दिल्ली में लगातार बढ़ रही शराब की बिक्री, शहर में घटने की संभावना

बहादुरगढ़. साथ लगते दिल्ली प्रदेश में शराब की बिक्री ने जहां रिकार्ड ताेड़ना शुरू कर दिया है वहीं बहादुरगढ़ में शराब की बिक्री इस बार कम होने की संभावना बनी हुई है। हालांकि इसके पीछे विभाग अभी कोई ठोस कारण नहीं बता पा रहा है पर अधिकारी इसके पीछे लॉकडाउन विवाह अादि समारोह की कमी को मुख्य कारण मान रहा है। वहीं दूसरी तरफ बहादुरगढ़ में शराब की बिक्री को कम होने के पीछे साथ लगती दिल्ली के सरकारी ठेकों को भी मान रहे हैं। गत वित्त वर्ष में झज्जर जिले में 46 लाख लीटर देसी व 25 लाख लीटर अंग्रेजी शराब की ब्रिक्री हुई थी जिससे सरकार को करीब 195 करोड़ की अाय हुई थी। पर इस बार सरकारी अाय का अांकड़ा काफी कम रहने की संभावना है। इसी कारण अाबकारी विभाग ने इस बार पिछले साल के बराबर तक लक्ष्य ले जाने के िलए जिले को 30 जोन में बांट कर 60 दुकानें खुलवाई हैं। पर चार दुकानें अभी भी रह गई है। इसके साथ-साथ अब वह दुकानों दो लाख रुपए सालाना की फीस देकर अपने छोटे ठेके खोलेंगे। जिसकी तैयारी चल रही है। सोमवार से जिले में सभी दुकानों पर शरीब की बिक्री शुरू हो गई है पर जैसे दिल्ली के ठेकों पर लाइने नहीं टूट रही वैसे यहां पर दस फीसदी हालात भी नहीं है। इसी कारण अाबकारी विभाग को इस बार राजस्व को पूरा करने के िलए काफी प्रयास करने पड़ रहे हैं।
फीस जमा करवा कर खाेल सकते हैं छाेटे ठेके
विभाग के डीईटीसी नरेंद्र कौशिक ने माना कि इस बार कोरोना मामले व विवाह व अन्य समारोह अादि के नहीं होने से शराब की बिक्री में कमी की संभावना है पर विभाग का प्रयास है कि राजस्व में पिछले साल तक हो सके व उससे अागे पहुंचने का प्रयास भी किया जा रहा है। डीईटीसी कौशिक ने बताया कि 60 दुकानों का रिजर्व प्राइस करीब 135 करोड़ रुपया सरकार के पास अा चुका है। अब छोटे ठेके खोलने की जिम्मेदारी इन लाइसेंस ठेकेदारों की है जो विभाग में फीस जमा करवाकर उन्हें खोल सकते हैं।
दिल्ली सरकार ने शराब की बिक्री पर 70 फीसदी कोरोना फीस लगाई थी। इसके बाद भी वहां शराब की सरकारी दुकानें खुलने के बाद वहां पर अफरातफरी की स्थिति में अभी भी बनी हुई है। इस कारण बहादुरगढ़ के साथ लगती दिल्ली के ठेकों पर सरकार ने ई-कूपन सिस्टम जारी किया और ई-कूपन वालों के लिए अलग लाइनें लगने लगी। इससे शराब की बिक्री में भी इजाफा हो रहा है, क्योंकि पहले भीड़ के चलते कुछ ही देर में दुकानें बंद कर दी जाती थीं।