सद्भावना संस्था की महिला विंग की सदस्यों ने घरों में काम करने वाली महिलाओं की मदद कर निभाई नैतिक जिम्मेदारी

  • 110 सदस्यों ने 82 मेड को 45 दिन बिना काम किए एडवांस सैलरी देने के साथ ही एक महीने का राशन भी दिया

हिसार. कोरोना की आपदा के दौरान कुछ ऐसे भी महिलाएं हैं जो घर के अंदर रहकर अपनी और परिवार की सुरक्षा के साथ-साथ अपने नैतिक कर्तव्य को भी निभा रही हैं। सद्भावना संस्था की महिला विंग की 110 सदस्यों ने अपने घरों में काम करने वाली 82 मेड को 45 दिन बिना काम किए एडवांस सैलरी देने के साथ ही एक महीने का राशन भी दिया। राशन में चीनी, चावल, तेल, आटा, मसाले और सब्जियां शामिल थीं। राशन का इंतजाम सद्भावना संस्था के चेयरमेन डॉ. मनोज सोनी, पार्षद अमित ग्रोवर, दर्शना सिंगल, दीपक जैन और महेंद्र भयाना ने मिलकर किया। इसके साथ ही सद्भावना संस्था की युवा विंग व सीनियर सिटीजन विंग ने हिसार में रहने वाले 75 ऑटो चालकों, सेक्टरों में प्रेस का काम करने वाले प्रवासी परिवारों सहित शिव कॉलोनी, सूर्य नगर, पटेल नगर, आज़ाद नगर, कैमरी रोड, डोगरान बाजार, विजय नगर सहित अन्य क्षेत्रों में भी राशन पहुंचाया है।
इन सदस्याें ने दिया मानवता का परिचय
संस्था की सदस्य डॉ. परवीन खुराना, रेजी, डॉ. शिखा गांधी, निशा गोयल, विनीता जैन, दर्शना सिंगल, बबिता दीक्षित, चन्द्र छाबड़ा, मनीषा चावला, ज्योति सिक्का, सुनीता गिरधर, शकुंतला रहेजा, कोमल राठोड, शशि शर्मा, दर्शन शर्मा, रेणु शर्मा, राज ठकराल, कृष्णा अग्रवाल, गोल्डी गाबा, अमरजीत कौर, शालिनी अग्रवाल, मंजू तनेजा, शशि गिरधर, बिमला जैन, डिम्पल कालड़ा, डाॅ. ज्योति, स्वीटी गेरा, सुमन बतरा आरती शर्मा, शशि नारंग ने अग्रणीय भूमिका निभाई।
प्रवासी महिलाओं के दर्द और जरूरत काे समझ की सहायता
सद्भावना संस्था के अध्यक्ष अमित ग्रोवर ने बताया कि घरों में सफाई करने वाली ये महिलाएं सेक्टर-16-17 की झुग्गियों, प्रेम कॉलोनी, पटेल नगर व अन्य क्षेत्रों से आती हैं। इनमें करीब 82 ऐसी महिलाएं थीं जो घरों में सफाई करके अपनी जीविका चलाती हैं ये महिलाएं बिहार, मध्यप्रदेश, यूपी की है जो लंबे समय से हिसार में अपने परिवार के साथ है। इसके अलावा स्थानीय पटेल नगर व आसपास के क्षेत्र की महिलाएं भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सद्भावना संस्था के नाम के अनुरूप इन महिलाओं ने प्रवासी महिलाओं के दर्द और जरूरत को समझा क्याेंकि ये वाे महिलाएं हैं जिनके पास आजीविका चलाने का कोई दूसरा रास्ता नहीं है इस आपात स्थिति में उनकी मदद करते हुए इन सभी महिलाओं ने अपना नैतिक फर्ज निभाया।