ट्रैक के पास छह माह पहले बारिश में टूटी दीवार बनवाता रेलवे तो मजदूरों के परिवार पर न टूटता मुसीबतों का पहाड़

  • सत्या कॉलोनी के पास खेलते समय रेलवे ट्रैक पार कर रहे तीन बच्चे इंजन की चपेट में आए, मौत
  • बाउंड्री वाॅल हाेती और चालक हाॅर्न बजाता ताे बच सकती थी बच्चों की जान
  • लोग बोले, हादसे से कुछ समय पहले रेलवे ट्रैक पर खेल रहे थे 15 बच्चे

तोशाम. सत्य नगर कॉलोनी के पास ट्रैक पर टावर वैगन की चपेट में तीन बच्चों की माैत हो गई। रेलवे ट्रैक के पास बाउंड्री हाेती और इंजन का चालक हाॅर्न बजाता ताे तीनाें की जान बच सकती थी। करीब छह माह पूर्व बारिश में गिरी बाउंड्री काे रेलवे ने फिर से बनवाना मुनासिब नहीं समझा था। इसके कारण ट्रैक से लाेग आते-जाते थे। दूसरा इंजन चालक ने हाॅर्न बजाना भी मुनासिब नहीं समझा। यही नहीं दाे घंटे से अधिक समय तक अधिकारियों से भी हादसे की सूचना छिपाए रखी। अब डीआरएम के निर्देश पर हादसे की जांच के लिए एक टीम का गठन किया गया है। सत्य नगर काॅलाेनी के मनीष, सुनील, मनाेहर लाल ने बताया कि ट्रैक के दोनों ओर करीब एक साल पूर्व दीवार की बाउंड्री कराई गई थी। जाे छह माह पहले ही बारिश के कारण गिर गई थी। आरोप है कि बार-बार मांग के बावजूद बाउंड्री काे अधिकारी नहीं बनवा रहे। यदि बाउंड्री बनी हाेती ताे मासूमाें की जान नहीं जाती।

प्रत्यक्षदर्शी बोला : बच्चाें काे बचाने काे हट जाओ, हट जाओ चिल्लाकर दाैड़ा

रोज की तरह मंगलवार शाम करीब पांच और सवा पांच के बीच मैं सत्य नगर काॅलाेनी अपने घर से बाइक पर फाटक के पास दुकान के लिए जा रहा था। जैसे ही गली से बाहर निकला ताे देखा कि तीन बच्चे खेलते हुए ट्रैक पार कर रहे थे। जबकि सिरसा की ओर से तीव्र गति से एक इंजन आ रहा था। इसकाे देख मैं पहले ताे रेलवे लाइन से हट जाओ कहकर चिल्लाने लगा। इसके बाद बच्चाें काे बचाओ बचाओ कहकर दाैड़ पड़ा। हालांकि तब तक वह ट्रैक पर पहुंचा इंजन की चपेट में आकर दाे की माैत हाे चुकी थी। जबकि एक तड़प रहा था। एंबुलेंस और पुलिस काे सूचना दी गई। पुलिस औैर एंबुलेंस पहंुची। मुझे बहुत ही दुख है कि मैं तीनाें मासूमाें काे नहीं बचा सका।'' – रामनिवास, प्रत्यक्षदर्शी, सत्य नगर काॅलाेनी।

पिता बोला-खुद ही एंबुलेंस में रखवाए शव
मृतक बच्चाें के पिता सुनील और मनाेज साहनी ने बताया कि वह दाेनाें मंगलवार की सुबह बेलदारी करने गए थे। शाम करीब साढ़े 5 बजे उनके पास सूचना पहुंची थी। तुरंत ही वह पहंुचे। अाराेप लगाया कि शवाें काे किसी ने भी रेलवे ट्रैक से उठवाकर एंबुलेंस में रखवाना मुनासिब नहीं समझा। दाेनाें ने खुद ही बेटाें के शव एंबुलेंस में रखे। काफी देर तक दाेनाें शवाें से लिपटकर भी राेया। वहीं प्रत्यक्षदर्शियाें ने बताया कि हादसे से मात्र 15 मिनट पहले ही ट्रैक पर 15 बच्चे खेल रहे थे, जिन्हें लाेगाें ने ट्रैक से अलग कर दिया था।
बेटे ने मेरी गाेद में ताेड़ा दम, जान नहीं बचा सका
सुनील का राे-राेकर बुरा हाल था। उसका कहना था कि बेटे रवि ने मेरी गाेद में दम ताेड़ा। जिस समय उसने बेटे काे ट्रैक से उठाया। वह अंतिम सांस ले रहा था। मेरी गाेद में ही बेटे ने दम ताेड़ िदया। वह बेटे काे नहीं बचा सका। कैसे खुद काे माफ करूंगा। मनाेज साहनी के परिवार में बेटे अजित, गाेलू के अलावा बेटी अभिलाषा औैर ज्याेति भी हैं। बेटे की माैत के बाद मनाेज की पत्नी किरण बार-बार बेहाेश हाे रही थी। सुनील के परिवार में रवि के अलावा बहन साेनी, सूजी, नीलम, रानी और दूसरा भाई अंकुश है।
जांच के लिए टीम गठित की
हादसा इंजन से हुआ या फिर मालगाड़ी से इसकी जांच कराई जा रही है। इसके लिए अलग से भी टीम गठित की गई है। इंजन और मालगाड़ी के चालकाें से पूछताछ की जा रही है। जांच के बाद ही कार्रवाई की जाएगी। आरपीएफ काे भी जांच साैंपी गई है। वहां पर बाउंड्री थी या नहीं, इसकी जानकारी कराई जाएगी।'' -संजय श्रीवास्तव, डीआरएम, बीकानेर डिविजन, हिसार।