लॉकडाउन में बाहर जाने से बचने को वकील ने छत पर उगाई सब्जियां

  • लॉकडाउन में बाहर जाने से बचने को वकील ने छत पर उगाई सब्जियां
  • नहीं करते किसी प्रकार के कीटनाशक का प्रयाेग मिल रहा अच्छा उत्पादन

रतिया. कोरोना का संक्रमण व बाजार से सब्जी आदि लाने के झंझट से बचने को लेकर एडवोकेट जगदेव औलख ने अपनी छत पर ही सब्जियां उगानी शुरू कर दी हैं। इन सब्जियों की पैदावार में किसी तरह के पेस्टीसाइड या कीटनाशक का प्रयोग नहीं किया है। इन्हें देसी तरीके से तैयार व प्रयोग किया जा रहा है।
नए बस स्टैंड के सामने डेजी कॉलोनी निवासी एडवोकेट जगदेव ने बताया कि अपनी छत पर करीब 50 गमले रखकर उनमें टिंडे, तोरी, बैंगन, तर, ककड़ी, करेले, टमाटर, घीया, खीरा की सब्जियां लगाई हैं। इन सब्जियों में वे कीटनाशक व अन्य दवाओं क प्रयोग नहीं करते। सुबह-शाम पानी देने के साथ ही देखभाल करते हैं।
सभी सब्जियां पेस्टीसाइड मुक्त हैं। उनका कहना है कि उनकी देखभाल के लिए वे हर रोज सुबह-शाम दो-दो घंटे का समय निकालते हैं। आम बेलों की बजाय ये फल भी ज्यादा दे रही हैं। जगदेव सिंह ने बताया कि जब गर्मी ज्यादा हो जाती है तो वे इन गमलों को कूलर व पंखे वाले कमरे में रख देते हैं। इससे इन्हें ठंडक मिलती है और गर्मी का प्रकोप नहीं पड़ता। उन्होंने कई ऐसी सब्जियां भी लगाई हैं, जो बेमौसमी हैं और उन्हें जरूरत के अनुसार ठंड भी दी जाती है।
अनुकूल वातावरण मिलने से सब्जियां प्रभावित नहीं होती, बल्कि अच्छी पैदावार देती हैं। कुछ समय पहले उन्होंने जामुन का एक पेड़ भी लगाया हुआ है। अब जब लॉकडाउन के चलते सब्जियों की खरीददारी को लेकर झंझट थे, इसलिए उन्होंने छत पर सब्जियां उगाने की ठानी। जगदेव सिंह ने बताया कि जो सब्जियां बाजार में मिलती हैं, वे पेस्टीसाइड से तैयार होती हैं, जिसका स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।
दूसरा वे बाहर से आने के कारण बासी हो जाती है और ताजा नहीं रहती। बाजार से सब्जियां काफी महंगी मिलती हैं। उसे घर से ही ताजा व सस्ती सब्जियां मिल जाती हैं।