परिवार को छाेड़कर काेराेना मरीजों की देखभाल में लगे स्वास्थ्य विभाग के याेद्धा

  • काेविड-19 वैश्विक माहमारी की राेकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग दिन-रात सेवा में जुटा

बहादुरगढ़. कोरोना को लेकर ट्रामा सेंटर में बनाए गए आइसोलेशन वार्ड में डाॅक्टर, नर्सिंग ऑफिसर व पैरामैडिकल स्टॉफ कोरोना योद्धा की भूमिका में दिन-रात अपनी सेवाएं दे रहे हैं। बहादुरगढ़ में लगातार बढ़ते जा रहे केसों के बावजूद वे चिंतित जरूर रहते हैं मगर इलाज व सेवा भाव में उनका हौसला कम नहीं हो रहा। बल्कि अपना पूरा फर्ज निभाते हुए अपनी ड्यूटी सजगता व सावधानी के साथ कर रहे हैं। समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े लोग भी उनके इस सेवा भाव की सराहना करते हुए उनका सम्मान भी कर रहे हैं। इसी तरह से सभी डाॅक्टरों को लेकर अस्पताल में कार्यरत नर्सिंग ऑफिसर लगातार मरीजों की देखभाल में लगी रहती हैं। एक तरफ जहां उन्हें अपने परिवार को चिंता है तो दूसरी तरफ यहां आने वाले मरीजों के स्वास्थ्य को लेकर वे पूरी तरह से गंभीर भी नजर आती हैं। उनकी देखभाल व समय पर दवाइयां व पूरा उपचार मिले इसमें किसी तरह कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही।
पिछले एक माह से अपने परिवार से नहीं मिली : सुनीता
आइसोलेशन वार्ड में कार्यरत नर्सिंग ऑफिसर सुनीता व पूनम जून के अलावा अन्य सभी नर्सिंग ऑफिसर यहां पिछले काफी दिनों से लगातार अपनी सेवाएं दे रही हैं। सुनीता ने बताया कि वह पिछले एक माह से अपने परिवार तक नहीं मिल पाई है। अपने करीब 7 साल के बेटे अंशु को उन्होंने मायके में गांव गुभाना छोड़ा हुआ है। ससुराल भिवानी जिले में है, क्योंकि पति अमर सांगवान बैंगलुरू में इंजीनियर है, वहीं सास-ससुर स्वास्थ्य सेवाओं में कार्यरत हैं। ऐसे में बच्चे की देखभाल को लेकर उसे नैनिहाल में ही छोड़ गया हैं। उन्होंने बताया कि आईसोलेशन वार्ड का चार्ज उनके पास ही रहा है। ड्यूटी भी लगातार की जा रही हैं। यहां पर 2 बैच में स्टॉफ कार्यरत हैं। करीब 20-22 नर्सिंग ऑफिसर यहां अपनी सेवाएं रोटेशन आधार पर दे रही हैं। अस्पताल केपीएमओ डाॅ. संजय दहिया, डीएमएस डाॅ. संदीप गुलिया, डा. बिजेंद्र दलाल, डा. मधुप सेठी, आरएमओ डाॅ. उरेंद्र, डाॅ. विनय सिंगला, डाॅ. शैली व डाॅ. कुणाल सहित अन्य सभी डाक्टरों का सहयोग भी उन्हें पूरा मिल रहा हैं। डाॅक्टर, नर्सिंग ऑफिसर व पैरामेडिकल स्टाफ कोरोना योद्धा की भूमिका लगातार निभा रहे। उन्होंने बताया कि परिवार से मिलने का बहुत मन करता है, लेकिन कोरोना महामारी के दौरान बहादुरगढ़ में विश्राम गृह में ही उन्हें रहना पड़ रहा हैं। बेटे व परिवार के अन्य सदस्यों से वीडियो कॉल कर उनका हालचाल पूछा जा रहा है।

8 वर्षीय बेटी सास-ससुर के पास है
उधर पूनम जून ने बताया कि उसका परिवार बहादुरगढ़ के देव नगर में रह रहा है, मगर उसके बाद भी वह घर नहीं जा पा रही। उनकी 8 वर्षीय बेटी लवण्या सास-सुसर के पास है। परिवार की याद हमेशा आती रहती है। पति संदीप जून नोएडा में इंजीनियर है और इन दिनों घर ही रहकर वे काम कर रहे हैं। किसी तरह का कोई कोरोना संक्रमण न फैले इसको ध्यान रखते हुए एहतियात के तौर पर वे शहर के विश्राम गृह में ही रह रही हैं। यहां पर स्वास्थ्य विभाग व प्रशासन की ओर से उनके रहने व खाने की उचित व्यवस्था भी की गई है।