लुधियाना, जालंधर, कालाअंब और करनाल से पैदल भगाए श्रमिक कलानौर बॉर्डर पर रोके, रजिस्ट्रेशन के बाद बसों से भेज रहे यूपी

  • पंजाब और हरियाणा से लाखाें की संख्या में श्रमिकों ने अपने वतन लौटने के लिए कराया रजिस्ट्रेशन
  • बार्डर में धूप में रोके श्रमिक परेशान, न पानी मिल रहा- न ही खाना
  • सदर थाना एसएचओ बोले- मेडिकल के बाद स्कूल में भोजन की व्यवस्था

पानीपत. देश की अर्थ व्यवस्था की धुरी कही जाने वाले श्रमिक लॉकडाउन में बुरी तरह फंस गए हैं। ठेकेदार व कारखाना मालिक ने साथ छोड़ दिया, वेतन तक काट लिया और खाने को नहीं दिया तो पैदल ही सैकड़ों-हजारों किलोमीटर दूर यूपी व बिहार के लिए रेल लाइनों, खेतों व सड़कों के किनारे से निकल लिए। जब वे यमुनानगर में यूपी-हरियाणा बार्डर पर पहुंचे तो पुलिस ने रोक लिया। यूपी में प्रवेश नहीं करने दिया। श्रमिकों में सबसे ज्यादा संख्या यूपी के उन श्रमिकों की है, जो जालंधर, लुधियाना, कालाअंब व बदी इंडस्ट्रियल एरिया के कारखानों का पहिया घुमाने के लिए कुछ दिन पहले तक अपना पसीना बहा रहे थे। ऐसे में सीएम मनोहर लाल ने कहा कि थोड़ा संयम रखें, सभी को उनके घर भेजने के लिए ट्रेन व बसों से व्यवस्था की जा रही है।
श्रमिकों का कहना है कि पंजाब पुलिस व लेबर ठेकेदार डंडे मारकर भगा रहे हैं। क्वार्टरों को खाली करा लिया है। मजबूरी में वे पैदल निकल लिए। श्रमिक अब एक साथ बहुत अधिक संख्या में नहीं निकल रहे हैं। पकड़े जान के डर से वे रेलवे लाइन व खेतों के रास्ते दो से पांच की संख्या में आ रहे हैं, लेकिन हर तरफ नाके लगे होने के कारण यूपी में प्रवेश नहीं कर पा रहे। वहीं, कलानौर स्कूल में रोके उत्तराखंड के प्रदीप, केशव, भूपेंद्र, मंजीत का कहना है कि वे करनाल के नामी होटल में काम करते थे। लॉकडाउन बढ़ा तो मालिक ने मदद नहीं की, वेतन नहीं दिया। जेब में पैसे नहीं हैं। इसलिए पैदल ही घर के लिए निकल पड़े। यहां पर पुलिस ने रोक लिया और स्कूल में भेजा है।

बार्डर का दर्द : 300 श्रमिकों को रोका
कलानौर बार्डर पर 300 श्रमिकों को पुलिस ने रोका है। बाइपास पर वाहन चालकों के लिए बने रेस्ट एरिया में धूप में श्रमिक अपने सामान व साइकिलों के साथ बैठे हैं। जब बात की तो कई रोने लगे। लुधियाना व पटियाला से यहां पहुंचे श्रमिक प्रदीप, पंकज, धर्मवीर, सुरेश समेत अन्य ने बताया कि 3 दिन पैदल चलकर यहां पर पहुंचे हैं। वे भूखे हैं पर खाना नहीं मिल रहा। इन्हें कलानौर के स्कूल में शिफ्ट किया जाएगा।

कलानौर स्कूल से बसों द्वारा श्रमिकों को भेजना किया शुरू

कलानौर स्कूल में यूपी के 306, बिहार के 51 व उत्तराखंड के नौ श्रमिकों को प्रशासन ने ठहराया है। यहां पर श्रमिकों को खाने की तो कोई परेशानी नहीं है पर लेटने की दिक्कत जरूर है। यहां पर पुलिस कर्मचारी डीएसपी हेड क्वार्टर सुभाष के नेतृत्व में जिले के हिसाब से श्रमिकों की सूची तैयार करने में लगे हैं। बाहर रोडवेज की बसें श्रमिकों को यूपी ले जाने के लिए लगाई जा चुकी हैं।

पानीपत में 80 हजार रजिस्ट्रेशन

  • पानीपत : जिले में 3 लाख के करीब प्रवासी मजदूर हैं। इनमें से 1.20 लाख के करीब मजदूर लॉकडाउन के शुरुआत में चले गए। पिछले तीन दिनों में 80 हजार मजदूरों ने रजिस्ट्रेशन कराया है।
  • रोहतक : रोहतक में बीते दो दिन में अब तक 27245 लोगों का रजिस्ट्रेशन किया गया है।
  • झज्जर : में 57 हजार प्रवासी मजदूरों ने अपने राज्यों को जाने के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया है। वहीं, 8500 लोगों ने झज्जर में आने को रजिस्ट्रेशन कराया है।
  • सोनीपत : अब तक 43 हजार 200 लाेगाें ने घर जाने की इच्छा जताई है। इन प्रवासियाें में बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उड़ीसा, झारखंड, छत्तीसगढ़ के श्रमिक हैं।
  • करनाल : 776 मजदूरों को सेल्टर होम में रखा था। इनमें यूपी के ज्यादा मजदूर थे, इन्हें 50 बसों के माध्यम से अपने-अपने जिला में भेज दिया है। घरौंडा व करनाल में 385 प्रवासी मजदूर आ गए हैं।