47 दिन से लाॅकडाउन में परेशान प्रवासी मजदूरों के ट्रेन में बैठते ही खिले चेहरे, बोले-मदद के लिए थैंक्यू हरियाणा

  • रोहतक स्टेशन से 9 जिलों के 1204 मजदूरों को लेकर बिहार के लिए स्पेशल ट्रेन रवाना, रोहतक से गए 308 श्रमिक
  • अब 10 और 12 मई को भी बिहार भेजेंगे ट्रेन, फाइनल शेड्यूल अभी जारी नहीं हुआ, राेहतक से 27 हजार श्रमिक करवा चुके हैं रजिस्ट्रेशन

रोहतक. प्रदेश के 9 जिलों से 1204 प्रवासी मजदूर श्रमिक स्पेशल ट्रेन से शुक्रवार को राेहतक रेलवे स्टेशन से बिहार भेजे गए। श्रमिकों के मेडिकल चेकअप और रेलवे स्टेशन पर थर्मल स्कैनिंग के बाद शाम 5 बजे श्रमिक स्पेशल ट्रेन रोहतक से रवाना हुई। इसमें राेहतक के 308 श्रमिक रहे। यात्रा के लिए श्रमिकों को सेनिटाइजर, मास्क, खाने के पैकेट व पेयजल उपलब्ध करवाया गया। डीसी आरएस वर्मा ने बताया कि रेल यात्रा का पूरा खर्च सरकार की ओर से वहन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि कुछ मजदूर बिना शेड्यूल के रेलवे स्टेशन पर आ गए थे। उन सभी मजदूरों के लिए शेल्टर होम में रहने की व्यवस्था की गई है। रेलवे स्टेशन पर पुलिस अधीक्षक राहुल शर्मा ने स्वयं मौके पर मौजूद रहकर व्यवस्था की निगरानी की। इस दौरान प्रवासी मजदूरों व कामगारों की मूलभूत सुविधाओं के नोडल अधिकारी एवं उपमंडलाधीश राकेश कुमार ने लगातार रेलवे स्टेशन पर स्टाफ के साथ मौजूद रहकर सभी प्रबंधों व सुविधाओं की समीक्षा की। राेहतक से लगभग 27 हजार श्रमिकाें ने अपने घर जाने के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया है। वहीं, 3 हजार के करीब श्रमिक व अन्य लाेग राेहतक अपने घर वापस अाना चाहते हैं। बताया जा रहा है कि 10 मई को बिहार के अररिया और 12 मई को कटिहार के लिए ट्रेन जाएगी। फाइनल शेड्यूल अभी जारी नहीं हुआ है। जिन लोगों का रजिस्ट्रेशन है, उन्हें ही इसमें जगह मिलेगी। प्रशासन रजिस्ट्रेशन वाले श्रमिकों को पहले ही सूचित कर देगा।

केवल कानपुर और मुगलसराय में ही रुकेगी स्पेशल ट्रेन
कोरोना संकट से प्रदेश के विभिन्न जिलों में फंसे प्रवासी मजदूरों में से 1204 लोगों का अपने घर जाने का इंतजार खत्म हुआ। शुक्रवार की शाम 5 बजे उनको लेकर 1347 किलोमीटर दूर श्रमिक स्पेशल बिहार के कटिहार के लिए रवाना हुई। ट्रेन में सवार होते ही कई श्रमिक भावुक हो उठे। बोले-जीवन में पहली बार ऐसी आफत झेलनी पड़ी। लॉकडाउन के दौरान 47 दिन तक उनको जहां बेरोजगार होना पड़ा, वहीं पैसे खत्म होने के चलते भोजन-आवास के लिए भी मुश्किल उठानी पड़ी। अब तो 24 घंटे बाद घर पहुंचकर उनको सुकून मिलेगा। मजदूरों ने सहयोग के लिए जिला व पुलिस प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं का आभार भी जताया। ट्रेन नॉन स्टाप अपना सफर पूरा करेगी। क्रू स्टाफ चेंज करने के लिए पहला स्टाॅप कानपुर और दूसरा मुगलसराय उत्तरप्रदेश होगा। सभी मजदूर यात्रियों को प्रशासन की ओर से सामान्य श्रेणी का टिकट दिया गया। हालॉकि 24 कोच वाली विशेष ट्रेन में 22 कोच स्लीपर और 2 कोच एसएलआर हैं। ग्रीन सिग्नल मिलते ही गाजियाबाद हेडक्वार्टर के ड्राइवर विनोद कुमार व सर्वेश कुमार ने ट्रेन चला दी। प्लेटफार्म छोड़ते समय मजदूर हाथ हिलाकर अधिकारियों व कर्मचारियों का अभिभावन कर रहे थे। उनमें से कईयों ने मोबाइल से वीडियो भी बनाई और कहते गए कि घर पहुंचकर मदद और अच्छा व्यवहार करने वालों के बारे में परिजनों को बताएंगे।

