फसल सीजन में आए मजदूरों को लौटने में मिल रही वरियता, रोडवेज की 61 बसों से यूपी भेजे 1720 प्रवासी

  • प्रवासी मजदूराें काे घर भेजने में जुटा प्रशासन, 63 बसों में किए रवाना

रोहतक. रोहतक रोडवेज की 61 बसों से 1720 प्रवासी श्रमिकों को उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्थित उनके गांव भेजा गया है। मजदूरों को रवाना करने से पहले उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया। नाश्ता-भोजन, पानी के प्रबंध के साथ ही उनको मास्क भी बांटे गए। जिला प्रशासन की ओर से जीएम रोडवेज से 63 बसें मांग गई थी। इन बसों के जरिए पहले जिला के अलग-अलग एरिया से सोनीपत रोड स्थित छोटूराम स्टेडियम में एकत्रित किया गया। यहां उनकी हाजिरी कराई गई। इसके बाद स्वास्थ्य परीक्षण हुआ और मास्क दिए गए। छाेटूराम स्टेडियम में मजदूरों को लाने का सिलसिला सुबह से ही शुरू हो गया था। व्यवस्था संभालने के लिए पुलिस के जवानों की तैनाती की गई थी। जिले के महम, कलानौर, सांपला और सदर तहसील क्षेत्र के सीजनल काम करने आने वाले मजदूरों को प्राथमिकता के आधार पर लाया गया। इन मजदूरों को जिला प्रशासन के पास एग्रीकल्चर लेबर के रूप में पंजीकृत 3840 प्रवासी मजदूरों में से ही चयनित लिए गए हैं। जिन्हें उत्तर प्रदेश के उनके गांव रवाना किया गया है।
बसों में सोशल डिस्टेंसिंग का नहीं हुआ पालन
जिला प्रशासन की ओर से शनिवार को रोडवेज बसों से यूपी भेजे गए श्रमिकों को बैठाने के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं दिखा। बस में एक तरफ की सीट पर 3 मजदूर और दूसरी तरफ की सीट पर 2 मजदूर बैठाए गए थे।
मां का घर पर 50 दिन से इंतजार कर रहे बच्चे
झांसी जिला के जवान गांव निवासी चंपा अपने भाई के साथ महम में मजदूरी करने आई थी। लॉकडाउन होने से दिहाड़ी मजदूरी छूट गई और ट्रेन, बस का संचालन बंद होने से वह अपने घर नहीं जा पाई। चंपा ने बताया कि कोरोना संकट के चलते गांव पर रह रहे उसके दोनों बच्चे परेशान हैं। फोन पर सबने बार बार आने को कहा। लेकिन वह नहीं जा सकी। लेकिन शनिवार को रोडवेज बस से घर जाते समय वह बेहद खुश है। रविवार को वह अपने बच्चों के पास होगी।

घर जाने के लिए 30699 प्रवासियों ने कराया पंजीकरण

प्रदेश सरकार की ओर से घर लौटने की सुविधा दिए जाने के बाद जिला में 30699 प्रवासी श्रमिकों ने पंजीकरण कराया है। इसमें 22841 मजदूरों ने स्पेशल ट्रेन से, 7159 मजदूराें ने बस से, 516 मजदूरों ने प्राइवेट वाहन से और 183 मजदूरों ने किराए के वाहन से जाने की इच्छा जताई है। जबकि दूसरे राज्यों में रह रहे 5244 मजदूरों ने रोहतक आने के लिए पंजीकरण कराया है। इसमें 3617 मजदूरों ने ट्रेन से, 1070 मजदूराें ने बस से, 428 मजदूरों ने प्राइवेट वाहन से, 129 श्रमिकों ने किराए के वाहन से रोहतक आने का फार्म भरा है।

खाना-पैसा खत्म, पैदल ही बिहार के लिए चल पड़े
बिहार के ग्यासपुर के 14 मजदूर हिसार जिला के दुर्जनपुर में गन्ना छिलाई की मजदूरी करते हैं। वे छह महीने पहले रोजगार की तलाश में हिसार आए। कोरोना संकट की वजह से काम छूट गया। लॉकडाउन की अवधि तीसरी बार बढ़ने के बाद उनके पास पैसा और राशन खत्म हो गया। ऐसे में वे पैदल ही बिहार के लिए चल पड़े। शनिवार की शाम 5 बजे वैश्य कॉलेज रोड स्थित शिव मंदिर पहुंचे अवधेश कुमार, टुनटुन कुमार, रमेश कुमार, विश्वेंद्र कुमार, कंचन, उदय कुमार आदि प्रवासी मजदूरों ने बताया कि काम बंद होने से हालात बिगड़ गए। ऑनलाइन गांव जाने के लिए सबने रजिस्ट्रेशन करवाया है। लेकिन खाना-पैसा खत्म होने की वजह से पैदल ही निकलना पड़ा है।