डीसी ने पर्यटन केंद्र के लिए देखी 75 एकड़ पंचायती भूमि

  • जल भराव वाली जमीन पर इको टूरिज्म सेंटर व बर्डिंग साइट बनाने पर हो रहा विचार

चरखी दादरी. दादरी जिला में पर्यटन केंद्र की कमी शायद आने वाले दिनों में पूरी हो सकती है। गांव बिरहीं कलां की जलभराव वाली लगभग 75 एकड़ पंचायती भूमि को इको टूरिज्म सैंटर व पक्षियों के लिए बर्डिंग साइट बनाने पर विचार किया जा रहा है।
उपायुक्त श्यामलाल पूनिया ने अतिरिक्त उपायुक्त मो. इमरान रजा के साथ गुरुवार को इस जमीन का निरीक्षण किया। उनके साथ जिला वन अधिकारी सुभाष यादव व परियोजना अधिकारी दीवान श्योराण भी मौजूद रहे। उपायुक्त को इस गांव के निवासी व पंचायत प्रतिनिधियों ने बताया कि यह भूमि सेम से ग्रस्त है। इस पर पिछले दस-बारह सालों से खेती नहीं की जा रही है। यह भूमि खेती योग्य नहीं रही और यहां पैदावार शून्य है। यहां आमतौर पर प्रवासी पक्षियों का आवागमन लगा रहता है।

इस जमीन के दोनों तरफ अरावली की पर्वत श्रृंखला है। इस पर्यटन केंद्र के बनने से यहां पर्यावरण का वातावरण और अधिक सुहावना होगा। डीसी ने कहा कि यह भूमि एक पक्षी संरक्षण केंद्र एवं पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो सकती है। इस समय दादरी जिला में एक भी पर्यटन केंद्र नहीं है। उल्लेखनीय है कि आज से करीब चालीस साल पहले भिवानी के तत्कालीन डीसी अशोक पाहवा ने दादरी शहर के श्यामसर सरोवर को पर्यटन केंद्र का स्वरूप प्रदान करते हुए यहां नौकायन को शुरू किया था।

पांडवान में माइनर की सफाई का भी किया अवलाेकन

अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि पक्षियों के प्रजनन के लिए भी यह उत्तम स्थान है। दोनों तरफ पहाड़ियां होने के कारण पक्षी यहां बच्चों व अपने अंडों की सुरक्षा के लिए घोंसले बना सकते हैं। इस मौके पर अधिकारियों ने गांव पांडवान की माइनर में मनरेगा से करवाई जा रही सफाई का भी अवलोकन किया। गांव के सरपंच राजकरण ने बताया कि इस कार्य के दौरान मुंह को ढक कर रखने व शारीरिक दूरी का ध्यान रखा जा रहा है।