प्यास बुझानेे के लिए सोशल डिस्टेंसिंग भूले लोग

  • नहरी पानी आने तक टैंकर से पानी सप्लाई करेगा विभाग, जलघर के तीनों टैंक हो चुके हैं खाली, 12 दिन बाद आएगी नहर

चरखी. दैनिक भास्कर की खबर के बाद भले ही जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने गांव किरावड़ में प्यास बुझाने के 23 मई तक अस्थायी टैंकर लगा दिया है, परन्तु अब गांव में हालात ऐसे हो गए हैं कि पिछले 46 दिन से की जा रही सोशल डिंस्टेसिंग को भूलकर महिलाएं एक मटका पानी पाने के लिए मारा-मारी कर रही हैं। गांव में ऐसा तब तक चलने वाला है, जब तक गांव के जलघर में नहर का पानी नहीं आ जाता। गौरतलब है कि शनिवार से गांव किरावड़ के जलघर में पानी के तीनों टैंक खाली हो गए हैं। समस्या को लेकर दैनिक भास्कर ने प्रमुखता से प्रकाशित किया। खबर प्रकाशित होने के बाद रविवार सुबह से जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने गांव में 23 मई तक एक टैंकर तो लगा दिया। परन्तु 7000 की जनसंख्या वाले गांव में दोपहर तीन बजे तक दो ही टैंकर पानी के पहुंच पाए थे। इसको लेकर ग्रामीण एक मटका पानी पाने के लिए कोरोना महामारी से होने वाले खतरे को भूल गए।
जिला पार्षद रेणू बाला, भीम पंच, राहुल राजपूत, राजकुमार, विकास खुराना, संपत, राजेन्द्र कुमार, सुंदर पंच, भीम जांगडा, कृष्ण गांधी, दीपक तंवर, नरेश तंवर, राजमल पंच आदि ने बताया सुन्दर ब्रांच में पानी ना आने से आस पास गांव रतेरा, अलखपुरा, जमालपुर, बोहल, सीपर में आरओ के पानी की डिमांड बढ़ गई है। इसके चलते रविवार को गांव किरावड़ में आरओ का पानी नहीं पहुंच पाया तो ग्रामीणों ने जनस्वास्थ्य विभाग के आलाधिकारियों को इस समस्या से अवगत करवाया तो जेई हरीश ने गांव में एक टैंकर की व्यवस्था कर दी, परन्तु दोपहर तीन बजे तक गांव में दो ही टैंकर पहुंचे थे। एक मटका पानी पाने के लिए महिलाओं की इतनी भीड़ लग गई कि वो कोरोना महामारी के तहत 46 दिनों से चल रही सोशल डिस्टेंस को भी भूल गई।
जिला पार्षद रेणू बाला, सरपंच मनजीत कुमार, राजकुमार, राहुल तंवर ने बताया जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी अधिकारियों के अनुसार सुन्दर नहर मे 23 मई को पानी आना है। नहर में पानी जल्द मिले इस बात को लेकर सोमवार को नहर विभाग के एसई से मिलेंगे। ताकि गंाव में पानी की किल्लत को दूर किया जा सके। जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के जेई हरीश कुमार ने बताया कि जब तक गांव के जलघर में नहर का पानी नहीं आ जाता तब तक गांव में एक टैंकर लगा दिया है जो कि ग्रामीणों की प्यास बुझाएगा।