डॉक्टरों की तरह सूट पहन 16 घंटे बिना खाए-पिए उड़ाई फ्लाइट

  • वंदे भारत मिशन के तहत आबू-धाबी में फंसे 181 भारतीय को लेकर आए रोहतक के कैप्टन अंशुल ने सुनाई आपबीती
  • डॉक्टरों ने 3 घंटे की ट्रेनिंग दी, बिना पानी पिए फ्लाइट में डि-हाईड्रेशन से बचना रहा चुनौतीपूर्ण : कैप्टन

राेहतक. (रत्न पंवार) कोरोना काल में 12 देशों में फंसे 15 हजार से ज्यादा भारतियों को वंदे भारत मिशन के तहत वापस देश लाया जा रहा है। भारतियों को वापस फ्लाइट से लाना चुनौतीपूर्ण रहा। 16 घंटे तक बिना खाए-पिए पायलट और क्रू ने यह जिम्मेदारी निभाई। 7 मई को अाबू-धाबी से 181 भारतियों को पहली फ्लाइट लेकर रोहतक के भालौठ गांव में जन्में और विशाल नगर के रहने वाले कैप्टन अंशुल श्योराण कोच्ची पहुंचे। उनके साथ पूरी टीम ने मिशन के तहत पीपीई किट की तरह का हाॅजमैक सूट पहने रखा, ताकि संक्रमण से बचें। पढ़िए कैप्टन अंशुल की आपबीती।

– कैप्टन अंशुल, पायलट, एयर इंडिया ने जैसा बताया
'5 मई की शाम को एयर इंडिया एक्सप्रेस प्रबंधन की ओर से कॉल आई। कहा गया कि अापकी टीम को वंदे भारत मिशन के तहत आबू धाबी-कोच्ची की फ्लाइट लेकर जानी है। इसमें आपके साथ को-पायलट रिजविन नसीर और चार केबिन क्रू मेंबर भी साथ रहेंगे। हमें कोराेना से बचने के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर के तहत सुरक्षा मानकों के बारे में पहले से ही बताया जा रहा था। इसमें सबसे पेचीदा हमारे लिए पीपीई किट की तर्ज पर बना हॉजमैक सूट डालकर फ्लाई करना था। पहले इसे कभी पहना नहीं था। इसमें पूरी तरह से बॉडी सील हो जाती है।'

'एयरक्राफ्ट में ही जगह की कमी के चलते इसे डालना और इसे उतारना बड़ा चुनौतीपूर्ण रहा। इस हॉजमैक सूट को डालने के लिए 6 मई को एर्नाकुलम मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की टीम ने तीन घंटे की ट्रेनिंग दी। इस सूट को पहनने से ज्यादा मुश्किल भरा इसे उतारना रहा। एक बार सूट पहनने के बाद कुछ खाना-पीना तो दूर वाॅशरूम तक नहीं जा सकते थे। अगले दिन 7 मई को भारतीय समय अनुसार दोपहर 2 बजे फ्लाइट निर्धारित थी। फ्लाइट में 181 भारतीय सवार थे। इसमें 70 से 80 फीसदी यात्री किसी ना किसी बीमारी से पीड़ित थे। अक्सर रूटीन फ्लाइट में ऐसी स्थिति नहीं होती है। बमुश्किल 10-15 मरीज तो हो सकते हैं। फ्लाइट में मरीज यात्रियों की मेडिकल एमरजेंसी का भी ख्याल रखना था। इसमें 49 गर्भवती महिलाएं भी सवार थीं। इनके लिए फ्लाइट में ज्यादा सावधानी की जरूरत रहती है। काफी बुजुर्ग व्हीलचेयर पर भी थे। मेडिकल एमरजेंसी के लिए केबिन क्रू की एक विंग अलर्ट थी। '

'पहली बार ऐसे हालात थे, जब 16 घंटे तक बिना कुछ खाए-पिए ही मिशन को पूरा करना था। अक्सर रुटीन फ्लाइट में हर आंधे घंटे में पानी पीते हैं और एक घंटे में फ्रूट या सैंडविच खा लेते हैं ताकि डि-हाईड्रेशन की स्थिति न बने। चूंकि दिन में दोपहर 2 बजे फ्लाइट चलनी थी तो फ्लाइट में उससे 7-8 घंटे वैसे ही कुछ खा नहीं सकते थे। इसके बाद जब सूट निकालना था तो उसमें व्यस्त हो गए। इसके बाद पता चला कि पोस्ट फ्लाइट कोविड-19 का टेस्ट भी होना है। हां, फ्लाइट खत्म होने पर सूट उतारते ही थोड़ा पानी जरूर पिया। 7 मई को रात 10:17 पर फ्लाइट लैंड की तो अधिकतर यात्रियों की वतन वापसी पर उनकी आंखों में खुशी के आंसू थे।'