पूंडरी मंडी में लोडिंग के इंतजार में पड़े 3.65 लाख गेहूं के कट्टे

  • मंडी में गेहूं की आवक घटकर 8 हजार क्विंटल, आढ़तियों को हो रहा करोड़ों रुपए का नुकसान: टाया

पूंडरी. अनाज मंडी पूंडरी के आढ़तियों का समय पर गेहूं के कट्टों का उठान न होने के चलते करोड़ों रुपए की चपत लग सकती है। गेहूं का सीजन लगभग समाप्ति के कगार पर है और मंडी में आवक भी घटकर लगभग 8 हजार क्विंटल की रह गई है, लेकिन मंडी में जितने कट्टे अभी तक आए हैं, उनमें से लगभग आधे अब भी लोडिंग के इंतजार में पड़े हुए है।
 मंडी में तीन खरीद एजेंसी हैफेड, डीएफएससी व एफसीआई द्वार गेहूं खरीद की गई। मंडी में गुरुवार तक कुल 7.25 लाख कट्टे आए हैं जिसमें लोडिंग के लिए
अब भी 3.65 लाख कट्टे पड़े हुए हैं जिसमें से हैफेड के 1.90 लाख, डीएफएससी के 1.70 लाख व एफसीआई के मात्र 5 हजार कट्टे लोडिंग के लिए पड़े हुए है। जो आढ़तियों के लिए भी सिरदर्द
बने हुए हैं। मंडी आढ़ती सुरजा सिंह, नरेश कुमार, भूषण, सुभाष चंद, राजेश कुमार व कृष्ण कुमार ने बताया कि समय पर लोडिंग न होने की वजह से अब अचानक बारिश होने पर गेहूं के कट्टे पानी में भीग गए।
 इसके चलते आढ़तियों को पहले तो गेहूं डैमेज होने से बचाने के लिए उनकी पल्लेदारों को 1.50 रुपया प्रति कट्टा देकर डांग लगवानी पड़ी। दस दिनों तक कट्टे न उठने की वजह से गेहूं सूख गई और अब घटती आ रही है, कई जगह पानी भर जाने से जो कट्टे पानी में खड़े रहे, उनमें गेहूं डैमेज हो चुकी है जिसकी भरपाई अब खरीद एजेंसियां आढ़ती से कर रही हैं। अब जब खरीद एजेंसियों द्वारा गेहूं का उठान करवाया जाता है तो आढ़ती द्वारा लोड किए गए कट्टों को गोदामों में उतरवाने की बजाए अधिकारियों द्वारा उनमें नमी, डैमेज या अन्य बहाना बनाकर वापस भेज दिया जाता है जिससे आढ़ती को ट्रक के किराए से लेकर, लोडिंग की मजदूरी तक वहन करनी पड़ रही है। आढ़तियों का कहना है कि ऐसे में किसान गेहूं बेचकर चला गया, एजेंसी द्वारा खरीद कि गई समय पर एजेंसी नहीं उठाती है तो गेहूं के खराब होने की स्थिति में उसकी भरपाई आढ़ती से की जा रही है जबकि सरकार गेहूं की पेमेंट व लोडिंग 72 घंटे के अंदर-अंदर करवाने की दावे करती है। हकीकत ये है कि 20 अप्रैल को गेहूं की खरीद शुरू की गई थी और अभी तक 25 अप्रैल तक की खरीद की ही पेमेंट दी गई है। समय पर पेमेंट और लोडिंग न होने का खमियाजा भी आढ़तियों को भुगतना पड़ रहा है।