हरियाणा में 45 साल में 10 मीटर तक नीचे चला गया भू-जल

  • 54 साल में सात गुना हुआ हरियाणा में धान का एरिया, मानसून की बरसात भी लगी घटने
  • पिछले 67 दिनों में प्रदेश में सामान्य से 294 फीसदी अधिक बरसात

पानीपत. हरियाणा में भूजल लगातार नीचे जा रहा है। प्रदेश में धान का एरिया भी बढ़ता जा रहा है और पानी की खपत भी बढ़ रही है। सीएम मनोहर लाल ने बुधवार को बुधवार को उन्होंने ‘मेरा पानी, मेरी विरासत कार्यक्रम लांच किया है, ताकि हम भावी पीढ़ियों के लिए पानी की बचत कर सकें। आंकड़ों पर गौर किया जाए तो प्रदेश में वर्ष 1974 से 2019 तक प्रदेश में भू-जल स्तर 10.65 मीटर नीचे गया है। वर्ष 1984 से 2019 तक यह 10.19 मीटर, वर्ष 1995 से 2019 तक 9.17 मीटर, वर्ष 2008 से 2019 तक 5.22 मीटर, वर्ष 2018-19 तक 0.54 मीटर पानी नीचे गया है। सीजन 2019 जून से अक्टूबर तक 0.23 मीटर पानी में सुधार हुआ है। जून-2019 में जहां प्रदेश का औसतन भू-जल स्तर 20.85 मीटर नीचे था, अक्टूबर 2019 में यह 20.65 मीटर हो गया। चिंता की बात भी है कि प्रदेश का भू-जल स्तर पिछले 45 सालों मंे 10.65 मीटर से 20.65 मीटर हो चुका है। यानी करीब 10 मीटर पानी नीचे की ओर गया है।
हरियाणा में वर्ष 1966 में जहां 1.92 लाख हेक्टेयर में धान की रोपाई होती थी, अब यह करीब सात गुणा से अधिक बढ़ चुका है। अब यह 14 लाख हेक्टेयर से अधिक हो चुका है और हर साल इसमें बढ़ोत्तरी हो रही है। वर्ष 2014 में 12.77 लाख हेक्टेयर, 2015 में 13.53, वर्ष 2016 में 13.86, वर्ष 2017 में 14.22, वर्ष 2018 में 14.47 और वर्ष 2019 में 14.70 लाख हेक्टेयर एरिया में धान की रोपाई की गई थी। हरियाणा में पिछले 67 दिनों में करीब 88 एमएम बरसात हो चुकी है। इस अवधि में अमूमन 22.5 एमएम बरसात होती है।

जल नहीं बचाया तो भावी पीढ़ियों को पेयजल की होगी दिक्कत

सरकार के निर्णय के पीछे ये बड़ा कारण
भू-जल की कमी धान उत्पादक जिलों में सबसे अधिक हो रही है। कुरूक्षेत्र में जहां यह 41.4 मीटर, करनाल में 21.2 मीटर, कैथल में 31.95 मीटर तक नीचे जा चुका है। जबकि महेंद्रगढ़ में भू-जल सबसे अधिक नीचे है, यहां आंकड़ा 47.36 मीटर तक जा चुका है। पिछले साल हरियाणा में मानसून सीजन के दौरान 255 एमएम बरसात हुई है, जो सामान्य से करीब 42 फीसदी कम है।