बेमौसमी बारिश के चलते बढ़ी चिंता, अब मंडियों में सड़ रहा अनाज

  • गेहूं सूखने तक मंडियों से नहीं होगा उठान, किसानों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, दोबारा खरीद शुरू होने में हो सकती है देरी

सिरसा. जिले की मंडियों में खुले आसमान तले बरसात में बार- बार भीगता गेहूं प्रशासनिक प्रबंधों के दावों की पोल खोल रहा है। बरसात से भीगा गेहूं मंडियों में सड़ने लगा है। लेकिन संबंधित अधिकारी इसको लेकर गंभीर नहीं हैं। पिछले दिनों बारिश से जिले की मंडियों में खुले आसमान तले भीगी 20 लाख क्विंटल गेहूं सुखाने का काम सिरे नहीं चढ़ पाया है कि बुधवार सुबह झमाझम बरसात से गेहूं की बोरियां एक बारगी फिर से भीग गई। अनाज मंडी में मजदूर गेहूं की बोरियों को बरसाती पानी से निकालते नजर आए। वहीं गेहूं सूखने तक मंडियों से उठान हो पाना मुश्किल है।
जिले में 27 हजार किसानों से 13 दिनों में 43 लाख 31 हजार 760 क्विंटल गेहूं खरीदी थी। लेकिन मंडियों से 20 लाख क्विंटल गेहूं उठान नहीं हो पाया था। पिछले दिनों बरसात में खुले आसमान तले गेहूं की बोरियां भीग गई थी, जिनको मजदूर सुखाने में जुटे थे कि बारिश से दोबारा गेहूं भीग गया। गेहूं जल्दी से सुखाया नहीं गया, तो इसके सड़ने की नौबत आ जाएगी। जिससे स्टोरेज की दिक्कतें आएंगी और मंडियों से उठान में देरी किसानों की मुश्किलें बढ़ा सकती है, क्योंकि संबंधित अधिकारियों की लापरवाही व उदासीनता के चलते मंडियां गेहूं की बोरियों से अटी पड़ी हैं। किसानों के लिए गेहूं उतारने की मंडियों में जगह तक नहीं है।

मंडियों में कैरेट और तिरपाल की व्यवस्था नहीं

डीसी की ओर से दो दिन पहले ही गेहूं की सुरक्षा के लिए पुख्ता प्रबंध करने के निर्देश दिए गए थे। मगर उसी दिन बरसात आने से लाखों क्विंटल गेहूं भीग गई थी। इसलिए उसका उठान नहीं हो पाया। उसके बाद तेजी से गेहूं मंडी में आती रही। उठाने नहीं होने के कारण गेहूं खुले में डालनी पड़ रही है। जो बैग भरे जा रहे हैं। वे नीचे ही रखे जा रहे हैं। कैरेट नहीं होने के कारण बरसात का पानी नीचे घुस जाता है। गेहूं भीग रही है। तिरपाल का भी पुख्ता प्रबंध नहीं है। इसलिए नुकसान हो रहा है।