बाजारों में भीड़ रही कम, नियमों का पालन करते दिखे दुकानदार-ग्राहक

भिवानी. लॉकडाउन 3 के छठे दिन बाजारों में पांच दिनों की तुलना में शनिवार को भीड़ कम रही। पुलिस, प्रशासन व नगरपरिषद की तरफ से लगातार बाजारों में दुकानदारों व ग्राहकों को सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क लगाने, शर्तों व नियमों की पालना करने का पाठ पढ़ाया जा रहा है। इसका बाजारों में शनिवार को असर भी देखने को मिला। दुकानों में सोशल डिस्टेंसिंग व हर कोई बाजार में मास्क व कपड़े से मुंह ढके हुए दिखाई दिया। बेहद जरूरी कार्यों से ही लोग बाजारों में खरीददारी करते दिखाई दिए। पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से मुस्तैद दिखाई दे रही थी।
शनिवार को भी बाजार आठ बजे खुले और दोपहर दो बजे बंद हुए। दुकान खुलते ही ग्राहकों का भी आना शुरू हो गया। खास बात यह रही कि शनिवार को पांच दिनों की अपेक्षा बाजारों में लोगों की भीड़ कम दिखाई दे रही थी। कॉस्मेटिक, कपड़ा, शू प्लेस आदि की दुकानों के बाहर भी खरीददारों की ज्यादा भीड़ नहीं थी। इससे सोशल डिस्टेंसिंग की पालना होती दिखाई दी।
लगभग सभी दुकानदार मास्क व सैनिटाइजर का इस्तेमाल करते दिखाई दिए। दुकानों में प्रवेश से पहले दुकानदार ग्राहकों के हाथ सैनिटाइजर से साफ करवा रहे थे। इससे बाजारों में व्यवस्था शनिवार को ओर बेहतर दिखाई दी।

नई व्यवस्था से बाजार में नहीं जमा हुई भीड़
पुलिस ने दो दिन पहले बाजार में प्रवेश के सभी मार्गों पर बैरिकेड्स लगाकर व्यवस्था को दुरुस्त किया। इससे बाजारों में फोरव्हीलर्स की नो एंट्री से जाम की समस्या से मुक्ति मिली लेकिन नया बाजार में हालत अब भी खराब थे। इसके चलते शनिवार को पुलिस ने नया बाजार में फोर व्हीलर व ट्रैक्टर लेकर प्रवेश करने वालों को पुलिस ने फैंसी चौक पर ही बेरिकेड्स लगाकर रोक दिया। इससे नया बाजार में शनिवार को फोरव्हीलर, ट्रैक्टर ट्रॉली आदि वाहन प्रवेश नहीं कर पाए। इससे नया बाजार में रोड पर जाम की स्थिति पैदा नहीं हुई और टू-व्हीलर चालकों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। इसके अलावा नया बाजार में भी पांच की तुलना में भीड़ कम दिखाई दी और लोग सोशल डिस्टेंसिंग की पालना करते हुए भी दिखाई दे रहे थे।

रविवार को बंद रहेंगे बाजार
रविवार को बाजार बंद रहेंगे। रविवार को सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक दुकानदार अपनी दुकानें नहीं खोल सकेंगे। क्योंकि रविवार को अवकाश के चलते प्रशासन ने बाजार को बंद रखने के आदेश जारी किए हुए है। इसलिए रविवार को बाजार की सभी दुकानें बंद रहेगी।

सुरक्षा व्यवस्था कड़ी

प्रवासी मजदूरों ट्रेन से बिहार भेजने के दौरान किसी तरह की व्यवस्था न बिगड़े इसके लिए रेलवे स्टेशन के आसपास के क्षेत्र में पुलिस की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। वैश्य कालेज चौक पर चारों तरफ पुलिस की नाकेबंदी रही। कृष्णा कॉलोनी रोड व सिविल अस्पताल के पास भी नाकेबंदी रही। रेलवे स्टेशन गोदाम रोड पर भी दो स्थानों पर पुलिस ने बेरिकेड्स लगाकर नाकेबंदी रखी तथा प्रवासी मजदूरों के अलावा पुलिस ने किसी भी व्यक्ति को स्टेशन की तरफनहीं जाने दिया। सुबह छह बजे ही पुलिस ने रेलवे स्टेशन की तरफ जाने वाले सभी रास्तों को सील कर दिया गया था।

परचून की दुकानों पर बढ़ रही है भीड़

लॉकडाउन 1 व 2 में परचून की दुकानें खुलने की दिनभर छूट थी लेकिन लाॅकडाउन 3 में प्रशासन ने पूरे बाजार को खोलने की सुबह 8 से दोपहर 2 बजे तक छूट दी। जबकि परचून की दुकानों के खोलने का समय कम कर दिया। पहले परचून की दुकानें सुबह 7 से शाम 7 बजे तक फिर सुबह 8 से 10 व शाम 4 से 7 बजे का निर्धारित किया गया था, लेकिन लॉकडाउन 3 में परचून की दुकानों का समय भी अन्य दुकानों की तरह दोपहर 2 बजे तक ही कर दिया। इससे लोगों को राशन मिलने पर परेशानी हो रही है। इसलिए दुकानों पर भीड़ हो रही है।

लोहारू में टूट रहे नियम

कोरोना संक्रमण को लेकर चल रहे लॉकडाउन के दौरान प्रशासन व सरकार द्वारा दी गई छूट का फायदा लोग अधिक उठा रहे है तथा बेवजह घरों से बाहर निकल रहे है जिस कारण बाजारों में भीड़ उमड़ रही है। बता दें कि लोहारू में मुख्य बाजार में सुबह 8 से 2 बजे तक दुकानें खोलने की सशर्त अनुमति प्रदान की गई है तथा इस दौरान दुकानदारों को मास्क व सैनिटाइजर के प्रयोग के साथ-साथ सोशल डिस्टेंस के नियमों की पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं परंतु कस्बे में 90 फीसदी दुकानदार इन नियमों की पालना नहीं कर रहे हैं। वहीं लोग भी बजार में आने से पूर्व मास्क का प्रयोग नहीं कर रहे तथा खुलेआम बिना जरूरत के भी बाजार में घूम रहे हैं। सरकार द्वारा बाइक पर एक से अधिक के बैठने पर पाबंदी लगाई है परंतु बाजार में दो या तीन लोग बाइक पर आसानी से सवारी करते देखे जा रहे हैं। दुकानदार भी लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग फॉलो करने व मास्क लगाने के लिए नहीं कहते। उन्हें खतरा है कि यदि किसी ग्राहक को पीछे हटने के लिए कह दिया तो वह दूसरी दुकान पर न चला जाए। यही हाल बैंकों के बाहर है वहां भी लोग कोई गंभीरता नहीं दिखा रहे।