अनाजमंडी में बारिश में भीगे गेहूं के कट्टे अब आढ़तियों के लिए बने गले की फांस

  • गेहूं के कट्टों में डैमेज हो जाने से करोड़ों रुपए का हो सकता है नुकसान : जितेंद्र

पूंडरी. पांच दिन पहले हुई बारिश से अनाजमंडी पूंडरी में भीगे गेहूं के कट्टे अब आढ़तियों की गले की फांस बने हुए है। मंडी में इस समय लगभग 3 लाख कट्टे गेहूं पड़ा हुआ है। बेमौसमी बारिश हो होने पर मंडी में पानी भर जाने से गेहूं कट्टों में पानी भर गया था।
 जिसके बाद आढ़तियों द्वारा 1.50 रुपए अतिरिक्त मजदूरी देकर कट्टों की डांग लगवानी पड़ी। उसके बाद कट्टे सूखने की बजाए उनमें पानी भर जाने से गेहूं अंकुरित हो गई और काली पड़ गई। अब जब आढ़ती संबंधित एजेंसियों में गेहूं के कट्टों को भेजते भी है तो वहां क्वालिटी अधिकारी गेहूं की स्थिति को देखकर रिजक्ट कर कट्टों को वापस भेज देते हैं। जिससे आढ़ती को लोडिंग करवाने से लेकर वापस उतरवाने की मजदूरी व गाड़ी का किराया भी वहन करना पड़ रहा है। जो गेहूं डैमेज हो चुकी है वो भी खाने के लायक नहीं रही है और उसकी जगह भी आढ़तियों को गेहूं खरीद करनी पड़ रही है। जिससे आढ़तियों को करोड़ों रुपए की चपत लग सकती है।
 अनाज मंडी फूड ग्रेन डीलर एसोसिएशन के प्रधान ध्यान चंद व आढ़तियों ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि इस बार आढ़तियों के लिए व्यापार करना अभिशाप बन गया है। किसान गेहूं तुलाई करवाकर चला गया, खरीद एजेंसियों ने गेहूं सरकारी मापदंडों के अनुसार खरीद किया, ठेकेदार द्वारा समय पर लोडिंग नहीं की जा रही। समय पर कट्टों का उठान न होने व बे-मौसमी बारिश में कट्टे भीग जाने पर अब उसका पूरा हर्जाना आढ़तियों को भुगतान पड़ रहा है। मंडी द्वारा डीएफएससी के अधिकारी से बात कर फैसला लिया गया था कि पीपी के कट्टों में तुलाई गेहूं कट्टों का 25 प्रतिशत 1 से 100 नंबर की दुकानों का उठान किया जाए, लेकिन चार दिनों से इन कट्टों का ही उठान नहीं हुआ जो कि मुश्किल से 50 हजार कट्टे थे। ठेकेदार के ऊपर अधिकारियों का कोई कंट्रोल नहीं है। जूट के कट्टों में तुलाई गेहूं सोलूमाजरा स्थित सोलो गोदामों में भेजा जा रहा है, जहां से प्रतिदिन 20 से 25 ट्रक गेहूं रिजक्ट कर वापस भेज दिये जाते हैं। जिससे आढ़तियों को लाखों रुपए का चुना लग रहा है।