प्रवासियों ने घर जाने की मांग पर जाम लगाया, समझाने पहुंची पुलिस पर बरसाए पत्थर, फिर पुलिस ने पीट-पीटकर खदेड़े

  • कई दिन से अपने घर जाने की उम्मीद में बैठे प्रवासी श्रमिकों का धैर्य सोमवार को जवाब दे गया
  • पुलिसकर्मियों को सुरक्षा के लिए बाइक सवारों से मांगने पड़े हेलमेट, लाठीचार्ज कर हालात पर काबू पाया, कई को हिरासत में लिया, दो पुलिसकर्मी घायल

यमुनानगर. घर जाने के इंतजार में बैठे प्रवासी सोमवार सुबह भड़क गए। उन्होंने जोड़िया नाका पर रोड जाम कर दिया। पुलिस समझाने आई तो उसके साथ मारपीट की। वहीं गाड़ियां तोड़ दीं। पुलिस और प्रवासियों में हिंसक झड़प हुई। पुलिस को भागकर और छिपकर जान बचानी पड़ी। फर्कपुर थाना से पुलिस टीम पहुंची तो श्रमिकाें ने उन पर पथराव कर दिया। मारपीट और पथराव में दो पुलिसकर्मी घायल हो गए। हालात बिगड़ते देख अतिरिक्त पुलिस फोर्स बुलानी पड़ी। प्रवासियों ने पुलिस फोर्स पर भी पथराव कर दिया, लेकिन पुलिस ने लाठियां भांजते हुए उन्हें खदेड़ना शुरू कर दिया।
 अब तक पुलिस बैकफुट पर थी, लेकिन फोर्स के आने के बाद पिटने की बारी प्रवासियों की थी। पुलिस को देखकर कोई छत पर बने शौचालय में छिप गया तो कोई कपड़े धोने लगा। पुलिस ने उन्हें शौचालय से निकाल कर लाठियों से पीटा। वहीं कपड़े धोते प्रवासी को भी लेटाकर धुनाईेे की। इसके बाद डीएसपी प्रदीप राणा ने ऐसा करने से पुलिस कर्मियों को रोका ताकि हालत और न बिगड़ जाएं। इस दौरान पुलिस ने मौके से कुछ प्रवासियों को हिरासत में लिया है। उन पर पुलिस ने केस दर्ज किया है। प्रवासियों के हमले में राइडर कर्मी संजीव और एक अन्य पुलिस कर्मी घायल हुआ है। वहीं प्रवासी मजदूरों ने बताया कि सरकार ने प्रवासी के घर जाने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन का जो नियम बना है, उसमें रजिस्ट्रेशन हो ही नहीं पा रहा।

पहले कानून हाथ में लिया, जब पुलिस ने डंडा चलाया तो भागे

रोड जाम, पुलिस पर पथराव और मारपीट की सूचना प्रशासन तक पहुंची तो वहां पर डीएसपी प्रदीप राणा और कई थानों की पुलिस पहुंची। पुलिस ने सूझबूझ से मामला शांत किया। जब तक मामला भड़क रहा था वहां पर पुलिस को छोड़ कोई प्रशासनिक अधिकारी नहीं पहुंचा। मामला शांत होने के बाद 10 बजकर 48 मिनट पर डीआरओ पहुंचे। हालांकि इस दौरान पुलिस ने उन्हें नहीं पहचाना। जब एसएचओ मुकेश को उन्होंने बताया तो तब पुलिस वालों ने उन्हें पहचाना कि डीआरओ आ गए हैं।
फैक्टरी मालिक और ठेकेदार की शह प्रवासियाें ने किया हमला, केस
पुलिस ने इस मामले में राइडर कर्मी संजीव की शिकायत पर धारा-148, 149, 186, 188, 269, 270, 332, 353, 341, 427, 323, 506 और 120बी में केस दर्ज किया है। आरोप है कि जब संजीव कुमार साथी एसपीओ रमेश चंद के साथ जाम लगाने वालों को समझाने गए तो उन्होंने हमला कर दिया। उनका आरोप है कि मजदूरों ने यह सब फैक्टरी मालिक और ठेकेदार की शह पर किया है। पुलिस अब इसमें फैक्टरी मालिक और ठेकेदार को भी आरोपी बनाएगी।

फर्नीचर संचालक ने अपने घर में छिपाकर बचाए पुलिस वाले
विश्वकर्मा फर्नीचर संचालक ने बताया कि जब राइडर चालक को पीटा गया तो उसे आसपास के लोग पास के ही डॉक्टर पर ले आए। वहां पीसीआर कर्मी पहुंचे। उन्होंने उनके शोरूम के सामने गाड़ी लगा दी। पुलिस को देखते ही भीड़ उनकी तरफ दौड़ी। उन्होंने पुलिस वालों को अपने घर में अंदर कर दरवाजा लगाया। भीड़ पुलिस वाले को देखते ही पथराव करने पर उतारू हो रही थी। दुकानदारों ने भीड़ को पीसीआर तोड़ने से भी रोका।

पुलिस बाइक पर लाई बॉडी प्रोटेक्टर

अचानक हुए विवाद से निपटने के लिए पुलिस के पास इंतजाम नहीं थे। वहां पुलिसकर्मी पहुंचे तो उनके पास बॉडी प्रोटेक्टर नहीं था। तीन पुलिस वालों ने सड़क किनारे खड़े तीन बाइक सवारों से हेलमेट लेकर भीड़ को खदेड़ा। वहीं बाद में बाइक पर पुलिस लाइन से डंडे और बॉडी प्रोटेक्टर लाए गए। तब जाकर पुलिस कर्मियों ने खुद को सुरक्षित किया।
प्रवासी वर्कर धैर्य रखें, उन्हें घर जरूर भेजेंगे

डीसी मुकुल कुमार ने बताया कि सरकार ने फैसला लिया है कि प्रवासी वर्करों को उनके घर भेजा जाएगा। इसके लिए पहले इन्हें ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसके बाद इन्हें यहां से भेजने की प्रकिया शुरू होगी। अगर एक स्थान के प्रवासियों की संख्या 500 या इससे ज्यादा है तो उन्हें ट्रेन से भेजा जाएगा। कम है तो बसों से भेजा जाएगा।
हमें फैक्टरी वाले वेतन नहीं दे रहे, खाना तक नहीं मिल रहा

प्रवासी कई दिन से अपने घर जाने की उम्मीद में बैठे हैं। सोमवार सुबह साढ़े नौ बजे करीब 200 श्रमिकाें ने एसके रोड जाम कर दिया। जाम लगाने वाले दीपक और जितेंद्र ने बताया कि फैक्टरी बंद है। मालिक वेतन नहीं दे रहा। खाना तक उन्हें यहां नहीं मिल रहा। घर जाने के लिए वे थाने से लेकर डीसी आॅफिस तक जा चुके हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।