चाइल्ड हेल्पलाइन पर 34 दिन में 600 से ज्यादा काॅल

  • काेई राशन तो काेई बच्चाें के लिए दूध मांग रहा

यमुनानगर. कोरोना काल की इस संकट की घड़ी का सबसे ज्यादा असर रोज कमा कर खाने वालों पर पड़ा है। ऐसे परिवारों के पास राशन आदि न होने से उनके व उनके बच्चों को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कोऑर्डिनेटर भानू प्रताप ने बताया कि 34 दिन में उनके पास 600 से ज्यादा काॅल अा चुकी हैं। जिसमे लाेगाें ने बच्चाें के लिए खाने व दूध की मांग रखी। उन्हाेंने कहा कि जब एक पिता अपने बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था नहीं कर पाए तो उन्होंने 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन पर कॉल कर कहा कि बच्चों के लिए भोजन व दूध की मदद चाहिए। फर्कपुर निवासी एक व्यक्ति ने 1098 पर फोन किया और अपने व अपने साथी मजदूर भाइयों के बच्चों के लिए भोजन की मदद मांगी।

कोऑर्डिनेटर भानू प्रताप ने बताया कि जब टीम दिए गए पते पर पहुंची तो उन्होंने बताया कि वे लोग दिहाड़ी-मजदूरी कर अपने बच्चों का भरण-पोषण कर रहे थे, परंतु लॉकडाउन के कारण काम न होने के कारण अपने बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था नहीं कर पाए और घर में जो भी राशन था, वह भी समाप्त हो गया, बच्चों ने सुबह से कुछ नहीं खाया। सूचना मिलते ही चाइल्डलाइन टीम तुरंत उनके बताए पते पर पहुंची और तुरंत बच्चों के लिए खाने की व्यवस्था की। टीम ने वहां मौजूद और भी जरूरतमंद लोगों को राशन जैसे आटा, दाल, चावल, दूध व अन्य जरूरत की सामग्री प्रदान की। जब टीम ने वहां मौजूद लोगों से बात की,तो कुछ लोग भावुक हो गए और कहने लगे कि इस महामारी व लॉकडाउन ने हम जैसे लोगों को शारीरिक व मानसिक रूप से सक्षम होते हुए भी अपंग बना दिया है, हम अपने बच्चों की मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने में भी असक्षम हैं। इस पर चाइल्डलाइन की टीम ने उन्हें समझाया और इस स्थिति का डटकर सामना करने के लिए प्रेरित किया। उन्हें विश्वास दिलाया कि इस मुसीबत के समय में चाइल्डलाइन उनकी बच्चों से संबंधित हर संभव सहायता करने का प्रयास करेगी। परंतु वे इस लॉकडाउन का पालन करें और देश को इस महामारी से बचाने में योगदान दें।

तुरंत कर रहे मदद

चाइल्ड हेल्पलाइन की निदेशिका डॉ अंजू ने बताया कि बच्चे इस समय सबसे ज्यादा परेशानी में हैं और ऐसी कॉल्स लगातार 1098 पर आ रही हैं। सूचना पर हमारी टीम तुरंत लाेगाें की मदद के लिए जा रही है।