नर्सों ने रेस्ट हाउस को ही बना लिया आशियाना, बच्चों से वीडियो कॉल पर हो रही बात

नारायणगढ़. नर्स बहन जी हमारा नंबर कब आएगा। इस सवाल का जवाब नर्स दे पाती उससे पहले ही दूसरी तरफ से आवाज आई बहन जी यह पर्ची मेरी है मुझे दवा कब मिलेगी? नर्स ने दोनों ही सवालों के जवाब बड़ी सहजता से दिए। उसके चेहरे की मुस्कराहट और शांत स्वभाव देखकर कोई यह नहीं समझ सकता था कि यह 24 घंटे की स्पेशल ड्यूटी कर रही हैं। घर से मात्र दस किलोमीटर दूरी होने के बावजूद यह नर्स पिछले 15 दिनों से यह अपने छोटे-छोटे बच्चों से मिल नहीं पाई हैं, क्योंकि कोविड-19 में स्पेशल ड्यूटी के कारण कुछ नर्सों को रेस्ट हाउस में ही रहना पड़ रहा है।
अस्पताल में काम करने वाली नर्सें अकसर इसलिए घर नहीं जा पा रही हैं कि कहीं उनके अपने इस बीमारी की चपेट में न आ जाएं। नारायणगढ़ के अस्पताल की तीन नर्सें पिछले कई दिनों से रेस्ट हाउस में ही रह रही हैं। ड्यूटी जाने से पहले तीनों अपना नाश्ता बनाती हैं। शाम को जो पहले आ जाए वही रात का खाना बना देता है।
छोटे बच्चों को संभाल रहे पति व सास, ससुर
निशा चौधरी का गांव मुगल माजरा नारायणगढ़ से मात्र पांच किलोमीटर दूर है। इसके बावजूद वह पिछले 45 दिनों से घर नहीं गई हैं। उनका बेटा 7 साल का और बेटी 3 साल की हैं। निशा के दोनों बच्चों की देखभाल सास, ससुर और पति कर रहे हैं। बच्चे बार-बार मिलने की जिद करते हैं तो वीडियो कॉल कर उनसे बात कर लेती हैं। बच्चे पूछते हैं कि मम्मी घर कब आओगे तो उन्हें जल्द आने का दिलासा दे देती हैं। निशा चौधरी शाम 7 बजे तक ड्यूटी करने के बाद स्थानीय रेस्ट हाउस आ जाती हैं। उन्हें कभी भी कॉल करके बुला लिया जाता है।
5 साल के बेटे से वीडियो कॉल से करती बात
नर्स अनीता राज काला आंब की रहने वाली है। उनका 5 साल का एक बेटा है। वह पिछले 15 दिनों से घर नहीं गई हैं। जब भी समय मिलता है बेटे से वीडियो कॉल पर मिलती है। सास, ससुर बेटे की देखभाल कर रहे हैं, जिस कारण अनीता को कोई चिंता नहीं है। अनीता कहती हैं कि फौज और पुलिस को तो अकसर दश सेवा के मौके मिलते रहते हैं, लेकिन उन्हें पहली बार यह मौका मिला है, जिसे वह गंवाना नहीं चाहती। जब सब कुछ ठीक हो जाएगा तो फिर पहले की तरह परिवार के साथ रहने का मौका मिल जाएगा।
पति व बच्चे देते हौसला
नर्सिंग सिस्टर रविंद्र कौर अम्बाला की रहने वाली हैं और नारायणगढ़ के सामान्य अस्पताल में सेवाएं दे रही हैं। वह पिछले 15 दिनों से घर नहीं जा सकी हैं। उनके दो बेटे हैं जिनमें से एक कनाडा में है तो दूसरा गुरु ग्राम में है। पति बिजली विभाग में हैं । रविंद्र कौर हर रोज तीनों से फोन पर बात कर हालचाल पूछ लेती हैं। रिश्तों की यह दूरियां कई बार बेहद दुखद हो जाती हैं। दूर बैठे बच्चों से बात कर वह भावुक भी हो जाती हैं, लेकिन अपने फर्ज को नहीं भूलती। दोनों बेटे और पति रविंद्र कौर को हौसला देते हैं कि वह अपना काम करती रहे। जब कोरोना से जंग जीत लेंगे तो सब घर पर इकट्ठे हो जाएंगे।