अंतरराज्यीय स्तर पर जुड़े हो सकते हैं पेंच, विभाग ने जवान पर दर्ज एफआईआर छिपाई

  • शराब घोटालें की गहरी हैं जड़ें, कुरेदने में जुटी टीम

सोनीपत. (मनोज कुमार ) सोनीपत शराब घोटाले की जड़ें बहुत गहरी हैं। इसी गहराई तक उतरने के लिए सीनियर अफसरों की एसआईटी बनाने के लिए गृह मंत्री अनिल विज ने सीएम से सिफारिश की है। हालांकि अभी एसआईटी का गठन नहीं हुआ। परंतु यह एसआईटी क्या करेगा, इसका पूरा रोड मैप गृह मंत्रालय ने तैयार कर लिया है।
गृह मंत्री खुद यह मानते हैं कि यह कोई सामान्य केस नहीं है। यदि पुलिस की एसआईटी अपनी ओर से जांच पूरी कर भी लेती है तो सीनियर अफसरों की एसआईटी अपने स्तर पर तहकीकात जारी रखेगी और जड़ों तक की सच्चाई सामने लाएगी, क्योंकि यह माना जा रहा है कि यह पूरा एक गैंग है, जो अंतर्राज्यीय स्तर पर चल रहा है। गृह मंत्रालय को यह भी अंदेशा है कि राज्य में इसकी तरह के और भी गैंग ऑपरेट किए जा रहें हैं। इसलिए एसआईटी हर उस सवाल का जवाब तलाशेगी, जो इस पूरा नेटवर्क को तोड़ सके। पिछले कुछ दिनों में फतेहाबाद और समालखां में भी ऐसे मामले सामने आए हैं। अब यमुनानगर में भी एक ट्रक शराब का पकड़ा है। सभी मामलों में पुलिस तो जांच कर ही रही है, लेकिन ये आईएएस अफसर की नेतृत्व वाली एसआईटी की जांच के दायरे में भी ये केस आएंगे।
बता दें कि गृह मंत्री की ओर से जिन अफसरों के नाम सीएम को भेजे गए हैं, उनमें एडीजीपी सुभाष यादव, एक्साइज विभाग से एडिशनल एक्साइज एंड टेक्सेशन कमिश्नर विजय सिंह और तीन सीनियर आईएएस अधिकारियों के नाम दिए हैं, जिनमें अशोक खेमका, संजीव कौशल और टीसी गुप्ता के नाम शामिल हैं। विज ने कहा कि ये फैसला अब मुख्यमंत्री को लेना है कि इनमें से किसी एक के नाम पर या किसी अन्य नाम पर वे विचार करते हैं। मुख्यमंत्री सुप्रीम होते हैं, वह जिस भी नाम को चाहेंगे, ले सकते हैं। जिसके बाद एसआईटी काम करेगी और इस मसले की गहराई तक जाएगी। इधर, सोनीपत पुलिस अपने मुलाजिमों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को छुपा रही है। वह यह सार्वजनिक नहीं कर रही कि मुलाजिमों पर क्या आरोप लगे हैं और किन धाराओं में उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया है। गृहमंत्री अनिल विज ने बताया कि मैंने एसआईटी गठन को लेकर सीएम को पांच नाम भेज दिए हैं। अब तय वही करेंगे, लेकिन किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। सीनियर अफसरों की एसआईटी पूरे हरियाणा में ऐसे संभावित सभी मामलों की जांच करेगी। पुलिस अपनी जांच करती रहेगी।
मुलाजिमों के खिलाफ दर्ज 2 एफआईआर, उसमें क्या लिखा-किसी को पता नहीं
सोनीपत पुलिस की ओर से गोदामों से शराब गायब होने और वहां अतिरिक्त शराब रखे जाने के मामले में अपने मुलाजिमों के खिलाफ भी दो एफआईआर दर्ज की गई है, लेकिन पुलिस महकमा इन एफआईआर को सार्वजनिक नहीं कर रहा है। पुलिस थाने की हर एफआईआर ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड की जाती है। लेकिन सोनीपत पुलिस ने पुलिस मुलाजिमों के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर अपलोड नहीं की है। एफआईआर नंबर 197 और 204 को अपलोड नहीं किया गया। जो पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ दर्ज हैं। इसके अलावा पुलिस भी मौखिक रूप से बताने को तैयार नहीं है। एक दिन पहले जिस एएसआई के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है, आरोप है कि उसने 1100 पेटियों में 151 पेटियों गोदाम में ही दूसरी जगह रख दी थी।

पहली एफआईआर: गोदाम के कमरों में शराब को अवैध तरीके से रखने के लिए कमरों का प्रयोग करने पर हुई। इसमें भूपेंद्र सिंह समेत चार को आरोपी बनाया गया।
दूसरी एफआईआर: दो एसएचओ व मालखाना के अधिकारियों व एक मुंशी, दो एएसआई समेत सात पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ है। आरोप है कि माल गोदाम से शराब को खुर्द-बुर्द किया गया।
तीसरी एफआईआर: गोदाम में अवैध रूप से शराब से भरा ट्रक खड़ा था। इसमें भूपेंद्र सिंह समेत चार लोगों को आरोपी बनाया गया।
चौथी एफआईआर: एक एएसआई के खिलाफ दर्ज हुई। आरोप है कि शराब को खुर्द-बुर्द करने की कोशिश की गई।

पूरे राज्यों के मामलों को जांच में शामिल करेगी एसआईटी

सीनियर अफसरों की एसआईटी में वे सभी मामले जांच में शामिल किए जाएंगे, जिनमें कहीं न कहीं बड़े लोगों के शामिल होने की संभावना होगी। इसके अलावा पुलिस माल गोदामों की जांच की जा रही है। ऐसे में कहीं गड़बड़ी मिलती है तो वह भी एसआईटी अपनी जांच में शामिल कर सकेगी। अभी पुलिस की ओर से खरखौदा के मामले की पड़ताल की जा रही है। जो भी आगे सामने आएगा, वह जांच में जुड़ता जाएगा। क्योंकि गोदामों से 5 हजार पेटियां शराब गायब होने की बात बाद में सामने आई है।