भूख और बेरोजगारी से परेशान प्रवासी श्रमिकों का पैदल पलायन

साढौरा. पंजाब और हिमाचल में काम करने वाले यूपी के श्रमिकों ने भूख और बेरोजगारी से परेशान होकर अपने घरों की तरफ पैदल ही पलायन शुरू कर दिया है। ऐसे ही कई श्रमिकों के झुंड सोमवार रात व मंगलवार सुबह को देखे गए। सोमवार रात को शामपुर मार्ग पर मिले 22 श्रमिकों का झुंड अमृतसर व लुधियाना से 4 दिन पहले यूपी के शहरों के लिए रवाना हुए थे। यह लोग छिपते हुए अपनी इस कठिन यात्रा को जारी रखे हुए हैं। इन्हीं लोगों की तरह मंगलवार सुबह को दोसड़का चौक पर 9 श्रमिकों का झुंड तथा गांव हवेली के पास 5 श्रमिकों का झुंड मिला। गांव सादिकपुर के पास एक अकेला श्रमिक तो श्मशानघाट के पास दो श्रमिक अपने घरों की तरफ लौटते पाए गए। यह सभी श्रमिक हिमाचल के कालाअंब औद्योगिक क्षेत्र में काम करते थे।
श्रमिक चाहे पंजाब के अमृतसर, लुधियाना या कालाअंब के हों पर कहानी लगभग सभी की एक सी है। लॉकडाउन लागू होने के बाद उद्योग बंद हुए तो यह लोग भी बेरोजगार हो गए। जेब में जो कुछ था वो अब खत्म हो चुका है। इन हालात में न तो कारखानेदारों ने कोई मदद की और न ही किसी समाजसेवी संस्था ने इन्हें एक भी वक्त का खाना दिया। मकान मालिकों ने किराया न मिलने पर इनके साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। बेरोजगारी और भूख के दौरान उनके साथ हो रही गाली-गलौज से परेशान होकर इन श्रमिकों ने पैदल ही अपने घरों की तरफ लौटना शुरू कर दिया है। इस पैदल सफर के दौरान लगने वाली भूख को मिटाने के लिए इनके पास मामूली राशन है। लंबी पैदल यात्रा की थकान से श्रमिक पस्त हो चुके हैं लेकिन घर पहुंचने का हौसला इनमें जवान है। इन्हें खुद भी नहीं पता की यह अपने घर तक सकुशल पहुंच पाएंगे भी या नहीं, लेकिन इनका सफर जारी है।

बीमार भाई को दवा दिलवाने पैदल जाना पड़ रहा
कालाअंब के कारखाने में काम करने वाले यूपी के जिला रामपुर वासी धनुष पाल के भाई गब्बर सिंह को दिमागी बीमारी है। उसका उपचार यमुनानगर के एक निजी चिकित्सक द्वारा किया जा रहा है। कई दिन से उसकी दवाइयां खत्म होने के अलावा चिकित्सक से जांच करवानी जरूरी है लेकिन लॉकडाउन के कारण यमुनानगर जाने के लिए कोई वाहन न मिला तो धनुष अपने बीमार भाई गब्बर के साथ पैदल ही कालाअंब से यमुनानगर के सफर पर चल पड़ा है। इस सफर के दौरान मंगलवार सुबह यह दोनों रसूलपुर पहुंचे थे।