ठग ने खुद काे परिचित बता रेलकर्मी के माेबाइल पर भेजा क्यूआर काेड, स्कैन कर ओटीपी बताया ताे खाते से उड़े 65 हजार रुपए

  • लॉकडाउन में पानीपत फंसा हूं यार, यहां 20 हजार लेने थे तुझे गूगल-पे कर रहा हूं, ये कहकर भेजा क्यूआर कोड

यमुनानगर. यमुनानगर का प्रवीन बोल रहा हूं, जो इलेक्शन ड्यूटी में मिला था। लॉकडाउन में पानीपत फंसा हूं यार। यहां किसी से 20 हजार लेने थे, जो नकदी न होने पर ऑनलाइन पेमेंट दे रहा है। यह रकम तुझे गूगल-पे कर रहा हूं। ये कहकर जगाधरी वर्कशॉप में एक रेल कर्मी के मोबाइल पर ठग ने क्यूआर कोड भेजा। जिसे रेलवे कर्मी ने स्कैन किया ताे उसके खाते में एक रुपया आ गया। फिर फाेन कर कहा चेक कर रहा था पैसे अा रहे या नहीं। खाते में एक रुपया आने का संदेश पढ़ रेलवेकर्मी को विश्वास हो गया कि उक्त युवक उसके प्रवीन नाम के चार-पांच दोस्तों में से एक है। मोबाइल पर आया दूसरा क्यूआर कोड स्कैन करने पर कोई मैसेज नहीं आया, तब आरोपी ने बातों में उलझाकर ओटीपी मांग लिया लेकिन मोबाइल पर राशि आने व निकलने के संदेश नहीं आए। अगले दिन बैंक खाता से रेलकर्मी ने 65 हजार की रकम निकली पाई। पता करने पर पाया कि दूसरे क्यूआर कोड स्कैन से 40 हजार व पूछे ओटीपी से 25 हजार रुपए खाते से निकाले गए। ठगी का पता चलते ही जिन फोन नंबरों से कॉल व वाट्सएप पर जानकारी ली गई, वह देकर थाने में शिकायत दी। पुलिस ने प्रवीन नाम के व्यक्ति के खिलाफ धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू की है।

जगाधरी रेलवे वर्कशॉप में रेल कर्मी कुलदीप ने बताया कि दो मई को उसके मोबाइल पर कॉल आई। काॅल करने वाले ने अपना नाम प्रवीण बताया। उसने कहा कि वह यमुनानगर से है और मेरा दोस्त है। इलेक्शन ड्यूटी में दोनों मिले थे। कुलदीप ने बताया कि प्रवीन नाम के चार-पांच दोस्त हैं इसलिए विश्वास में आ गया।

प्रवीन ने कहा कि वह लॉकडाउन के चलते पानीपत में फंसा है। यहां किसी से 20 हजार रुपए लेने थे, उसके पास नकदी नहीं है। उससे गूगल-पे करवा रहा हूं। इसलिए अपना गूगल-पे नंबर दे दाे। फोन पर प्रवीन ने गूगल-पे नंबर लेने के बाद कहा कि गूगल पे पर पैसे नहीं जा रहे, इसलिए मोबाइल पर क्यूआर कोड भेज रहा हूं, उसे स्कैन करो। स्कैन करने पर खाते में एक रुपया आया। दोबारा क्यूआर कोड भेजा जिसे स्कैन करने अाैर अाेटीपी बता दिया। लेकिन मोबाइल पर कोई संदेश नहीं आया। कॉल कर उसने कहा कि ओटीपी गलत है। कुलदीप ने बताया कि उसकी मां व पत्नी अस्पताल में थे, इसलिए परेशान होकर उसने दोबारा ओटीपी या कुछ भी मदद से इनकार कर दिया। लेकिन अगले दिन खाते में जांच करने पर 65 हजार निकले मिले। पता करने पर पाया कि दूसरे क्यूआर कोड स्कैन करने पर 40 हजार व पूछे ओटीपी से 25 हजार निकाले गए। प्रवीन के नंबर पर कॉल की ताे वह ब्लॉक मिला। जबकि दूसरे नंबर से कॉल करने पर किसी ने उठाया ही नहीं। इसके बाद शिकायत थाना फर्कपुर पुलिस को दी।