पुलिस ने ड्राेन से भी स्टेशन की निगरानी की

ट्रेन से मजदूरों को भेजने की देखते हुए शुक्रवार सुबह से ही स्टेशन पर रेलवे और राज्य पुलिस के जवान तैनात कर दिए गए। सोशल डिस्टेंसिंग के लिए गोले बनाए गए। विभिन्न जिलों से रोडवेज बसों से आने वाले श्रमिकों को पहले स्टेशन परिसर में बैठाकर हाजिरी लगाई गई। इसके बाद उनको प्लेटफार्म नंबर एक पर भेजा जाने लगा। इस दौरान हर मजदूर की थर्मल स्कैनिंग की गई और उनको मास्क, सेनिटाइजर, भोजन-पानी दिया गया। पुलिस ने स्टेशन के बाहर ड्राेन के जरिये भी जांच की।

मजदूरी मिली नहीं, मकान मालिक ने किराया भी ले लिया
बिहार के अररिया जिला निवासी प्रवासी श्रमिक मिथुन कुमार व रेखा ने बताया कि वे दो माह पहले 8 साथियों के साथ चिड़ी गांव में गेहूं की फसल काटने के लिए आए थे। उन्होंने किसानों के यहां काम भी किया, लेकिन कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन होते ही किसानों ने उनकी मजदूरी रोक ली। मकान मालिक ने एक की जगह दो माह का किराया काट लिया। मजदूरी में उन्हें खाली हाथ गांव लौटना पड़ रहा है।

बेटे को अच्छे स्कूल में दाखिले की उम्मीद टूटी
कुरुक्षेत्र में गैस की पाइप लाइन बिछाने के प्रोजेक्ट में काम करने वाले मोहम्मद शौकत बिहार में अररिया जिला के तारन गांव निवासी है। उसने बताया कि 27 श्रमिकों के साथ वह अप्रैल 2019 में काम की तलाश में कुरुक्षेत्र आया था। घर पर रह रहे 8 वर्षीय अपने बेटे अशद का एडमिशन अच्छे स्कूल में कराने के लिए वह पैसे जुटा रहा था। लेकिन कोरोना संकट ने उम्मीद पर पानी फेर दिया। अब तो गांव मायूसी की हालत में न चाहते हुए लौटना पड़ रहा है।

पैदल घर जाने लगा तो पुलिस ने शेल्टर होम में भेजा
पिहोवा में 15 मार्च को मजदूरी करने आए बिहार के अररिया जिला में धनगवां निवासी मोहम्मद नुरुद्दीन ने कहा कि आते ही कोरोना की आफत गले पड़ गई। 3 दिन ही काम मिला, तब तक कोरोना संकट के चलते पहले जनता कर्फ्यू और उसी के साथ 21 दिन का लॉकडाउन चालू हो गया। इस दौरान खाने-रहने की दिक्कत शुरू हो गई। पैदल ही घर जाने की तैयारी की तो पुलिस ने पकड़कर शेल्टर होम पहुंचा दिया। कमाई का और जरिया नहीं होने से उधर घर वाले परेशान हैं। अपना भी हाथ खाली होने से नुरुद्दीन घर वालों की कोई आर्थिक मदद भी नहीं कर पाया।