नई व्हील चेयर मांगने खेलमंत्री के पास पहुंची थी रजनी, मंत्री ने दी एक लाख की मदद

  • पैसे की कमी से छूट गई थी पढ़ाई, मंत्री ने चेक के बदले लिया पढ़ाई जारी रखने का वादा

पिहोवा. दिव्यांग रजनी की व्हीलचेयर के सहारे ही कहीं आना-जाना कर पाती है। उसकी आर्थिक स्थिति भी कमजोर है। कुछ दिन पहले उसकी व्हीलचेयर टूट गई। नई व्हीलचेयर की मांग को लेकर रजनी खेलमंत्री के पास पहुंची । लेकिन मंत्री ने ना केवल व्हीलचेयर दिलवाई। बल्कि उसे अपना रोजगार चलाने के लिए मदद के तौर पर एक लाख रुपए भी दिए। खेल एवं युवा मामले मंत्री संदीप सिंह ने दिव्यांग रजनी को एक लाख का चेक भेज कर उसकी आर्थिक मदद की है। एसडीएम सोनू राम के कार्यालय से चेक लेकर रजनी खुश नजर आई। गांव बीबीपुर कलां की 18 वर्षीय रजनी रानी ने बताया कि बचपन से उसकी दोनों टांगे खराब हैं, जो काम नहीं करती। वह अपने पैरों पर नहीं चल पाती। कुछ साल पहले उसे एक संस्था द्वारा व्हीलचेयर भी दी गई थी, लेकिन उसके घर के सामने आवारा सांडों की लड़ाई में व्हील चेयर टूट गई। जिसके बाद उसका चलना मुश्किल हो चुका था।
सिलाई का सामान खरीदने को नहीं थे पैसे

रजनी के मुताबिक उसका परिवार अनुसूचित जाति से हैं। पिता सुभाष और मां किसानों के यहां मजदूरी करते हैं। अपनी रोजी रोटी को लेकर रजनी को अपने भविष्य की चिंता थी। इसलिए उसने पढ़ाई बीच में ही छोड़ कर सिलाई कढ़ाई का काम भी सीखा, लेकिन सामान खरीदने के लिए उसके पास पैसे नहीं थे। कुछ दिन पहले उसे खेल मंत्री के दौरे का पता चला तो वह उनसे व्हील चेयर के लिए मदद की आस लेकर उनके पास पहुंची। मंत्री ने उसकी बात सुनते ही तुरंत एक लाख की सहायता देने की बात कही, लेकिन बदले में उससे एक वादा भी लिया कि वह अपनी पढ़ाई जारी रखेगी।

दिव्यांग की मदद के साथ मोटिवेट भी करेंगे
खेल मंत्री का कहना है कि जब दिव्यांग रजनी उनसे मिलने आई तो उन्हें अपने वो दिन याद आ गए। जब उन्होंने पीठ में गोली लगने के बाद दो साल व्हील चेयर पर बिताने पड़े थे। खेल मंत्री ने कहा कि वे अच्छी तरह से जानते हैं कि जब शरीर अपना साथ नहीं देता तो मदद की कितनी अहमियत होती है। उनका प्रयास है कि जो लोग शारीरिक रूप से काम करने में असमर्थ महसूस करते हैं। उनकी मदद करने के साथ साथ उन्हें मोटिवेट भी किया जाए। ताकि उनके मन से नकारात्मक भाव खत्म हो सके। क्योंकि दिव्यांगता से बड़ा खतरा मन में पैदा होने वाली नकारात्मकता से है। जो हीन भावना पैदा कर देती है।