पहले किसानों को गेहूं की फसल बेचने में हो रही थी दिक्कत और अब तूड़ी के खरीदार नहीं मिल रहे

अम्बाला. कोरोना महामारी से लगभग हर कोई परेशानी झेल रहा है, परंतु इस बार किसान दोहरी मार झेल रहे हैं। कोरोना के चलते लॉकडाउन के कारण फसल बेचने में तो दिक्कतें आई है। साथ ही मौसम ने भी परेशान किया। पहले सरसों और गेहूं बेचने को पापड़ बेलने पड़े और अब गेहूं के भूसे या तूड़ी के खरीदार नहीं मिल रहे।
पिछले साल भूसे का रेट 700 से 800 रुपए क्विंटल था। इससे एक एकड़ से किसान को आराम से 8000 से 10000 रुपए तक की आमदनी हो जाती थी, परंतु इस बार लॉकडाउन के चलते एक तरफ जहां खरीदार ही किसानों तक नहीं पहुंचे। वहीं बरसात के कारण काफी भूसा खराब भी हो गया। लिहाजा किसानों को आधे दाम पर भी भूसे के ग्राहक नहीं मिल रहे। पहले पंजाब व हिमाचल के व्यापारी काफी मात्रा में भूसा खरीदकर स्टोर भी कर लेते थे। भूसे का प्रयोग मशरूम इंडस्ट्री में मशरूम उगाने के लिए और पेपर इंडस्ट्री में भी होता है। इस बार लॉकडाउन के चलते एक तो इंडस्ट्री ही बंद पड़ गई, दूसरे दूरदराज से आने वाले व्यापारी भी यहां के किसानों तक नहीं पहुंचे।
दुखेड़ी के किसान नेत्रपाल ने बताया कि भूसे की स्टोरेज ज्यादातर किसान अपने पशुओं के लिए करते हैं। कुछ किसान बेचने के लिए भी भूसे की स्टोरेज करते हैं। इसकी स्टोरेज करने के लिए किसी के पास भी ज्यादा जगह नहीं है। तेपला के किसान दिलबाग सिंह ने बताया कि इस बार बाहर के व्यापारी न आने से भूसे की डिमांड उठी ही नहीं। हाल यह है कि गांव के जरूरतमंद लोग भी भूसा खरीदने में नखरे दिखा रहे हैं। भूसे को 300 रुपए क्विंटल ही बेचना पड़ रहा है।