इन 2 कहानियों से समझें बच्चों के लिए मां और मां के लिए बच्चे की अहमियत

अम्बाला. (रीतिका एस. वोहरा) आज मदर्स-डे है। इस खास मौके पर पढ़े दो कहानियां। पहली जो बेटियां अपनी मां के लिए महसूस करती हैं और दूसरी जिसमें मां अपनी बेटी के लिए क्या महसूस करती हैं।
दोनों कहानियां हमारी कोरोना वॉरियर डॉक्टर्स से जुड़ी हैं। यह कहानियां हमें यह भी अहसास कराती हैं कि इस कोरोना संकट में डॉक्टर कैसे दोहरे मोर्चे पर बखूबी लड़ रही हैं। और कोरोना से लड़कर हमें बचाने में लगी हैं।
मम्मी आप स्ट्रॉन्ग लेडी हाे आपकी रिपोर्ट निगेटिव आएगी….हम सब आपकी सुरक्षा के लिए प्रार्थना कर रहे हैं, दादू, पापा सभी को आप पर गर्व है

हमारी मदर डॉ. मोनिका महाजन अम्बाला कैंट सिविल अस्पताल में ईएनटी स्पेशलिस्ट हैं। 5 दिन पहले अस्पताल की डॉक्टर कोरोना पॉजिटिव मिलीं तो सभी डॉक्टर्स के सैंपल लिए गए। हमारी मम्मी का सैंपल लिया, इसलिए रिपोर्ट आने तक उन्हें घर से बाहर आइसोलेट किया गया था। उस दिन मम्मी घर नहीं आईं तो हमें घबराहट थी। मम्मी को भी डर लग रहा था कि कहीं रिपोर्ट पॉजिटिव न आ जाए। मां हमेशा हमें ताकत देती हैं, उस दिन हमारी बारी थी। हमने मां के मोबाइल पर मैसेज भेजा। फिर वीडियाे काॅल करके कहा-मम्मी आप स्ट्रॉन्ग लेडी हाे। आप ठीक निकलेंगी। हम सब आपकी सुरक्षा के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। दादू, पापा, नानू-नानी सभी को आप पर गर्व है। शुक्रवार काे मां की रिपोर्ट निगेटिव आई। हम घर के बाहर जब बेटियाें काे पता चला कि रिपोर्ट नेगेटिव आई हैं। मां के इंतजार में हम घर के बाहर ही खड़ीं थी। जब वो लाैटीं ताे उन्हें गले लगाकर प्यार भी नहीं कर सकती थी। जब से मां की काेविड में सेंपल लेने की ड्यूटी लगी है तब से उन्हें गले नहीं लगाया है। बहुत मिस करती हैं। मैं (अन्नया) मेडिकल की तैयारी कर रही हूं, उसे इस समय मां के सपोर्ट की जरूरत है। मां ड्यूटी करती हैं हमें गाइड भी कर रही हैं। मां ने मुझे कहा कि डाॅक्टर की ड्यूटी बहुत टफ हाेती है। अभी भी समय है किसी अाैर प्राेफेशन काे चुन सकती हाे। मैंने साेच लिया है कि मैं मां की तरह डाॅक्टर ही बनूंगी। मुझ उन पर गर्व है।-अन्नया व अवनि महाजन।

बेटी शनाया वॉयस मैसेज भेजती है, मम्मा हाथ धोते रहना: डॉ. अमिता
काेविड-19 के दाैरान कभी सैंपलिंग ताे कभी फ्लू ओपीडी में ड्यूटी रहती है। मेरी 5 साल की बेटी शनाया शर्मा मुझे हर वक्त बूस्ट करती है। उसे मेरे अस्पताल से घर आने का सबसे ज्यादा इंतजार रहता है। क्याेंकि हम मिलकर खूब सारी एक्टिविटीज करते हैं। पहले जब में ड्यूटी से लौटती थी तो घर पहुंचते ही मुझे हक करके मिलती थी। अब पहले फ्रेश होती हूं और फिर उसके साथ मिलती हूं। अब वाे समझती है कि मैं किस सिचुएशन में वर्क कर रही हूं। बिजी शेड्यूल रहता है लेकिन जब अस्पताल में ड्यूटी के दाैरान शिनाया का वॉयस नाेट आते हैं। आप घर कब आओगे, कभी मम्मी मैंने होमवर्क कर लिया है अाप अाअाेगे ताे फन गेम्स करेंगे। कभी याद दिलाती है कि मम्मी अाप हाथ धाेते रहना अाैर अापने खाना खाया। उसके इस तरह के मैसेज सुनते ही मुझमें काम करने की अाैर ज्यादा एनर्जी अा जाती है। वैसे ताे वाे समझती है लेकिन एक चीज बहुत मिस करती है। पहले घर के आउटडोर एरिया में पार्क बनाया हुअा है वहां उसे फन बाथ दिलाने ले जाती थी वाे बेहद खुश हाेती थी। लेकिन अब टाइम ना मिल पाने के कारण शनाया उन मोमेंट्स काे मिस करती है। अभी कुछ दिन पहले ज्यादा पॉजिटिव केस मिले ताे वाे पल एेसा था जब मुझे डर लगा। क्याेंकि बिंग अ इंडियन माॅम अक्सर हम अपने बच्चाें काे बहुत लाड-प्यार करते हैं। बच्चाें काे प्यार किए बिना रह भी नहीं पाते। सिचुएशन काे देखते हुए बेटी से साेशल डिस्टेसिंग बनाई।- डाॅ. अमिता बत्तरा शर्मा, डेंटिस्ट सर्जन, सिविल अस्पताल कैंट।