जननी जने तो ऐसा जने के दाता के सूर, नी तो रिजे बांझडी, मत ना गवा जे नूर

  • महाराणा प्रताप चाैक पर क्षत्रिय सभा सदस्यों ने की प्रतिमा की सफाई

कुरुक्षेत्र. वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयंती जिलेभर में शनिवार को धूमधाम से मनाई गई। क्षत्रिय सभा की तरफ से कुरुक्षेत्र में महाराणा प्रताप चौक पर उनकी प्रतिमा पर सफाई कर माल्यार्पण किया गया। क्षत्रिय सभा के जिलाध्यक्ष राजेंद्र सिंह तंवर, राजकर्ण तंवर, राकेश राणा, गौरव, विनोद राणा कोयर, मोहित बीबीपुर, विनय राणा, रॉकी राणा, सोनू, शुभम जलबेहड़ा आदि ने मिलकर सफाई की। राजेंद्र राणा व राकेश राणा स्वीटी ने कहा कि महाराणा प्रताप की शौर्य गाथाएं आज भी लोगों में जोश भरती हैं। उनकी वीरता व स्वाभिमान को हर कोई नमन करता है। उनकी वीरता पर ही कहा जाता है कि जननी जने तो ऐसा जने के दाता के सूर, नी तो रिजे बांझडी, मत ना गवा जे नूर। धन्य है ऐसी मां, जिन्होंने वीर महाराणा प्रताप जैसों को जन्म दिया।
रोटी बैंक शाखा ने किया नमन : कुछ लोग हार के भी जीत जाते हैं। कुछ लोग जीत के भी हार जाते हैं जबकि अकबर के बुत कहीं नजर नहीं आते। महाराणा की प्रतिमाएं हर चौराहे पर नजर आती हैं। यह कहना है डाॅ. अशोक कुमार वर्मा का। महाराणा प्रताप जयंती पर उन्हें रोटी बैंक शाखा द्वारा पुष्प अर्पित कर नमन किया गया। डाॅ. भारतेन्दु हरीश ने कहा कि महाराणा प्रताप वीरता और पराक्रम के प्रतीक थे। उन्होंने देश की स्वाधीनता और स्वाभिमान के लिए मुगलों के विरुद्ध लड़ाई लड़ी। यदि वो चाहते तो मुगलों से समझौता कर ऐश्वर्यपूर्ण जीवन जी सकते थे। डॉ. अरुण धीमान और कर्म चंद ने कहा कि महाराणा प्रताप भारतवर्ष के वीर सपूत, महान योद्धा और अद्भुत शौर्य और साहस के प्रतीक थे। इस अवसर पर कर्मचंद, डॉ. अरुण धीमान, पंकज ठकराल आदि उपस्थित रहे।