ऑनलाइन शिक्षा को लेकर अधिकारी 20 अभिभावकों और बच्चों से फोन पर करेंगे बात, विभाग को देंगे रिपोर्ट

  • शिक्षा विभाग ने सभी अधिकारियों व कर्मचारियों की ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर लगाई है ड्यूटी

यमुनानगर. लॉकडाउन के दौरान अप्रैल से सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले हजारों छात्रों को घरों में ही वाट्सएप व टीवी चैनलों से ऑनलाइन शिक्षा दी जा रही है। सभी छात्रों तक ऑनलाइन शिक्षा पहुंचे, इसलिए बच्चों को दी जा रही ऑनलाइन शिक्षा के कार्य में आ रही समस्याओं को लेकर शिक्षा विभाग ने पत्र जारी कर सभी कर्मचारियों, अधिकारियों, स्कूल मुखिया, बीआरपी, एबीआरसी, बीईओ, फैकल्टी, ऑफ डाइट, प्रोग्राम ऑफिसर रोज 20 माता-पिता और बच्चों से फोन कर संपर्क करेंगे।
प्रसारण के समय को लेकर पठन-पाठन ऑनलाइन कार्यक्रम को लेकर अवलोकन करेंगे। इसी माह सीएसआरटी द्वारा पाठ्यक्रम की मासिक बांट अनुसार प्रत्येक विषय के दो से चार पाठ कराए जाने हैं। ऑनलाइन शिक्षा का अवलोकन किया जाएगा। इस पर्यवेक्षण के लिए जिलों के लिए निदेशालय का कार्यक्रम अधिकारी और सहायक निदेशक समय सारणी व अन्य दायित्वों के लिए उत्कर्ष सोसाइटी से समन्वय बनाएंगे। डीईओ, डीईईओ, डीपीसी, प्रिंसिपल डाइट के संपर्क में रहेंगे। अधिकारियों को प्रतिदिन छात्रों की कक्षा अनुसार रिपोर्ट एक्सल सीट पर विभाग की ईमेल पर अपलोड करनी है। जिले में ये जिम्मेदारी प्रोग्राम आॅफिसर उमा को विभाग की ओर से दी गई। खंड शिक्षा अधिकारी रविंद्र राणा का कहना है कि विभाग की अच्छी योजना है।
इससे ये पता चल सकेगा, छात्र ऑनलाइन पढ़ाई में कितनी रुचि ले रहे हैं। विभाग की ओर से आदेश हैं कि ऑनलाइन शिक्षा को लेकर हर रोज मूल्यांकन हो। इसके लिए सभी अधिकारियों को 20 अभिभावकों व बच्चों से रिपोर्ट लेकर विभाग को देनी है। इससे छात्रों की ऑनलाइन शिक्षा में आ रही समस्या खत्म हो सकेगी।

अभिभावकों से पूछे जाने वाले सवाल
क्या आपके बच्चे को अध्यापक टीवी, प्रसारण एजुसेट का स्वयं प्रभा की समय सारिणी मिली है। क्या अध्यापक द्वारा ई संचार के माध्यम फोन, मेल, वाट्सएप, पड़ोसी सहपाठी के माध्यम से गृह कार्य अभ्यास दिया जा रहा है। क्या आप द्वारा बच्चों को टीवी प्रसारण एजुसेट व स्वयं प्रभा चैनल देखने का समुचित समय व वातावरण दिया जा रहा है। क्या आप अभिभावक व छात्र की समस्या का समाधान चाहते हैं। या कोई सुझाव देना चाहेंगे जिससे ऑनलाइन पढ़ाने में और सुधार हो सके, जिससे अधिक से अधिक बच्चे लाभान्वित हो सकें।