यूक्रेन, सिंगापुर, अॉस्ट्रेलिया, फिलीपींस से लौटना चाहते हैं स्टूडेंट्स कई बोले- यूक्रेन के लोग कोरोना का लेकर बेपरवाह, इसलिए हमें खतरा

अम्बाला. कोरोना संकट में विदेश में रहे अम्बाला के 71 लोगों ने देश वापस लौटने का आवेदन किया है। इनमें से 32 स्टूडेंट्स हैं। ज्यादातर छात्र यूक्रेन से मेडिकल की पढ़ाई करने वाले हैं। सबसे ज्यादा घबराहट भी यूक्रेन के स्टूडेंट्स में दिख रही है। उनका कहना है कि यूक्रेन के स्थानीय लोग कोरोना को बिल्कुल भी गंभीरता से नहीं ले रहे। न सोशल डिस्टेंसिंग है और न लोग मास्क व सेनिटाइजर का इस्तेमाल कर रहे हैं। बाजार में ऐसे ही घूमते रहे हैं। बसों में भी भीड़ है। स्थानीय हालात देखते हुए ही इन स्टूडेंट्स ने भारत लौटने का फैसला किया है। उनका कहना है हमें अपना घर व देश ज्यादा सुरक्षित लगता है। भास्कर टीम ने उन स्टूडेंट्स से बात की, जिन्होंने स्वदेश लौटने का आवेदन किया है। इनका कहना है कि यूक्रेन मेडिकल यूनिवर्सिटी अब ऑनलाइन ही पढ़ा रही है। जून में एग्जाम भी ऑनलाइन ही होंगे, ऐसे में देश लौटना ही बेहतर है।
यूक्रेन में एमबीबीएस सेकेंड ईयर की स्टूडेंट सेक्टर-9 की मैथिली गौड़ बताती हैं कि यूक्रेन के बैंकों ने इंडियन करंसी लेना बंद कर दिया है। जो करंसी थी, उसे डॉलर या यूक्रेन करंसी में नहीं बदला जा रहा। फ्लैट का रेंट देने व खाने पीने की समस्या आ रही है। यूक्रेन एंबेसी से हेल्प नहीं मिल रही है। वहां से सीधा इंडिया एम्बेसी से बातचीत करने के लिए कहा जाता है। अब वापस अपने वतन आने के लिए ऑनलाइन आवेदन जिला प्रशासन से किया है। अब फ्लाइट का वेट है। कब उड़ान यहां से भरेंगे।
एमबीबीएस ईयर की स्टूडेंट नारायणगढ़ के पास गांव डहर की रहने निधि सैनी कहती हैं कि तीन साल पहले यूक्रेन एमबीबीएस का काेर्स करने के लिए अाई थी। डॉक्टर बनने का सपना है। लेकिन अब वापस घर अाने में ही भलाई है। हालात काफी बिगड़ने लगे हैं। डर इस बात का है कि वापस दाेबारा अा पाएंगें या नहीं। यहां सितंबर में फाइनल एग्जाम हाेता है। लेकिन अब कुछ पता नहीं है कि वाे हाेगा या नहीं। ताे डर बना हुअा है कि तीन साल की मेहनत खराब न हाे जाए।
नारायणगढ़ के ही हर्ष सैनी कहते हैं कि नारायणगढ़ में मनी ट्रांसफर की सुविधा न हाेने के कारण पापा अशाेक कुमार काे चंडीगढ़ पैसे भेजने के लिए जाना पड़ता है। ऐसे में खतरा उनके लिए भी है। अब जल्द ही अपने घर लाैटना चाहता हूं।
थर्ड ईयर के स्टूडेंट अम्बाला के हर्षवर्धन पीजी में रहते हैं। इसलिए अभी तक खाने पीने की कोई समस्या पेश नहीं आई है, लेकिन यहां लोग बाहर बिना मास्क के घूम रहे हैं। वह सेनिटाइजर का प्रयोग भी नहीं करते। हमें डर लगता है, इसलिए पीजी से बाहर ही नहीं निकलते। रात को जब सड़कों पर बहुत कम लोग रह जाते हैं तब मार्केट में जाते हैं। थर्ड ईयर के स्टूडेंट नारायणगढ़ के हर्षित शर्मा कहते हैं कि यूक्रेन के हालात खराब हैं। अगर कर्फ्यू लग जाता है तो उनके सामने बड़ी दिक्कत आएगी, क्योंकि वह यूक्रेन लैंग्वेज नहीं जानते। ऑनलाइन स्टडी तो इंडिया आकर भी की जा सकती है।
स्टूडेंट्स के मन में यह टीस भी

  • विदेशों में फंसे छात्रों को वापस लाने का निर्णय सही है लेकिन उनसे पैसे न लिए जाएं।
  • इंडिया में मेडिकल कॉलेज कम हैं। इसलिए स्टूडेंट्स विदेश जाते हैं। पेरेंट्स बच्चों का खर्चा नहीं उठा सकते। इसलिए वह बच्चों को स्टडी लोन लेकर भेजते हैं।
  • एमबीबीएस छात्र विदेशों में केवल स्टडी करते हैं। वहां पर कोई काम या नौकरी नहीं कर सकते। इस कारण उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर होती है।
  • महामारी खत्म होने के बाद फिर से स्टडी करने के लिए जाना है। अभिभावक लॉकडाउन के कारण पहले आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं।