कल बुध होंगे पश्चिम में उदय, प्रजा में व्याप्त कष्टों से मुक्ति मिलनी होगी शुरू : पं. कृष्ण

सतनाली. इस वर्ष के विक्रम संवत्सर के राजा बुध 14 मई को उदय होंगे। बुध के उदय होने से प्रजा में व्याप्त कष्टों से मुक्ति मिलने लगेगी। क्षेत्र प्रसिद्ध पं. कृष्ण कुमार शर्मा नांवा ने बताया कि इस वर्ष के विक्रम संवत्सर के राजा बुध जो अस्त चले आ रहे हैं, वे 14 मई 2020 को पश्चिम में सुबह 10 बजकर 22 मिनट पर उदय होंगे। उन्होंने बताया कि बुध के उदय होने से प्रजा में व्याप्त कष्टों से मुक्ति मिलनी आरंभ हो जाएगी। इसके अलावा बुध के उदयकालीन अवधि के 48 घंटे में यत्र-तत्र वायुवेग के साथ वर्षा के प्रबल योग भी बन रहे हैं। इसके अलावा इस बार ज्येष्ठ मास की अमावस्या शुक्रवार को होने के कारण यह सुखद व सुभिक्षकारी रहेगी। वहीं ज्येष्ठ माह में 5 शुक्रवार होने से आरोग्य में वृद्धि तथा राजा व प्रजा में सुख का संचार होगा।

कृतिका नक्षत्र में मनाई जाएगी शनि जयंती
शर्मा नांवा ने बताया कि इस बार शनि देव की जयंती ज्येष्ठ माह की अमावस्या और कृतिका नक्षत्र में मनाई जाएगी। यह दिन विशेषकर शनि की साढ़ेसाती, शनि की ढैय्या आदि शनि दोष से पीड़ित जातकों के लिए महत्व का माना जाता है। शर्मा नांवा ने बताया कि इस बार अमावस्या तिथि 21 मई को रात 9.37 बजे से प्रारंभ होगी और 22 मई रात्रि 11.08 बजे तक रहेगी। इस दिन शनि देव की पूजा से कुंडली से दोष दूर होते हैं। उन्होंने बताया कि सूर्य पुत्र शनि को कर्मफल दाता, दंडाधिकारी और न्यायप्रिय माना जाता है। वह अपनी दृष्टि से राजा को भी रंक बना सकते हैं। हिंदू धर्म में शनि देवता भी हैं, वे नवग्रहों में प्रमुख ग्रह हैं। उन्होंने बताया कि शनि देव 11 मई से मकर राशि से वक्री चल रहे हैं अर्थात शनि के वक्री होने के कारण कर्मफल में बदलाव नजर आएगा।
वट सावित्री व्रत का है खास महत्व

शर्मा नांवा ने बताया कि सनातन धर्म में वट सावित्री व्रत का खास महत्व माना जाता है। ये व्रत हर साल ज्येष्ठ माह में अमावस्या को किया जाता है। इस साल ये व्रत ज्येष्ठ अमावस्या यानि 22 मई शुक्रवार को मनाया जाएगा। यह व्रत स्त्रियां अखंड सौभाग्यवती रहने की मंगल कामना के साथ करती हैं। इस दिन सत्यवान-सावित्री की यमराज के साथ पूजा की जाती है। मान्यता है कि इसी दिन सावित्री अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से भी वापिस ले आई थीं। इसलिए वट सावित्री व्रत वाले दिन सावित्री और सत्यवान की कथा सुनने का विधान है।
क्या है कृतिका नक्षत्र
शर्मा नांवा ने बताया कि नक्षत्र गणना में कृतिका नक्षत्र को तीसरा स्थान प्राप्त है। उन्होंने बताया कि यह 6 तारों का एक समूह हैं जिनके देव अग्नि है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को अमावस्या व कृतिका नक्षत्र का साथ होने से ये सुखद व सुभिक्षकारी रहेगी। इसके साथ ही इस अवधि में वर्षा के योग भी बन रहे हैं।