डार्क जोन हलके के किसानों की बैठक 15 को शाहाबाद में

  • कहा- जल बचाना समय की मांग है लेकिन केवल भू-जल स्तर में पानी की गिरावट के लिए किसान दोषी नहीं

यमुनानगर. प्रदेश सरकार द्वारा डार्कजोन में धान न लगाने के मुद्दे को लेकर भारतीय किसान यूनियन ने कमर कस ली है। मामले को लेकर शुक्रवार 15 मई को सुबह 10 बजे अनाजमंडी शाहाबाद मेें सभी डार्कजोन हलकाें के किसानों की बैठक रखी गई है। भाकियू प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी संबोधित करेंगे। जिला प्रधान संजू गुंदयाना ने बताया कि सरकार किसान विरोधी फैसले लेकर किसानों का दमन करने में लगी हुई है। जल बचाना समय की मांग है लेकिन केवल भू-जल स्तर में पानी की गिरावट का किसान दोषी नहीं है। इसके लिए बड़े-बड़े उद्योग जिम्मेवार हैं। उन पर भी यह कानून लागू होना चाहिए। अब सरकार धान की जगह दूसरी फसल उगाने पर 7 हजार रुपए प्रति एकड़ अनुदान देने की घोषणा कर रही है। यह राशि बहुत कम है।

सरकार इसे 7 की बजाए 15 हजार रुपए प्रति एकड़ करे। सूक्ष्म सिंचाई व टपकन सिंचाई प्रणाली में 95 प्रतिशत की सब्सिडी दी जाए। सरकार केवल मक्का व दालों की सरकारी खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर करेगी। बाकी फसलों को किसान कहां बेचेंगे। सरकार ने इस बारे कोई घोषणा नहीं की। पहले एमएसपी पर खरीद के लिए कानून बने। किसानों ने सरकार के बहकावे में आकार वैकल्पिक फसलों की बिजाई की, परंतु सरकार ने न तो किसानों को कोई अनुदान राशि जारी की और इसके तहत न कोई बीज के पैसे दिए अाैर न ही मंडियों में फसल खरीद की गई। इस तरह किसान कैसे सरकार की घोषणाओं पर विश्वास कर सकता है। बैठक मेें मास्क पहनकर आएं और सामाजिक दूरी का पालन करें।