाकी मजदूर कब तक भेजे जाएंगे
एसडीएम: पूरी तैयारी कर ली गई है। अगले कुछ दिनों में ही सभी भेज दिए जाएंगे।