रेहड़ी व खोमचे वालों ने मांगी काम शुरू करने की अनुमति

  • ग्रामीण क्षेत्रों में नहीं खोलने दिए जा रहे सैलून

बौंदकलां. कोविड 19 के चलते 21 मार्च के बाद से ही रेहड़ी और खोमचे वालों का धंधा बंद चल रहा है। जिसके चलते रेहड़ी लगाने वालों के सामने रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया है। रेहड़ी लगाने वालों ने जिला उपायुक्त और सरकार से मांग की है कि दुकानों की तर्ज पर ही उनको भी अपना काम धंधा शुरू करने की अनुमति प्रदान की जाए। जिससे कि उनके परिवारों की रोजी रोटी चला सके। ग्रामीण क्षेत्र में हेयर सैलून संचालकों को भी अभी तक राहत प्रदान नहीं की गई है।
गत 22 मार्च को जनता कर्फ्यू, 25 मार्च से लॉकडाउन 1.0, 15 अप्रैल से लॉकडाउन 2.0 और 4 मई से लॉकडाउन 3.0 आरंभ हो चुका है। केंद्र सरकार ने ऑरेंज और ग्रीन जोन में आने वाले क्षेत्रों में रोजमर्रा के साथ अन्य दुकानों को खोलने के साथ ही अन्य छोटे मोटे काम धंधे करने की अनुमति जारी कर दी है। चरखी दादरी जिला ऑरेंज जोन मेंं आने के बाद भी प्रशासन ने ग्रामीण क्षेत्र बौंदकलां, सांजवास, सांवड़, अचीना व रानीला क्षेत्र में गोल गप्पे, पनीर पकौड़े, दही भल्ले, जूस, जलेबी और अन्य खाद्य पदार्थ बनाने वालों को राहत प्रदान नहीं की गई है। कस्बे के रेहड़ी लगाने वाले रामबीर प्रजापत, सोनू, अजीत सैनी, संदीप जोगी, सुनील, जयपाल प्रजापत और बिल्लू भट्ट ने बताया पिछले डेढ़ महीने से काम धंधा बंद होने के कारण घर का खर्च भी नहीं चल पा रहा है। सरकार ने दुकानदारों को राहत दी है। सरकार और प्रशासन को उनके परिवारों की चिंता करते हुए अनुमति देनी चाहिए। इन ग्रामीणों ने बताया कि प्रशासन की हिदायत के साथ मास्क और सैनिटाजर के साथ ही केवल पैकिंग करके खाद्य पदार्थ बेचने के लिए तैयार है।

मास्क पहनने की शर्त के साथ खोलने की दी है अनुमति

जिला उपायुक्त द्वारा 25 अप्रैल को जारी किए गए पत्र में प्वाइंट नंबर 4 पर शॉपिंग मॉल को छोड़कर सभी प्रकार की ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित दुकानों को शारीरिक दूरी का पालन करने, मास्क पहनने की शर्त के साथ खोलने की अनुमति दी गई है। लेकिन उसके बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों में सैलून नहीं खोलने दिए जा रहेे है।