कांग्रेस को झटका, ईडी ने एसोसिएटेड जर्नल मामले में मोतीलाल वोहरा की 16.38 करोड़ की संपत्ति एटैच की

  • एटैच की गई संपत्ति में में 9 मंजिला इमारत है और दो बेसमेंट भी हैं
  • मोतीलाल वोरा और पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हु्डडा पर भी चल रहा है सीबीआई कोर्ट में केस

नई दिल्ली/पानीपत. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शनिवार को कांग्रेस पार्टी को बड़ा झटका देते हुए मोतीलाल वोरा की 16.38 करोड़ रुपये की संपत्ति एटैच कर दी है। यह कार्रवाई कांग्रेस पार्टी के प्रकाशन एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड के मनी लॉन्ड्रिंग केस में हुई है। बता दें कि मोतीलाल वोरा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के बेहद करीबी हैं। उन पर इतनी बड़ी कार्रवाई होना कांग्रेस पार्टी के लिए बड़ा झटका है।

ईडी ने कहा कि कुर्क की गई संपत्ति मुंबई में 9 मंजिला इमारत है, इसमें दो बेसमेंट भी हैं और 15 हजार स्क्वायर मीटर में बना हुआ है। इसकी कुल कीमत 120 करोड़ रुपए है। इसमें से 16.38 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की गई है।

सीबीआई कोर्ट में चल रहा है हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा और मोतीलाल वोरा पर केस

  • मोतीलाल वोरा और हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर पंचकूला की सीबीआई कोर्ट में केस चल रहा है। एजेएल कांग्रेस नेताओं व गांधी परिवार के नियंत्रण वाली कंपनी है। जो नेशनल हेराल्ड अखबार चलाती थी। 2008 में कंपनी ने अपने सारे प्रकाशन बंद कर दिए।
  • हरियाणा सरकार ने 2005 में इस कंपनी को एक प्लॉट रि-अलॉट किया था, उस समय हुड्डा सीएम के साथ हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) के चेयरमैन भी थे। मोतीलाल वोरा एजेएल के चेयरमैन रहे हैं। 24 अगस्त 1982 को पंचकूला सेक्टर-6 में 3360 वर्गमीटर का प्लॉट नंबर सी-17 तत्कालीन सीएम चौधरी भजनलाल ने एजेएल को अलॉट कराया था। कंपनी ने 10 साल तक कंस्ट्रक्शन नहीं किया तो 30 अक्टूबर 1992 को हुडा ने अलॉटमेंट रद्द कर प्लॉट पर वापस कब्जा ले लिया।
  • 28 अगस्त 2005 को तत्कालीन सीएम हुड्‌डा ने अफसरों के मना करने के बावजूद एजेएल को 1982 की मूल दर पर ही प्लॉट अलॉट करने की फाइल पर साइन कर दिए थे। इसी दौरान पंचकूला में एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड को जमीन आबंटित की थी। आरोप है कि एजेएल को यह जमीन आवंटित करने के लिए नियमों की अनदेखी की गई। इससे राज्य सरकार को करोड़ों रुपए के रेवेन्यू का नुकसान हुआ।
  • खट्टर सरकार ने सत्ता में आते ही इस मामले की जांच विजिलेंस ब्यूरो को सौंप दी थी। विजिलेंस ने इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री सहित अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद सरकार ने मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। अब यह मामला सीबीआई की विशेष अदालत में चल रहा है।