सादे समारोह में उद्योगपति व डॉक्टर ने जीवन संगिनी संग लिए फेरे

  • उद्योगपति निपुण की पत्नी शादी के अगले दिन से ही जरूरतमंदों के लिए तैयार कर रही भोजन
  • माॅडर्न कॉलोनी की डॉ. अनु शर्मा बनीं श्रीलालद्वारा कॉलोनी के डॉ. दीपक महेंद्रू की जीवनसाथी

यमुनानगर. कोरोना संक्रमण से बचाव को लेकर लॉकडाउन किया गया है। लॉकडाउन सादगी में समारोह करना सिखा रहा है। इस अवधि में हो रहे शादी समारोह बिन बैंड बाजे बारात के हो रहे हैं। चार से अधिक लोग किसी भी शादी में नहीं जा रहे। ऐसे ही बिना बाराती और बाजे के विवाह कर उद्योगपति व चिकित्सक जोड़ी ने समाज के अन्य लोगों के लिए मिसाल पेश की है। इन चारों ने पारिवारिक सदस्यों की मौजूदगी में फेरे लेकर सात जन्म का साथ निभाने के वचन एक-दूसरे को दिए। उद्योगपति निपुण ने परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में आदर्श नगर निवासी किसान विजय त्यागी की बेटी मनीषा को जीवन संगिनी बनाया। इसी तरह माॅडर्न कॉलोनी की एमबीबीएस डॉक्टर अनु शर्मा ने लालद्वारा कॉलोनी के डॉ. दीपक महेंद्र के संग फेरे लिए। अनु पैथोलॉजिस्ट हैं। शादी के बाद सहारनपुर लैब में ड्यूटी ज्वाइन की। उद्योगपति की बीवी ने रसोई संभाली और जरूरतमंदों के लिए भोजन बनाकर भेजना शुरू किया, ताकि कोई भूखा न रहे।
मॉडल टाउन निवासी उद्योगपति निपुण गर्ग बताते हैं कि जिस दिन शादी की डेट तय हुई थी। सोचा नहीं था कि उस दिन हम सब लॉकडाउन के कारण घरों में रहेंगे। शादी समय पर ही करनी थी। ऐसी प्लानिंग परिवार के सदस्यों ने की। समारोह मंदिर में करने के लिए प्रशासनिक मंजूरी ली। उसके बाद वर वधू पक्ष के लोग मंदिर आए। मंदिर में फेरे लिए। निपुण सामाजिक संस्था सांई सौभाग्य से जुड़े हैं। संस्था के साथ जरूरतमंदों की मदद कर रहे हैं। लॉकडाउन में भोजन तैयार कर पैकेट वितरित किए। जिनसे इनकी शादी हुई वह भी इनका हाथ बंटाने लगी। शादी के दो दिन में ही रसोई संभाली, जरूरतमंदों के लिए भोजन बनवाया।
शादी के अगले दिन संभाली ड्यूटी
मार्डन कॉलोनी निवासी डॉ. अनु शर्मा की शादी श्रीलालद्वारा कॉलोनी के डॉ. दीपक महेंद्रू से हुई है। दोनों एमबीबीएस हैं। डॉ. दीपक जहां अस्पताल चलाते हैं, वहीं डॉ. अनु पैथॉलोजिस्ट हैं, वे सहारनपुर में लैब संभाल रही हैं। अनु के भाई रंजन शर्मा बताते हैं कि शादी पहले ही तय थी। लॉकडाउन बाद में हुआ। शादी से पहले प्रशासनिक मंजूरी ली गई। उसके बाद वैवाहिक रस्म शुरू हुई। दोनों परिवारों के पांच लोग ही इसमें मौजूद रहे। शादी के अगले दिन डॉ. दीपक ने अस्पताल तो डॉ. अनु लैब संभालने सहारनपुर पहुंची। दोनों का मानना है कि इस समय उनकी ज्यादा जरूरत वहां है। भविष्य में भी अगर लोग इस परंपरा को जारी रखें तो बहुत बड़ा बदलाव की उम्मीद की जा सकती है। शादी पर होने वाले खर्च को बचाकर हम दुखियाें की मदद कर सकते हैं। ये उनके लिए संदेश भी है जो पिता कर्ज लेकर बेटी की शादी करते हैं। अगर युवा पीढ़ी समझदारी दिखाए तो शायद किसी पिता को बेटी के विवाह के लिए कर्ज न उठाना पड़े।