सीएम से उद्योगपति बोले-राहत पैकेज दें व फैक्ट्रियों की सभी वेंडर यूनिट को काम करने की मंजूरी मिले

  • सीएम के साथ वीडियाे कांफ्रेंस के बाद जिले के उद्योगपतियों ने जताई उम्मीद

रोहतक. लाॅक डाउन 3.0 के तहत औद्योगिक इकाइयों को मिली छूट के बाद आ रही समस्याओं को लेकर शनिवार को लघु सचिवालय में सीएम के साथ उद्योगपतियों ने अपने विचार साझा किए। हालांकि समस्याओं को लेकर अभी तक उद्योगपतियों में ऊहापोह की स्थिति बनी है और वे सरकार से पैकेज की मांग कर रहे हैं, ताकि उन्हें कुछ राहत मिल सके। असल में उद्योग शुरु होने के साथ ही यहां पर अभी एक ही शिफ्ट में काम चल रहा है। ऐसे में छोटे वेंडर ज्यादा परेशान हैं।

कोरोना महामारी के चलते पिछले दिनों मजदूरों का पलायन शुरू हुआ, परंतु जब से सरकार ने एमएसएमई को गति देने की बात शुरू की तब से यह संख्या कम होने लगी है। अब जिले में औद्योगिक गतिविधियों शुरू हो चुकी हैं और इस समय 1006 यूनिट को जिला प्रशासन ने मंजूरी दे दी है। इनमें अब तक 30 हजार लेबर श्रमिक अपने काम में लग गए हैं और उम्मीद है कि अब प्रवासी मजदूर यहीं रुकेंगे। इन्हीं मामलों को लेकर लघु उद्योग भारती ने भी बैठक की। अध्यक्षता करते हुए प्रधान अंगद कोचर ने कहा कि औद्योगिक इकाइयां खुल चुकी हैं, उनमें श्रमिकों को आने-जाने में किसी प्रकार की कठिनाई न हो और श्रमिक उद्योग के परिसर में ही रहे, इसके लिए उद्योगपतियों की मांग पर औद्योगिक ईकाइयों को अपने श्रमिकों के लिए आवास की व्यवस्था के लिए अनुमति दी जाएगी, ताकि समय पर उद्योग को चला सकें।

लघु इकाइयों को भी दी है मंजूरी, करें एसओपी की पालना
सरकार की ओर से सभी उद्यमियों को सुना गया है और उनके मुद्दों पर यथा संभव सुधार करने के सरकार की ओर पहले ही इंतजाम किए गए हैं। अब आने वाले समय में बाकी मुद्दों पर भी विचार किया जाएगा। अब तक जिले में 1006 इंडस्ट्री को मंजूरी दे दी है, जिसमें अब तक 30 हजार से ज्यादा लेबर काम पर लौट गई है। अब तक कुल 2600 यूनिट रोहतक में हैं। इनमें से 1006 चल चुकी है। अन्य को भी जल्द ही चलाया जाएगा। वहीं कंस्ट्रक्शन की साइट पर भी श्रमिकों को काम मिल रहा है। ऐसे में लेबर अब जाना कम चाहती है और काम में लग चुकी है। जहां तक छोटी यूनिट का मामला है, उन लघु इकाइयों को भी खोलने की इजाजत दी जा रही है, जो गृह मंत्रालय की एसओपी का पालना करती है।– आरएस वर्मा, डीसी।

  • फैक्टरी मालिक लगातार चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। पहले सोशल डिस्टेंसिंग व गृह मंत्रालय की एसओपी के सारे मानक पूरे करके मुश्किल से फैक्टरी चालू की। कमजोर आर्थिक स्थिति में भी कई तरह के खर्चो काे वहन किया। अब जब फैक्टरी खुल गई हैं तो ऑर्डर और काम ना होने के कारण नुकसान का मीटर चालू है। जब तक सरकार लघु उद्योगों के लिए मजबूत पैकेज नहीं देती, तब तक राहत मिलना मुश्किल हैं। सरकार इसकी जल्द घोषणा करे। – अंगद कोचर, जिला प्रधान, लघु उद्योग भारती।
  • सरकार के सहयोग से फैक्टरी तो खुल गई हैं, लेकिन बड़े उद्योग जैसे कि हीरो, होण्डा, बजाज, मारुति, आदि में लगभग 10- 15 प्रतिशत प्रोडक्शन की प्लानिंग है। उनसे जुड़ी फैक्टरी को भी इतना ही ऑर्डर मिलेगा। जिस वजह से छोटे उद्योगों को फैक्टरी के खर्चे उठाना मुश्किल होगा। माल के ऑर्डर कम होने के कारण उन्हें ट्रांसपोर्ट से भेजना भी महंगा पड़ रहा है। – पंकज अरोड़ा, उप प्रधान, लघु उद्योग भारती
  • बड़ी इंडस्ट्री के बिजली बिल ऑनलाइन बनके आ चुके है। जिनको भरने की तारीख़ तो बढ़ा दी गई है लेकिन बिना फैक्ट्री चलाए फिक्सेद चार्ज भरना बहुत मुश्किल है। बैंक का ब्याज भी पूरा चालू हैं लेकिन इंडस्ट्री की चैन पूरी तरीक़े से ना चलने के कारण हर फैक्ट्री को नुकसान ही हैं। – विनोद जैन, जींद रोड इंडस्ट्री एसो.
  • मार्केट टू-व्हीलर और फोर व्हीलर कंपनियों जैसे हीरो, मारुति और होड़ा अभी नहीं खुले हैं। इसकी वजह से बाजार में डिमांड नहीं है। अभी डीलरशिप भी नहीं खुले हैं। बाजार बंद है। लाेग अभी अपनी जरूरत की चीजें खरीद रहे हैं। इसकी वजह से डिमांड में भारी कमी आई है। कच्चे माल की भी कमी है। – पारस आहुजा, शक्ति फास्टनर।