बच्चे से कई-कई दिन खुद को दूर रखना मां के लिए ड्यूटी से कहीं ज्यादा मुश्किल: डाॅ. नमिता

  • बच्चे के साथ दूर से बातें करके मन बहला रही हैं डॉक्टर मां
  • कई बार झप्पी न कर पाने का मलाल होता है और तनाव भी

कैथल. (विक्रम पूनिया) 12 साल का बच्चा है। कई-कई दिनों में घर जाना और खुद को बच्चे से दूर रखना ये कोरोना के मरीजों के बीच रहने और सैंपलिंग के कार्य से कहीं ज्यादा मुश्किल है। बच्चे की इतनी याद आती है कि कई बार ये तनाव का रूप भी ले लेता है। करीब दो महीने से बच्चे के गले नहीं मिली हूं। कभी पास बैठकर बातें नहीं की हैं और अपने हाथ से खाना नहीं खिलाया है। इन बातों का मलाल होता है। जब घर से दूर होती हूं तो वीडियो कॉल पर बच्चे से बात करती हूं और समझाती हूं। लेकिन इतने छोटे बच्चे के लिए इसे समझना आसान नहीं है। एक छोटे बच्चे और मां के रिश्ते को शब्दों में बयां करना आसान नहीं है। सबसे बड़ी बात ये है कि अभी ये कब तक चलेगा ये भी मालूम नहीं है। ऐसे में वे कब अपने बच्चे के गले मिल पाएंगी और गोद में बैठाकर बातें कर पाएंगी व अपने हाथ से खाना खिला पाएंगी, ये सोचकर ही डर जाते हैं। लेकिन उन्हें पता है कि ये प्रोफेशन उन्होंने चुना है और ये समय भागने का नहीं डटे रहने का है। उन्हें मालूम है कि उन जैसे कितने ही दूसरे फ्रंटलाइन वर्कर्स हैं जो ऐसी जिंदगी जी रहे हैं। हमें इस काेराेना बीमारी को हराना है और जब तक हम जिंदा हैं हम हारकर नहीं बैठ सकते।
ये बातें मदर्स डे पर भास्कर संवाददाता के साथ कोरोना के सैंपल लेने वाली टीम को लीड कर रही ईएनटी विशेषज्ञ डाॅ. नमिता गुप्ता ने साझा की। डाॅ. नमिता रोजाना 30 से 40 कोरोना संदिग्धों के सैंपल लेने का काम कर रही हैं।
बच्चा खाने की प्रशंसा करता है तो मन खुश हो जाता है

डाॅ. नमिता बताती हैं कि उन्हें खाना बनाने का बहुत शौक है और ये उनके तनाव को कम करता है। पूरी सुरक्षा के बाद वे किचन में जाती हूं और बच्चे के लिए उनकी पसंद का खाना बनाती हूं। वे खाना बनाकर रख देती हैं और फिर उनके पति सबको खाना सर्व करते हैं। बच्चा खाने के बाद जब प्रशंसा करता है तो मन बहुत खुश होता है। दूर से ही ढेर सारी बातें करती हूं और उन्हें स्वच्छता के प्रति जागरूक करती हूं।

कोरोना वायरस ने बदला जीवन
कोरोना के आने के बाद जीवन बहुत बदल गया है। खुद आइसोलेट होने के साथ ही घर को दो हिस्सों में बांटना पड़ा। सास-ससुर बुजुर्ग हैं तो उन्हें आइसोलेट करना पड़ा ताकि संक्रमित न हो जाएं। रोजाना खाने की कुछ आदतें बदलनी पड़ी। अब इम्युनिटी पावर बढ़ाने के लिए जरूरी चीजें खाने में शामिल की हैं और रोजाना शारीरिक अभ्यास पूरे परिवार के जीवन का अहम हिस्सा बन गया है।